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Ujjain: तांत्रिक अंधविश्वास के नाम पर रेड सैंड बोआ की तस्करी, पांच गिरफ्तार, नेटवर्क खंगालने में जुटा वन विभाग
Fri, 22 May 2026 11:23 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 11:23 PM IST
सार
रेड सैंड बोआ सांप की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह पर उज्जैन में शिकंजा कसा गया है। पुलिस और वन विभाग ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। बता दें कि अंधविश्वास और तांत्रिक मिथकों के नाम पर इन सांपों की तस्करी की जाती है।
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संरक्षित प्रजाति के सांप रेड सैंड बोआ की तस्करी
विस्तार
उज्जैन में वन विभाग और नीलगंगा थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति के सांप रेड सैंड बोआ की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
वन विभाग के अनुसार रेड सैंड बोआ को लेकर समाज में कई तरह के अंधविश्वास और तांत्रिक मिथक फैले हुए हैं। इसी वजह से इसकी अवैध खरीद-फरोख्त की जाती है। अधिकारी बताते हैं कि कुछ लोग इस सांप को लाखों रुपये में बेचने की कोशिश करते हैं, जबकि इसका कोई वैध बाजार नहीं है।
ये भी पढ़ें: 'बोर्ड मेरे नंबर खा गया..' MP Board परीक्षा मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप, कोर्ट जाने की तैयारी में छात्रा
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डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि नीलगंगा थाना पुलिस ने पहले पांच संदिग्धों को पकड़ा था। उनके कब्जे से रेड सैंड बोआ सांप बरामद हुआ, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति में शामिल है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आरोपियों को अपनी अभिरक्षा में लेकर कार्रवाई शुरू की।
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी आसपास के जिलों में इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहे हैं। अब वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि सांप आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इसे किसे बेचने की तैयारी थी। साथ ही पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े दलालों की भी जांच की जा रही है।
डीएफओ अनुराग तिवारी ने स्पष्ट कहा कि रेड सैंड बोआ का किसी भी प्रकार का व्यापार पूरी तरह गैरकानूनी है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा। वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद उज्जैन में वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
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वन विभाग के अनुसार रेड सैंड बोआ को लेकर समाज में कई तरह के अंधविश्वास और तांत्रिक मिथक फैले हुए हैं। इसी वजह से इसकी अवैध खरीद-फरोख्त की जाती है। अधिकारी बताते हैं कि कुछ लोग इस सांप को लाखों रुपये में बेचने की कोशिश करते हैं, जबकि इसका कोई वैध बाजार नहीं है।
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डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि नीलगंगा थाना पुलिस ने पहले पांच संदिग्धों को पकड़ा था। उनके कब्जे से रेड सैंड बोआ सांप बरामद हुआ, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति में शामिल है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आरोपियों को अपनी अभिरक्षा में लेकर कार्रवाई शुरू की।
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी आसपास के जिलों में इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहे हैं। अब वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि सांप आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इसे किसे बेचने की तैयारी थी। साथ ही पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े दलालों की भी जांच की जा रही है।
डीएफओ अनुराग तिवारी ने स्पष्ट कहा कि रेड सैंड बोआ का किसी भी प्रकार का व्यापार पूरी तरह गैरकानूनी है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा। वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद उज्जैन में वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

संरक्षित प्रजाति के सांप रेड सैंड बोआ की तस्करी

संरक्षित प्रजाति के सांप रेड सैंड बोआ की तस्करी

संरक्षित प्रजाति के सांप रेड सैंड बोआ की तस्करी
