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उज्जैन: आय से अधिक संपत्ति मामले में पूर्व आरटीओ इंस्पेक्टर सेवाराम को अदालत ने भेजा जेल, 60 लाख का जुर्माना

Mon, 31 Aug 2026 10:06 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Mon, 31 Aug 2026 10:06 PM IST
सार

उज्जैन की विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के 15 साल पुराने मामले में तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर को दोषी ठहराया। कोर्ट ने चार साल के सश्रम कारावास और 60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक वर्ष अतिरिक्त कारावास होगा। आरोपी को जेल भेज दिया गया। 

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ExRTO Inspector Gets 4 Years Jail, Rs 60 Lakh Fine In 15-Year Old Disproportionate Assets Case
पूर्व RTO इंस्पेक्टर सेवाराम को भ्रष्टाचार कोर्ट ने भेजा जेल

विस्तार

आय से अधिक संपत्ति के 15 साल पुराने मामले में उज्जैन की विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर को दोषी ठहराते हुए चार साल के सश्रम कारावास और 60 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर उन्हें एक वर्ष की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। फैसले के तुरंत बाद आरोपी को केंद्रीय भैरवगढ़ जेल भेज दिया गया।

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लोकायुक्त की टीम ने 11 नवंबर 2011 को सेवाराम के अलकनंदा नगर (उज्जैन) स्थित मकान पर छापा मारा था, जहां से भारी मात्रा में नकदी, जेवरात और ऐशो-आराम का सामान मिला था। जांच में सामने आया कि सेवाराम की वैध आय केवल 27.37 लाख होनी चाहिए थी, लेकिन उनके पास 1.84 करोड़ से अधिक की संपत्ति और खर्च पाया गया, जो उनकी ज्ञात आय से 572% अधिक था। लोकायुक्त पुलिस ने जांच के बाद 30 अगस्त 2014 को कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। लगभग 12 साल चले ट्रायल के बाद कोर्ट ने यह अंतिम फैसला सुनाया। लोकायुक्त संगठन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज पाठक और डीडीपी संजय मीणा ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
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केस टाइमलाइन - 2011 से 2026 तक

  • 11 नवंबर 2011: लोकायुक्त DSP ओपी सागोरिया ने अलकनंदा नगर स्थित घर पर छापा मारा, नकदी-जेवरात और लग्जरी सामान जब्त। बाद में जांच DSP एसएस उदावत ने की।

  • आय vs संपत्ति - वैध आय ₹27,37,628 के मुकाबले खर्च/संपत्ति ₹1,84,15,129 मिली, यानी 572% अधिक

  • 30 अगस्त 2014 - विशेष न्यायालय उज्जैन में चार्जशीट पेश

  • 31 अगस्त 2026 - विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने धारा 13(1)ई, 13(2) में दोषी माना

  • सजा - 4 साल सश्रम कारावास + ₹60 लाख जुर्माना, न देने पर 1 साल अतिरिक्त सजा, सीधे भैरवगढ़ जेल

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