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Ujjain: बाबा महाकाल का पंचमुखारविंद श्रृंगार, छबीना, होलकर, मनमहेश, शिवतांडव और उमामहेश स्वरूप में दिए दर्शन
Sat, 01 Mar 2025 09:28 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sat, 01 Mar 2025 09:28 PM IST
सार
महाशिवरात्रि के बाद महाकाल का पंचमुखारविंद श्रृंगार किया जाता है। मान्यता है कि जो लोग शिव नवरात्रि में दर्शन नहीं कर पाते और अगर बाबा महाकाल के पंचमुखारविंद दर्शन कर लेते हैं, तो उन्हें शिव नवरात्रि के सभी दर्शनों का फल मिलता है।
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भगवान महाकाल का पंचमुखारविंद रूप में श्रृंगार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर शनिवार को भगवान महाकाल का पंचमुखारविंद रूप में श्रृंगार किया गया। महाशिवरात्रि के बाद वर्ष में एक बार राजाधिराज भगवान महाकाल भक्तों को इस रूप में दर्शन देते हैं। संध्या पूजन के बाद पुजारियों ने भगवान का छबीना, होलकर, मनमहेश, शिवतांडव और उमामहेश रूप में श्रृंगार किया।
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि ऐसा इसलिए होता है कि यदि शिव नवरात्रि में बाबा के अलग-अलग रूप में दर्शन नहीं कर पाने वाले भक्त, महाकाल बाबा के इन स्वरूपों के दर्शन कर सकें। महाशिवरात्रि के बाद दूज के अवसर पर महाकाल के पांच स्वरूपों में दर्शन करने की एक मान्यता यह भी है कि महाशिवरात्रि पर शिव विवाह के बाद भगवान शिव कई दिनों तक देवताओं को दिखाई नहीं दिए। इस पर देवताओं ने शिव के दर्शन करने के लिए प्रार्थना और तप किया। तब भगवान शिव ने दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए। इस मान्यता के अनुसार, बाबा महाकालेश्वर के पांच स्वरूपों में दर्शन करने का विशेष महत्व है।
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दर्शन करने से मनोकामना होती है पूरी
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि इन 9 दिनों तक महाकाल के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि के बाद महाकाल का पंचमुखारविंद श्रृंगार किया जाता है। मान्यता है कि जो लोग शिव नवरात्रि में दर्शन नहीं कर पाते और अगर बाबा महाकाल के पंचमुखारविंद दर्शन कर लेते हैं, तो उन्हें शिव नवरात्रि के सभी दर्शनों का फल मिलता है। इसी कारण इस दिन पंचमुखारविंद दर्शन करने श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं।
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महाकाल मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि ऐसा इसलिए होता है कि यदि शिव नवरात्रि में बाबा के अलग-अलग रूप में दर्शन नहीं कर पाने वाले भक्त, महाकाल बाबा के इन स्वरूपों के दर्शन कर सकें। महाशिवरात्रि के बाद दूज के अवसर पर महाकाल के पांच स्वरूपों में दर्शन करने की एक मान्यता यह भी है कि महाशिवरात्रि पर शिव विवाह के बाद भगवान शिव कई दिनों तक देवताओं को दिखाई नहीं दिए। इस पर देवताओं ने शिव के दर्शन करने के लिए प्रार्थना और तप किया। तब भगवान शिव ने दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए। इस मान्यता के अनुसार, बाबा महाकालेश्वर के पांच स्वरूपों में दर्शन करने का विशेष महत्व है।
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दर्शन करने से मनोकामना होती है पूरी
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि इन 9 दिनों तक महाकाल के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि के बाद महाकाल का पंचमुखारविंद श्रृंगार किया जाता है। मान्यता है कि जो लोग शिव नवरात्रि में दर्शन नहीं कर पाते और अगर बाबा महाकाल के पंचमुखारविंद दर्शन कर लेते हैं, तो उन्हें शिव नवरात्रि के सभी दर्शनों का फल मिलता है। इसी कारण इस दिन पंचमुखारविंद दर्शन करने श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं।



