फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain Unique Gopal Temple Why Lord Krishna’s Daily Routine Changes Post-Janmashtami Discover Untold History

उज्जैन: कृष्ण का वो मंदिर, जहां जन्माष्टमी के बाद बदल जाती है कान्हा की दिनचर्या; जानें रोचक गाथा

Fri, 04 Sep 2026 08:40 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 04 Sep 2026 08:40 AM IST
सार

उज्जैन के द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाएगा। बाल स्वरूप में विराजमान भगवान कृष्ण के लिए पांच दिनों तक शयन आरती नहीं होगी। जन्माष्टमी पर 1100 किलो पेड़े का महाभोग लगाया जाएगा और रात 12 बजे कान्हा के जन्म की मुख्य आरती होगी। 

विज्ञापन
Ujjain Unique Gopal Temple Why Lord Krishna’s Daily Routine Changes Post-Janmashtami Discover Untold History
द्वारकाधीश गोपाल मंदिर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन केवल शिव भक्ति ही नहीं, बल्कि कृष्ण भक्ति और सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासतों का भी एक अनुपम केंद्र है। शहर के हृदय स्थल में स्थित द्वारकाधीश गोपाल मंदिर इसका जीवंत प्रमाण है। इतिहास के पन्नों में दर्ज संघर्षों की गाथा और मराठा काल की धार्मिक आस्था का यह संगम इस जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की अनूठी परंपराएं, सोमनाथ से गजनी और लाहौर होते हुए उज्जैन पहुंचे ऐतिहासिक चांदी के दरवाजे और बाल रूप में विराजमान कान्हा की अनोखी दिनचर्या इसे देशभर के अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग बनाती है।
विज्ञापन


बाल स्वरूप में विराजते हैं कान्हा, पांच दिन नहीं होती शयन आरती
गोपाल मंदिर की सबसे खास और मनमोहक परंपरा भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी है। मान्यता है कि जन्माष्टमी पर जन्म के बाद भगवान पूर्णतः बाल रूप (छोटे बालक) में रहते हैं। मंदिर के पुजारी पावन शर्मा के अनुसार, जिस प्रकार एक छोटे बालक के सोने और जागने का कोई निश्चित समय नहीं होता, ठीक उसी तरह जन्माष्टमी से लेकर बछ बारस तक भगवान की दिनचर्या भी बाल रूप के अनुसार ही रहती है।यही कारण है कि इन 5 दिनों तक मंदिर में रात की नियमित शयन आरती नहीं की जाती। बछ बारस के दिन दोपहर 12 बजे मंदिर परिसर में पारंपरिक मटकी फोड़ का आयोजन होगा। इसके बाद भगवान की शयन आरती की जाएगी। तत्पश्चात त्रयोदशी से रात 9 बजे की नियमित शयन आरती पुनः शुरू होगी।
विज्ञापन




मंदिर के चांदी के दरवाजों की यह है रहस्यमयी यात्रा
गोपाल मंदिर के मुख्य आकर्षणों में से एक हैं इसके गर्भगृह पर मढ़े चांदी के भव्य द्वार। पुरातत्व विभाग, मध्य प्रदेश के बोर्ड और प्रचलित ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इन दरवाजों का इतिहास बेहद संघर्षपूर्ण और रोचक रहा है। बताया जाता है कि ये द्वार मूल रूप से प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के थे, जिन्हें महमूद गजनवी अपने आक्रमण के दौरान लूटकर गजनी ले गया था। बाद के दौर में अफगान शासक अहमद शाह दुर्रानी (अब्दाली) के समय ये दरवाजे लाहौर पहुंचे। 19वीं सदी में सिंधिया शासनकाल के दौरान इन्हें सिंधिया राजवंश द्वारा वापस भारत लाया गया और उज्जैन के गोपाल मंदिर में स्थापित किया गया। यद्यपि इतिहासकार इन दरवाजों के हर पड़ाव के दस्तावेजी प्रमाणों पर अलग-अलग मत रखते हैं, लेकिन लोक स्मृति, पुरातत्व विभाग की जानकारी और आस्था का यह संगम इस विरासत को और भी दिव्य व रोचक बनाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


महारानी बैजीबाई शिंदे ने कराया था मंदिर का निर्माण
यह भव्य मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि उज्जैन के मराठा स्थापत्य का एक सुंदर उदाहरण भी है। 19वीं शताब्दी में महाराजा दौलतराव सिंधिया की धर्मपत्नी महारानी बैजीबाई शिंदे ने अपने आराध्य देव गोपाल कृष्ण के प्रति अपनी अगाध भक्ति व्यक्त करने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था। गर्भगृह में गोपाल कृष्ण, श्रीराधा और रुक्मिणी जी की अत्यंत सुंदर चांदी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। साथ ही संगमरमर से निर्मित भगवान शिव-पार्वती और महारानी बैजीबाई की प्रतिमाएं भी यहां विराजित हैं। मंदिर के विशाल सभा मंडप में काले पाषाण के मुरली मनोहर, सफेद संगमरमर के हनुमान जी, कामधेनु गाय और द्वारपाल जय-विजय की प्रतिमाएं दर्शनीय हैं।




आज मनाई जाएगी जन्माष्टमी, 1100 किलो पेड़े का लगेगा महाभोग
इस वर्ष 4 सितंबर 2026 को द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। जन्माष्टमी की सुबह राजभोग आरती के दौरान भगवान को 1100 किलो पेड़े का महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा और श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। शाम की आरती के बाद भगवान का पंचामृत से महाभिषेक किया जाएगा। रात ठीक 12 बजे कान्हा के जन्म की मुख्य आरती होगी। जन्म आरती के बाद श्रद्धालु मध्यरात्रि 2 बजे तक बाल गोपाल के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed