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Satta Ka Sangram: उज्जैन में शिप्रा नदी का मुद्दा हावी, डुबकी पॉलिटिक्स पर भी मतदाताओं ने दी अपनी राय
Mon, 06 May 2024 10:34 AM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 06 May 2024 10:34 AM IST
सार
Satta Ka Sangram: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी, भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली, चमत्कारी काल भैरव मंदिर वाले शहर उज्जैन में अमर उजाला पहुंचा है। लोकसभा चुनाव को लेकर खास पेशकश सत्ता का संग्राम के कार्यक्रम आज उज्जैन में हो रहे हैं। इसमें हम यहां के मतदाताओं से चर्चा करेंगे।
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उज्जैन के रामघाट पर पहुंचा चुनावी रथ सत्ता का संग्राम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' मतदाताओं का सियासी मूड जानने निकला है। जो आज छह मई यानी सोमवार को मध्यप्रदेश के उज्जैन लोकसभा क्षेत्र में है। सुबह यहां के मतदाताओं से हमने मोक्षदायिनी कही जाने वाली शिप्रा नदी के घाट पर चर्चा की। पढ़िए क्या कुछ चाहते हैं यहां के मतदाता-
बता दें कि उज्जैन लोकसभा सीट पर 13 मई को मतदान होना है। ये सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। यहां से भाजपा ने मौजूदा सांसद अनिल फिरोजिया को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने महेश परमार पर दांव लगाया है। 2019 के चुनाव में फिरोजिया ने कांग्रेस के बाबूलाल मालवीय को 3 लाख 65 हजार 637 वोटों से पराजित किया था। इस लोकसभा क्षेत्र में उज्जैन की सात और रतलाम की एक विधानसभा सीट शामिल है।
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क्या बोले मतदाता
शिप्रा यहां की जीवनदायिनी है। ये नदी इतनी पवित्र है कोई मैली नहीं कर सकता। यहां के जल से महाकाल का अभिषेक होता है। कभी-कभी अनियमितता से जरूर थोड़ी गड़बड़ हो जाती है, पर उसे सुधरवा लिया जाता है। ये मुद्दा जरूर है, पर मुझे लगता है कि प्रशासन लगातार ध्यान दे रहा है।
अन्य मतदाता का कहना है कि शिप्रा नदी के लिए किसी भी पार्टी का विजन नहीं है। सिंहस्थ होने वाला है। शिप्रा में नर्मदा का पानी आ रहा है। सेवरखेड़ी डैम बनने से काफी हद तक समस्या हल हो सकती है। इससे उज्जैन की जल आपूर्ति व्यवस्था को भी बल मिलेगा। इससे सालभर शिप्रा में पानी बना रहेगा। परंतु कोई ध्यान नहीं दे रहा। समय-समय पर कई नाले फूटने के कारण नदी गंदी हो जाती है। इस संबंध में जितनी भी सरकारें रहीं, किसी ने काम नहीं किया।
घाट पर पहुंचे उज्जैन के मतदाता का कहना है कि नदी की स्थिति सबके सामने है। नदी पर डुबकी पॉलिटिक्स के अपने मायने है। जब लोग यहां पहुंचते हैं तो मन में भाव लेकर पहुंचता है तो स्नान करता है। आचमन करता है। सीएम यादवजी ने भी डुबकी लगाई। उज्जैन से कोई सीएम बना है। सीएम के सामने चैलेंज है कि इसे साफ करें। हालांकि शिप्रा को लेकर राजनीति नहीं करना चाहिए.
एक साधु कहते हैं कि यहां सिंहस्थ होना है। यहां नदी का पानी मैला हो रहा है। हरिद्वार में साफ पानी दिखता है। यहां साधुओं का शाही स्नान होता है। शिप्रा को प्रवाहमान करने का कोई स्रोत नहीं है। इसलिए भी थोड़ी परेशानी आती है। कुल मिलाकर लोग भी दोषी हैं, जो नदी को किसी न किसी रूप से गंदा करते हैं।
हर दिन जानेंगे नई लोकसभा सीट का मिजाज
चुनावी यात्रा के दौरान अमर उजाला का यह चुनावी रथ हर रोज नई लोकसभा सीट पर जाएगा। इस दौरान उस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं से चाय पर चर्चा होगी। अनौपचारिक बातचीत में जनता के मुद्दों, उनकी समस्याओं पर चर्चा होगी। हम युवाओं के बीच जाएंगे, जहां उनकी समस्याओं और उम्मीदों पर चर्चा करेंगे। नए भारत के नए मतदाताओं की सपनों की उड़ान को पंख कैसे लगेंगे, इस पर भी चर्चा करेंगे।
इस विशेष कवरेज को आप यहां देख सकेंगे
amarujala.com, अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक चैनल पर आप 'सत्ता का संग्राम' से जुड़े कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे। 'सता का संग्राम' से जुड़ा व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में भी पढ़ सकेंगे।
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बता दें कि उज्जैन लोकसभा सीट पर 13 मई को मतदान होना है। ये सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। यहां से भाजपा ने मौजूदा सांसद अनिल फिरोजिया को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने महेश परमार पर दांव लगाया है। 2019 के चुनाव में फिरोजिया ने कांग्रेस के बाबूलाल मालवीय को 3 लाख 65 हजार 637 वोटों से पराजित किया था। इस लोकसभा क्षेत्र में उज्जैन की सात और रतलाम की एक विधानसभा सीट शामिल है।
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क्या बोले मतदाता
शिप्रा यहां की जीवनदायिनी है। ये नदी इतनी पवित्र है कोई मैली नहीं कर सकता। यहां के जल से महाकाल का अभिषेक होता है। कभी-कभी अनियमितता से जरूर थोड़ी गड़बड़ हो जाती है, पर उसे सुधरवा लिया जाता है। ये मुद्दा जरूर है, पर मुझे लगता है कि प्रशासन लगातार ध्यान दे रहा है।
अन्य मतदाता का कहना है कि शिप्रा नदी के लिए किसी भी पार्टी का विजन नहीं है। सिंहस्थ होने वाला है। शिप्रा में नर्मदा का पानी आ रहा है। सेवरखेड़ी डैम बनने से काफी हद तक समस्या हल हो सकती है। इससे उज्जैन की जल आपूर्ति व्यवस्था को भी बल मिलेगा। इससे सालभर शिप्रा में पानी बना रहेगा। परंतु कोई ध्यान नहीं दे रहा। समय-समय पर कई नाले फूटने के कारण नदी गंदी हो जाती है। इस संबंध में जितनी भी सरकारें रहीं, किसी ने काम नहीं किया।
घाट पर पहुंचे उज्जैन के मतदाता का कहना है कि नदी की स्थिति सबके सामने है। नदी पर डुबकी पॉलिटिक्स के अपने मायने है। जब लोग यहां पहुंचते हैं तो मन में भाव लेकर पहुंचता है तो स्नान करता है। आचमन करता है। सीएम यादवजी ने भी डुबकी लगाई। उज्जैन से कोई सीएम बना है। सीएम के सामने चैलेंज है कि इसे साफ करें। हालांकि शिप्रा को लेकर राजनीति नहीं करना चाहिए.
एक साधु कहते हैं कि यहां सिंहस्थ होना है। यहां नदी का पानी मैला हो रहा है। हरिद्वार में साफ पानी दिखता है। यहां साधुओं का शाही स्नान होता है। शिप्रा को प्रवाहमान करने का कोई स्रोत नहीं है। इसलिए भी थोड़ी परेशानी आती है। कुल मिलाकर लोग भी दोषी हैं, जो नदी को किसी न किसी रूप से गंदा करते हैं।
हर दिन जानेंगे नई लोकसभा सीट का मिजाज
चुनावी यात्रा के दौरान अमर उजाला का यह चुनावी रथ हर रोज नई लोकसभा सीट पर जाएगा। इस दौरान उस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं से चाय पर चर्चा होगी। अनौपचारिक बातचीत में जनता के मुद्दों, उनकी समस्याओं पर चर्चा होगी। हम युवाओं के बीच जाएंगे, जहां उनकी समस्याओं और उम्मीदों पर चर्चा करेंगे। नए भारत के नए मतदाताओं की सपनों की उड़ान को पंख कैसे लगेंगे, इस पर भी चर्चा करेंगे।
इस विशेष कवरेज को आप यहां देख सकेंगे
amarujala.com, अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक चैनल पर आप 'सत्ता का संग्राम' से जुड़े कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे। 'सता का संग्राम' से जुड़ा व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में भी पढ़ सकेंगे।
