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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain News ›   Shardiya Navratri Know what is auspicious time for setting up idol of Goddess Durga during Navratri

Shardiya Navratri: जानें नवरात्रि में माता की घट स्थापना के क्या हैं शुभ मुहूर्त, पंडित व्यास ने ये बताया

Wed, 02 Oct 2024 08:15 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 02 Oct 2024 08:15 PM IST
सार

पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास के अनुसार, नवरात्रि में माता की घट स्थापना के साथ ही संपूर्ण विश्व के लोग भक्ति-भाव से माता की पूजा अर्चना में लग जाएंगे।

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Shardiya Navratri Know what is auspicious time for setting up idol of Goddess Durga during Navratri
पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शुभ समय में की गई घट स्थापना सभी के लिए शुभ एवं कल्याणकारी होती है। पारंपरकि ज्योर्तिविद पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा शारदीय नवरात्र का प्रारंभ तीन अक्तूबर (गुरुवार) से होगा। घट स्थापना एवं ज्योत खड़ी करने के शुभ मुहूर्त प्रातः 06.19 से 7.48 तक शुभ, प्रातः 10.46 से 12.15 चर, दोपहर 12.15 से 1.44 लाभ, दोपहर 1.44 से 3.13 अमृत, दोपहर 4.42 से 6.11 शुभ, शाम 6.11 से 7.42 अमृत, शाम 7.42 से 9.13 चर। वहीं, प्रातः 3.17 से 4.48 ब्रह्म मुहूर्त अति श्रेष्ठ मुहूर्त है। व्यास के अनुसार, घट स्थापना के साथ ही पूरे विश्व के लोग भक्ति भाव से माता की पूजा अर्चना में लग जाएंगे।

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हरसिद्धि मंदिर में नवरात्रि के दौरान देवी की शुद्ध सात्विक शाक्त पूजा की जाती है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में माता को विशेष रूप से अनार के दाने, शहद और नवरात्रि की पूर्णाहुति पर अदरक का भोग लगाया जाता है। चूंकि माता हरसिद्धि नौ दिनों तक शयन नहीं करती, इसलिए इन दिनों शयन आरती नहीं की जाती है। 
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हरसिद्धि मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अग्निदाह किया था। तब शिव जी उनके शव को लेकर चले। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। उज्जैन में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी, जिसके कारण यहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई और इसे हरसिद्धि मंदिर के नाम से जाना जाता है। माता हरसिद्धि श्रीयंत्र पर विराजमान हैं और भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें हरसिद्धि कहा जाता है।

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