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MP News: चार महीने पहले पिता की हार्ट अटैक से मौत, आठ साल की बच्ची 25 मिनट में बन गई बाल आरक्षक, जानें मामला

Thu, 04 Sep 2025 11:01 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Thu, 04 Sep 2025 11:01 AM IST
सार

उज्जैन के महाकाल थाना में प्रधान आरक्षक रहे देवेंद्र सिंह रघुवंशी की आठ साल की बेटी को पिता की असमय मृत्यु के बाद बाल आरक्षक नियुक्त किया गया है। एसपी प्रदीप शर्मा ने आवेदन मिलने के बाद मात्र 25 मिनट में इसके आदेश जारी कर दिए।

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father died of a heart attack, an 8-year-old girl applied and became a child constable in 25 minutes
इच्छा बनी बाल आरक्षक

विस्तार

पुलिस के बारे में कहा जाता है कि वह सिर्फ वर्दी ही नहीं, बल्कि सभी से हमदर्दी भी रखती है। ऐसा ही कुछ एसपी कार्यालय में उस समय देखने को मिला जब पिता की मौत के बाद 8 वर्षीय बेटी ने बाल आरक्षक बनने के लिए आवेदन किया और महज 25 मिनट में उनका आवेदन स्वीकृत कर उसे नियुक्ति दे दी गई। साथ ही तत्काल आदेश भी जारी कर दिए गए।

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दरअसल, महाकाल थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह रघुवंशी की 17 मई 2025 को हार्ट अटैक से अचानक मृत्यु हो गई थी। प्रधान आरक्षक की मौत के बाद उनका परिवार एसपी प्रदीप शर्मा से मिलने पहुंचा और प्रधान आरक्षक रघुवंशी की आठ साल की बेटी इच्छा रघुवंशी को बाल आरक्षक बनाने की मांग की। इस पर उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने दिए गए आवेदन को महज 25 मिनट में ही स्वीकृत करते हुए इच्छा को बाल आरक्षक नियुक्त कर दिया। इच्छा अपने पिता की इकलौती संतान है। वर्तमान में वह सेंट मैरी स्कूल में पढ़ाई कर रही है।
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इसीलिए बनाए जाते हैं बाल आरक्षक
पुलिसकर्मी की असमय मृत्यु होने पर परिवार के भरण-पोषण के लिए नाबालिग बच्चों को बाल आरक्षक बनाया जाता है। ये बच्चे 18 वर्ष की उम्र तक पढ़ाई के साथ-साथ विभाग के छोटे-मोटे काम करते हैं और पुलिस के अनुशासन व विभागीय प्रक्रियाओं को समझते हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें सीधे नियमित सेवा में नियुक्त किया जाता है। बाल आरक्षक बनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि घर के मुखिया के देहांत के बाद परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके और बच्चों की शिक्षा व घर का खर्च आसानी से चल सके।

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एसपी बोले - प्राथमिकता से हल होते हैं ऐसे मामले
एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बाल आरक्षकों की नियुक्ति के मामलों को जल्द से जल्द निपटाना उनकी प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा, इच्छा रघुवंशी के पहले भी अन्य बाल आरक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। ऐसे मामलों में हमारा उद्देश्य यही रहता है कि परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक राहत दी जा सके। इसी कारण आवेदन प्राप्त होने के मात्र 25 मिनट में ही इच्छा रघुवंशी की नियुक्ति कर आदेश जारी कर दिए गए।
 

ईच्छा बनी बाल आरक्षक

 

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