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Ujjain News: भस्म आरती में पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल ने रमाई भस्म, मंदिर में गूंजा जय श्री महाकाल
Sat, 18 Jan 2025 09:04 AM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2025 09:04 AM IST
सार
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि पौष माह माघ कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शनिवार को बाबा महाकाल सुबह चार बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए।
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करें बाबा महाकाल के दर्शन।
विस्तार
उज्जैन श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार को पंचमी पर सुबह हुई भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन कर आकर्षक श्रृंगार किया गया। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, वह देखता ही रह गया। भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। उसके बाद बाबा महाकाल का पूजन-अर्चन कर भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" की गूंज से गुंजायमान हो उठा।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि पौष माह माघ कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शनिवार को बाबा महाकाल सुबह चार बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान करवाकर दूध, दही, शहद, शक्कर, घी आदि पंचामृत से स्नान कराया गया।
पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल का पूजन सामग्री से आकर्षक श्रृंगार किया गया। इसे देखकर भक्त बाबा महाकाल के साथ श्री गणेश की भक्ति में लीन हो गए और "जय श्री महाकाल" का उद्घोष करने लगे। इसके बाद बाबा महाकाल को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई।
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विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि पौष माह माघ कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शनिवार को बाबा महाकाल सुबह चार बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान करवाकर दूध, दही, शहद, शक्कर, घी आदि पंचामृत से स्नान कराया गया।
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पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल का पूजन सामग्री से आकर्षक श्रृंगार किया गया। इसे देखकर भक्त बाबा महाकाल के साथ श्री गणेश की भक्ति में लीन हो गए और "जय श्री महाकाल" का उद्घोष करने लगे। इसके बाद बाबा महाकाल को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई।
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