फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   High Court notice to RD Gardi Medical College Medical student deposited Rs 81 lakh

Ujjain: आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को हाईकोर्ट का नोटिस, छात्रा के परीक्षा में शामिल होने पर लगी रोक का मामला

Sat, 07 Sep 2024 01:08 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sat, 07 Sep 2024 01:08 PM IST
सार

इंदौर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज (निजी मेडिकल कॉलेज) उज्जैन को नोटिस जारी किया है। अब मामले को अंतिम बहस के लिए 12 सितंबर को सूचीबद्ध किया है।

विज्ञापन
High Court notice to RD Gardi Medical College Medical student deposited Rs 81 lakh
आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को हाईकोर्ट का नोटिस।

विस्तार

आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में पीजी में एडमिशन लेने वाली छात्रा ने सीट छोड़ दी। नियमानुसार 81 लाख रुपए जमा करने के बाद भी उसके पीजी की परीक्षा दोबारा देने पर 3 साल की रोक नहीं हटाई। इतना ही नहीं, छात्रा के 3 साल तक पीजी की काउंसलिंग में बैठने पर रोक भी लगा दी गई थी। छात्रा ने इस डबल कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामल में अब 12 सितंबर को अंतिम बहस होगी। हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज से जवाब मांगा है।
विज्ञापन


दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज (निजी मेडिकल कॉलेज) उज्जैन को नोटिस जारी किया है। अब मामले को अंतिम बहस के लिए 12 सितंबर को सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ता रितिका माहेश्वरी की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने बहस की। याचिकाकर्ता ने पहले ही पीजी सीट की पूरी फीस के रूप में 81 लाख रुपए जमा कर दिए हैं, लेकिन अब प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीएमई के अनुसार वह सीट छोड़ने के नियमों के अनुसार 3 साल तक प्री पीजी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकती है। अधिवक्ता आदित्य सांघी ने तर्क दिया कि नियम अवैध व मनमाना है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 से प्रभावित है। इसे अल्ट्रा वायर्स के रूप में रद्द किया जाना चाहिए।
विज्ञापन


निजी कारण बताकर सीट खाली की 
आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में एनआरआई कैटेगरी में छात्रा डॉ. रितिका माहेश्वरी ने एमबीबीएस के बाद पीजी एग्जाम दिया था। 2022 में पीजी कोर्स में एडमिशन मिल गया। बाद में व्यक्तिगत कारण बताकर डॉ. रितिका ने यह सीट खाली कर दी। सरकार का नियम है कि सरकारी या प्राइवेट कॉलेज में सिलेक्शन के बाद सीट खाली करने पर खर्च स्टूडेंट ही उठाएगा। साथ ही अगले तीन साल तक वह इस एग्जाम की काउंसलिंग में बैन रहेगा। बीच में सीट खाली करने पर डॉ. रितिका के परिवार ने 81 लाख रुपए हजार्ने में भर दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed