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महाअष्टमी कल: सुख-समृद्धि की कामना से होगी नगर पूजा, हरसिद्धि माता मंदिर में शासकीय पूजन
Mon, 15 Apr 2024 10:33 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Mon, 15 Apr 2024 10:33 PM IST
सार
धर्मधानी उज्जैन में नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा आदि अनादि काल से चली आ रही है। मान्यता है नगर की सुरक्षा व सुख समृद्धि की कामना से सम्राट विक्रमादित्य नगर पूजा किया करते थे।
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महाष्टमी पर इन प्रमुख मंदिरों पर होगा पूजन।
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विस्तार
चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर 16 अप्रैल को निरंजनी अखाड़े द्वारा सुख, समृद्धि की कामना से नगर पूजा की जाएगी। चौबीस खंभा माता मंदिर स्थित माता महामाया व महालया को मंदिर का भोग लगाकर पूजन की शुरुआत होगी। इसके बाद नगर में स्थित चालीस से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाएगी।
धर्मधानी उज्जैन में नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा आदि अनादि काल से चली आ रही है। मान्यता है नगर की सुरक्षा व सुख समृद्धि की कामना से सम्राट विक्रमादित्य नगर पूजा किया करते थे। बाद में सिंधिया स्टेट की ओर से इस परंपरा का निर्वहन किया जाता था। इसके साथ ही कल हरसिद्धि माता मंदिर मे शासकीय पूजा व घरों में कुलदेवी की पूजा की जाएगी।
आजादी के बाद शासन की ओर से प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा कराई जाती है। लेकिन चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा कुछ वर्षों पहले निरंजनी अखाड़े की ओर से शुरू की गई है। इस बार भी 16 अप्रैल को निरंजनी अखाड़े के महंत तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरीजी महाराज द्वारा नगर पूजा की जाएगी। चौबीस खंभा माता मंदिर से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद नगर के विभिन्न कोणों में स्थित देवी व भैरव मंदिरों में विधि विधान के साथ पूजा की जाएगी। नगर पूजा के साथ ही मंगलवार को महाष्टमी का पर्व मनेगा। प्रसिद्ध देवी मंदिरों में विशेष पूजन-अनुष्ठान होंगे। वहीं शक्तिपीठ श्री हरसिद्धि मंदिर में महाअष्टमी पर दोपहर में शासकीय पूजन किया जाएगा। मंदिर में हवन-अनुष्ठान के बाद नवमी तिथि की रात्रि 12 बजे जवारे विसर्जन किए जाएंगे। अष्टमी पूजन के बाद देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए रहेगी।
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चैत्र मास की नवरात्रि पर्व के चलते मंगलवार को सुबह घरों में महाअष्टमी का पूजन होगा। इस दिन देवी मंदिरों व घरों में देवी आराधना कर कुल देवी का पूजन किया जाता है। मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजन के बाद हवन और अनुष्ठान का दौर शुरू हो जाता है। प्रसिद्ध शक्ति पीठ मां हरसिद्धि मंदिर में भी महाअष्टमी पर माता की आराधना करते हुए पूजन अनुष्ठान होता है।
मंदिर के पुजारी राजू गिरि ने बताया कि नवरात्रि पर्व में महाअष्टमी का विशेष महत्व रहता है। यहां पर माता का विशेष पूजन और हवन संधिकाल में होता है। अष्टमी पर प्रांरभ होकर नवमी पर पूर्णाआहुति होती है। महाअष्टमी पर दोपहर 12 बजे शासकीय पूजन होगा। पूजन के बाद संधिकाल में हवन प्रारंभ होगा। कन्या पूजन के पश्चात नवमी की रात 12 बजे जवारे विसर्जन के साथ पूर्णाहुति होगी।
मंदिर में दर्शनार्थियों को हवन चलने तक सतत दर्शन होते हैं। इसी तरह चौबीस खंबा माता मंदिर, चामुण्डा माता मंदिर, गढक़ालिका माता, भूखी माता, बगुलामुखी माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में अष्टमी तिथि पर विशेष पूजन-अनुष्ठान किया जाता है। घरों में अष्टमी पूजन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते है।
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धर्मधानी उज्जैन में नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा आदि अनादि काल से चली आ रही है। मान्यता है नगर की सुरक्षा व सुख समृद्धि की कामना से सम्राट विक्रमादित्य नगर पूजा किया करते थे। बाद में सिंधिया स्टेट की ओर से इस परंपरा का निर्वहन किया जाता था। इसके साथ ही कल हरसिद्धि माता मंदिर मे शासकीय पूजा व घरों में कुलदेवी की पूजा की जाएगी।
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आजादी के बाद शासन की ओर से प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा कराई जाती है। लेकिन चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा कुछ वर्षों पहले निरंजनी अखाड़े की ओर से शुरू की गई है। इस बार भी 16 अप्रैल को निरंजनी अखाड़े के महंत तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरीजी महाराज द्वारा नगर पूजा की जाएगी। चौबीस खंभा माता मंदिर से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद नगर के विभिन्न कोणों में स्थित देवी व भैरव मंदिरों में विधि विधान के साथ पूजा की जाएगी। नगर पूजा के साथ ही मंगलवार को महाष्टमी का पर्व मनेगा। प्रसिद्ध देवी मंदिरों में विशेष पूजन-अनुष्ठान होंगे। वहीं शक्तिपीठ श्री हरसिद्धि मंदिर में महाअष्टमी पर दोपहर में शासकीय पूजन किया जाएगा। मंदिर में हवन-अनुष्ठान के बाद नवमी तिथि की रात्रि 12 बजे जवारे विसर्जन किए जाएंगे। अष्टमी पूजन के बाद देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए रहेगी।
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चैत्र मास की नवरात्रि पर्व के चलते मंगलवार को सुबह घरों में महाअष्टमी का पूजन होगा। इस दिन देवी मंदिरों व घरों में देवी आराधना कर कुल देवी का पूजन किया जाता है। मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजन के बाद हवन और अनुष्ठान का दौर शुरू हो जाता है। प्रसिद्ध शक्ति पीठ मां हरसिद्धि मंदिर में भी महाअष्टमी पर माता की आराधना करते हुए पूजन अनुष्ठान होता है।
मंदिर के पुजारी राजू गिरि ने बताया कि नवरात्रि पर्व में महाअष्टमी का विशेष महत्व रहता है। यहां पर माता का विशेष पूजन और हवन संधिकाल में होता है। अष्टमी पर प्रांरभ होकर नवमी पर पूर्णाआहुति होती है। महाअष्टमी पर दोपहर 12 बजे शासकीय पूजन होगा। पूजन के बाद संधिकाल में हवन प्रारंभ होगा। कन्या पूजन के पश्चात नवमी की रात 12 बजे जवारे विसर्जन के साथ पूर्णाहुति होगी।
मंदिर में दर्शनार्थियों को हवन चलने तक सतत दर्शन होते हैं। इसी तरह चौबीस खंबा माता मंदिर, चामुण्डा माता मंदिर, गढक़ालिका माता, भूखी माता, बगुलामुखी माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में अष्टमी तिथि पर विशेष पूजन-अनुष्ठान किया जाता है। घरों में अष्टमी पूजन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते है।

