महाकाल की भक्ति में डूबा उज्जैन: श्रावण मास में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे, 2,215 क्विंटल लड्डू का प्रसाद बिका
उज्जैन में श्रावण मास के दौरान बाबा महाकाल के दर्शन के लिए 1.57 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। 5 लाख से ज्यादा कावड़ यात्रियों को सेवा मिली। शीघ्र दर्शन टिकट और लड्डू प्रसादी बिक्री से मंदिर समिति को करोड़ों की आय हुई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पवित्र श्रावण मास में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन आस्था, भक्ति और सेवा के अद्भुत संगम की गवाह बनी। पूरे श्रावण माह देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन, भोजन प्रसादी और सांस्कृतिक आयोजनों के विशेष इंतजाम किए गए। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ जनसेवा का भी व्यापक स्वरूप देखने को मिला।
श्रावण मास में 1.57 करोड़ से अधिक श्रद्धालु
श्रावण माह के दौरान 1.13 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने सीधे श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए। इसके अलावा विभिन्न सवारियों और भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने वाले 43.75 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल रहे। इस तरह श्रावण मास में कुल 1,57,00,210 श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। बाबा महाकाल का जलाभिषेक करने के लिए 5 लाख से अधिक कावड़ यात्री उज्जैन पहुंचे। इनमें से करीब 2.80 लाख कावड़ यात्रियों को पांच विशेष स्थानों पर निःशुल्क भोजन प्रसादी उपलब्ध कराई गई।
पढ़ें: घरों में घुसा नाले का पानी, सड़कें हुई बंद; गांवों में मचा हाहाकार
अन्नक्षेत्र में 3.47 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किया भोजन
मंदिर के अन्नक्षेत्र में 3.47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सात्विक भोजन ग्रहण किया। सेवा भाव के तहत 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निःशुल्क चरण पादुकाएं भी वितरित की गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्रावण माह में 5.76 लाख से अधिक शीघ्र दर्शन टिकट जारी किए गए। इन टिकटों से मंदिर समिति को ₹14.47 करोड़ से अधिक की आय प्राप्त हुई। वहीं, बाबा महाकाल के लड्डू प्रसाद की भी श्रद्धालुओं के बीच भारी मांग रही। 2,215 क्विंटल से अधिक लड्डू प्रसादी की बिक्री हुई, जिससे 10.49 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
शिव अर्धांग थीम पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
श्रावण माह में भक्ति के साथ कला और संस्कृति का भी विशेष समागम देखने को मिला। ‘शिव अर्धांग’ थीम पर 17 श्रावण महोत्सव और 35 संस्कृति संध्या आयोजित की गईं। इनमें करीब 350 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां देकर बाबा महाकाल के चरणों में हाजिरी लगाई। मंदिर प्रबंधन की बेहतर रणनीति, श्रद्धालुओं की सुविधा और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता के चलते इस वर्ष की श्रावण यात्रा श्रद्धालुओं के लिए सुगम, सुरक्षित और यादगार रही।
