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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain Mahakal Holi: This year Baba Mahakal will play with colours during Bhadra period

Ujjain Mahakal Holi: होली में इस बार भद्राकाल, कब रंग खेलेंगे महाकाल? जानें क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य

Mon, 10 Mar 2025 12:33 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Mon, 10 Mar 2025 12:33 PM IST
सार

इस बार भी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 13 मार्च को होलिका दहन और 14 मार्च को धुलेंडी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। होलिका दहन के लिए कोई विशेष मुहूर्त नहीं देखा जाता, क्योंकि महाकाल के आंगन में देश की पहली होली जलती है।

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Ujjain Mahakal Holi: This year Baba Mahakal will play with colours during Bhadra period
महाकाल मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हर साल राजा महाकाल अपनी प्रजा के साथ होली खेलते हैं। होली के दिन महाकाल बाबा के दरबार की छटा निराली रहती है। भक्त अपने आराध्य को रंग और गुलाल अर्पित करते हैं। यह नजारा देखने में बहुत अद्भुत होता है और इस दिन देशभर से भक्त महाकाल पहुंचते हैं। इस वर्ष होली पर पाताल लोक की भद्रा भी रहेगी। आइए जानते हैं इस साल महाकाल की नगरी में कब मनाया जाएगा होली का पर्व...

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गुमानदेव पीठ के गादीपति ज्योतिषाचार्य पं चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया कि 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि के चंद्रमा की साक्षी में पूर्णिमा तिथि लगेगी, जो प्रदोष काल में पूर्ण रूप से रहेगी। होली से एक दिन पहले होलिका दहन करने की परंपरा है। ऐसे में 13 मार्च को होलिका दहन होगा। इसी दिन बाबा महाकाल के दरबार में भी होलिका का दहन होगा। इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को पूरे देश भर में होली का पर्व मनाया जाएगा। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि 14 मार्च को तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। महाकाल मंदिर में होली उत्सव की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। महाकाल मंदिर में 13 मार्च को राजसी वैभव के साथ होली उत्सव पर्व की शुरुआत होगी। इसी दिन प्रदोषकाल में होलिका दहन होगा। 14 मार्च को धुलेंडी पर तड़के 4 बजे भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को पुजारियों द्वारा अबीर-गुलाल से होली खिलाई जाएगी। महाकालेश्वर मंदिर समिति पुजारियों को प्राकृतिक उत्पादों से तैयार हर्बल गुलाल उपलब्ध कराएगी।
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जानिए महाकालेश्वर मंदिर में कब होगा होलिका दहन, भद्रा काल में इस वर्ष कब रंग-गुलाल खेलेंगे बाबा
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महाकाल के आंगन में जलती है सबसे पहले होली
होलिका दहन के लिए मुहूर्त कुछ भी हो लेकिन देश की सबसे पहली होली महाकाल के आंगन में ही जलती है। उज्जैन के महाकाल मंदिर में शाम की आरती के बाद होली जलाई जाती है। यहां देश का सबसे पहला होलिका दहन होता है। फागुन मास की चतुर्दशी पर महाकाल मंदिर में होलिका दहन का भव्य आयोजन होता है। इसके बाद बाबा महाकाल अपने भक्तों के साथ होली खेलते हैं।

सृष्टि के राजा महाकाल करते हैं कष्टों का नाश
भगवान महाकाल इस पूरी सृष्टि के राजा हैं। महाकाल को 12 ज्योतिलिंर्गों में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि महाकाल के आंगन में होली पर प्रबंध पूजा करने से संकटों का नाश होता है। इसलिए महाकाल मंदिर में शाम की आरती के बाद देश में सबसे पहले होलिका दहन होता है। कमाल की बात यह भी है कि महाकाल मंदिर में होने वाले होलिका दहन के लिए विशेष मुहूर्त को देखने की जरूरत नहीं होती। मान्यता है कि महाकाल के दरबार में रंग खेलने से जीवन में भी रंगों का संचार होता है। साथ ही सारे दुख, दर्द, दरिद्रता दूर होती है।
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