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Ujjain: महाकाल अग्निकांड की दोष निवृत्ति के लिए ब्राह्मणों ने किया हरिहर यज्ञ, चारों वेदों की ऋचाओं का हुआ गान

Thu, 28 Mar 2024 07:56 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 28 Mar 2024 07:56 PM IST
सार

उज्जैन स्थित बाबा महाकाल में हुए अग्निकांड की दोष निवृत्ति के लिए ब्राह्मणों ने हरिहर यज्ञ किया। साथ ही  चारों वेद की ऋचाओं का गान किया गया।

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Ujjain News Brahmins performed Harihar Yagya to atone for Mahakal fire incident
हरिहर यज्ञ करते ब्राह्मण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होली पर्व पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में हुए अग्निकांड को लेकर प्रशासन द्वारा करवाई जा रही जांच की रिपोर्ट जो भी हो, लेकिन ब्राह्मणों ने इस दोष की निवृत्ति के लिए अनुष्ठान कर सभी संकटों को दूर करने के साथ ही वेदों की अलग-अलग ऋचाओं के साथ शांति अनुष्ठान किया है। इसमें पहले भगवान का पूजन-अर्चन कर दिव्य मंत्रों से यज्ञ की आहुति भी दी गई है।

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पूरे आयोजन की जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित अमर गुरु डब्बावाला ने बताया कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल के गर्भगृह में अग्निकांड की घटना घटित हुई थी, जिसमें कुल 14 पुजारी, सेवक और अन्य लोग झुलस गए थे। इसके साथ ही सिंहपुरी में वर्षों से जलाई जा रही होलिका में भी ध्वजा अग्नि में ही जल गई थी। इन दोनों ही अग्निकांड की दोष निवृत्ति के लिए सिंहपुरी के ब्राह्मणों के द्वारा हरिहर यज्ञ का आयोजन किया गया। सभी प्रकार के संकटों दुखों का शमन करने के लिए 21 ब्राह्मणों ने शुक्ल यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद और ऋग्वेद की ऋचाओं के माध्यम से शांति अनुष्ठान किया।
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इस अनुष्ठान को अभिषेकात्मक व यज्ञात्मक रूप से किया गया। यह अनुष्ठान पंडित उमाकांत शुक्ल के आचार्यतत्व में संपादित किया गया, जिसमें पंडित रूपम जोशी, पंडित उत्कर्ष जोशी, पंडित दुष्यंत त्रिवेदी, पंडित अक्षत व्यास, पंडित वेद प्रकाश त्रिवेदी, पंडित आयुष त्रिवेदी, पंडित गोपाल व्यास, पंडित देवांश दुबे, पंडित अवधेश त्रिवेदी, पंडित उत्सव आदि उपस्थित रहे।
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संकट और अरिष्ट के निवारण के लिए प्रायश्चित विधि से किया गया शांति याग
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में होलिका दहन के समय प्रहलाद रुपी ध्वज का दग्ध (जल जाना) हो जाना और 15 मिनट के पश्चात महाकालेश्वर के गर्भग्रह में अग्निकांड की घटना का घटना इसके अलावा इस कालखंड में अलग-अलग स्थान पर अग्निकांड की घटना घटने से संकट की स्थिति बनी। इसके निवारण के लिए सिंहपुरी स्थित वरिष्ठजनों की ब्रह्म मंडली ने चर्चा की। चर्चा के दौरान संकट और अरिष्ट के निवारण के लिए प्रायश्चित विधि रूप में शांति याग की चर्चा की, जिसके अंतर्गत यह तय किया गया था कि हरिहर हर दोनों की पूजा की जाए और यज्ञ आत्मक अनुष्ठान संपादित किया जाए। परिस्थिति जन्य जो दोष उत्पन्न हुआ है, उसका शमन हो सके। इसीलिए यह अनुष्ठान किया गया।

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