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Ujjain: आचार्य नित्यानंद महाराज पहुंचे केंद्रीय जेल, प्रवचन सुन कैदियों ने कहा अब हम कभी भी अपराध नहीं करेंगे
Sun, 26 Feb 2023 04:42 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 26 Feb 2023 04:42 PM IST
सार
आचार्य नित्यानंद महाराज ने कैदियों को श्रीमद् भागवत गीता के कुछ वचनों से अवगत कराया गया। कैदियों को अच्छी राह पर चलना, लोभ, लालच और द्वेष की भावना को दूर कर समाज में अपना नाम करने की सलाह दी।
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उज्जैन जेल में रविवार को प्रवचन का आयोजन किया गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
उज्जैन केंद्रीय जेल में सेवाधर्म मिशन संस्था के आचार्य नित्यानंद महाराज ने प्रवचन दिए। समय-समय पर बंदियों के उत्थान एवं नैतिक आचरण के लिए प्रवचन किए जाते हैं। नित्यानंद महाराज ने बंदियों को अपने किए कार्यों का पश्चाताप करने की सलाह दी। कैदियों ने भी कहा कि अब वे कभी भी अपराध की राह पर नहीं चलेंगे।
आचार्य नित्यानंद महाराज ने कहा कि 84 लाख योनि के बाद मनुष्य जीवन मिलता है। इस जीवन को सफल बनाने के लिए कीर्तन भक्ति अति आवश्यक है। यंत्र शक्ति को जगाने के लिए केवल एक मंत्र है। इसके साथ ही बंदियों को अपने प्रवचन में लोहा और सोने का उदाहरण देकर बताया कि जेल में बंद बंदियों के लिए लोहे की जंजीर बनाई जाती है। राजा को भी गलती पर जेल में रखा जाता है। भले ही उस दौर में सोने की जंजीर बनाई जाती थी, मगर अब व्यर्थ है। इस दौरान सभी कैदियों ने गुरु जी को कहा कि अब हम कभी भी अपराध नहीं करेंगे।
गीता के श्लोक सुनाए
आचार्य नित्यानंद महाराज ने कैदियों को श्रीमद् भागवत गीता के कुछ वचनों से भी अवगत कराया गया। आपने कैदियों को अच्छी राह पर चलना, लोभ, लालच और द्वेष की भावना को दूर कर समाज में अपना नाम करने की सलाह दी और बताया कि जिस जेल में आप इस समय मौजूद हैं। ऐसी ही किसी जेल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और उन्होंने ही लोगों को गीता का ज्ञान दिया था।
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आचार्य नित्यानंद महाराज ने कहा कि 84 लाख योनि के बाद मनुष्य जीवन मिलता है। इस जीवन को सफल बनाने के लिए कीर्तन भक्ति अति आवश्यक है। यंत्र शक्ति को जगाने के लिए केवल एक मंत्र है। इसके साथ ही बंदियों को अपने प्रवचन में लोहा और सोने का उदाहरण देकर बताया कि जेल में बंद बंदियों के लिए लोहे की जंजीर बनाई जाती है। राजा को भी गलती पर जेल में रखा जाता है। भले ही उस दौर में सोने की जंजीर बनाई जाती थी, मगर अब व्यर्थ है। इस दौरान सभी कैदियों ने गुरु जी को कहा कि अब हम कभी भी अपराध नहीं करेंगे।
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गीता के श्लोक सुनाए
आचार्य नित्यानंद महाराज ने कैदियों को श्रीमद् भागवत गीता के कुछ वचनों से भी अवगत कराया गया। आपने कैदियों को अच्छी राह पर चलना, लोभ, लालच और द्वेष की भावना को दूर कर समाज में अपना नाम करने की सलाह दी और बताया कि जिस जेल में आप इस समय मौजूद हैं। ऐसी ही किसी जेल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और उन्होंने ही लोगों को गीता का ज्ञान दिया था।
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