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Ujjain: 108 साल की धनी बाई ने थामी कांवड़, एक हाथ में डमरू लेकर पहुंचीं महाकाल दरबार; बेटों के साथ की आराधना
Sat, 22 Aug 2026 02:03 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 02:03 PM IST
सार
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 108 वर्षीय धनी बाई ने कांवड़ लेकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। महिदपुर की रहने वाली धनी बाई एक हाथ में कांवड़ और दूसरे में डमरू लेकर मंदिर पहुंचीं। उनके करीब 80 और 60 वर्ष के दो बेटे भी इस भक्ति यात्रा में उनके साथ रहे। मंदिर प्रशासन ने उन्हें नंदी हॉल से सुगम दर्शन कराए, जिसके बाद पुजारियों ने उनका सम्मान किया।
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बुजुर्ग महिला ने हाथों में कांवड़ और डमरू
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
आस्था जब चरम पर होती है, तो उम्र और शारीरिक सीमाएं बेअसर हो जाती हैं। श्रावण के पवित्र महीने में मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में कुछ ऐसा ही अद्भुत और भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला। महिदपुर की रहने वाली 108 वर्षीय बुजुर्ग महिला धनी बाई ने इस उम्र में एक हाथ में कांवड़ और दूसरे में डमरू थामकर बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई।
इस अनोखी कांवड़ यात्रा की सबसे सुंदर बात यह रही कि 108 वर्षीय धनी बाई की इस भक्ति यात्रा में उनके दो बुजुर्ग बेटे भी साए की तरह साथ रहे। उनके बड़े बेटे की उम्र लगभग 80 वर्ष और छोटे बेटे की उम्र करीब 60 वर्ष है। इस उम्र में जब इंसान को सहारे की जरूरत होती है, तब मां और बेटों की इस त्रिमूर्ति ने एक-दूसरे के संबल से भक्ति की कठिन राह आसान की। मंदिर परिसर में मौजूद हर श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर भावविभोर हो गया।
प्रशासन ने नंदी हॉल से कराए सुगम दर्शन
बुजुर्ग महिला के कांवड़ लेकर पहुंचने की खबर मिलते ही महाकाल मंदिर समिति हरकत में आ गई। मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने भीड़ को देखते हुए धनी बाई को कतार में लगने से बचाते हुए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई। वे खुद उन्हें सीधे नंदी हॉल तक ले गए, जहां धनी बाई ने पूरे उत्साह से डमरू बजाकर बाबा महाकाल को जल अर्पित किया।
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पुजारियों ने किया सम्मानित
दर्शन और जलाभिषेक के बाद मंदिर के पुजारियों ने धनी बाई को पुष्पमाला पहनाकर और प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर प्रशासन की इन त्वरित और सुगम व्यवस्थाओं की श्रद्धालुओं ने जमकर सराहना की। गौरतलब है कि श्रावण के इस पावन पर्व पर विभिन्न क्षेत्रों से अब तक हजारों कांवड़िया बाबा महाकाल को जल अर्पित कर चुके हैं, लेकिन 108 वर्षीय धनी बाई की यह अटूट शिव भक्ति आज हर किसी के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है।
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इस अनोखी कांवड़ यात्रा की सबसे सुंदर बात यह रही कि 108 वर्षीय धनी बाई की इस भक्ति यात्रा में उनके दो बुजुर्ग बेटे भी साए की तरह साथ रहे। उनके बड़े बेटे की उम्र लगभग 80 वर्ष और छोटे बेटे की उम्र करीब 60 वर्ष है। इस उम्र में जब इंसान को सहारे की जरूरत होती है, तब मां और बेटों की इस त्रिमूर्ति ने एक-दूसरे के संबल से भक्ति की कठिन राह आसान की। मंदिर परिसर में मौजूद हर श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर भावविभोर हो गया।
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प्रशासन ने नंदी हॉल से कराए सुगम दर्शन
बुजुर्ग महिला के कांवड़ लेकर पहुंचने की खबर मिलते ही महाकाल मंदिर समिति हरकत में आ गई। मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने भीड़ को देखते हुए धनी बाई को कतार में लगने से बचाते हुए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई। वे खुद उन्हें सीधे नंदी हॉल तक ले गए, जहां धनी बाई ने पूरे उत्साह से डमरू बजाकर बाबा महाकाल को जल अर्पित किया।
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पुजारियों ने किया सम्मानित
दर्शन और जलाभिषेक के बाद मंदिर के पुजारियों ने धनी बाई को पुष्पमाला पहनाकर और प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर प्रशासन की इन त्वरित और सुगम व्यवस्थाओं की श्रद्धालुओं ने जमकर सराहना की। गौरतलब है कि श्रावण के इस पावन पर्व पर विभिन्न क्षेत्रों से अब तक हजारों कांवड़िया बाबा महाकाल को जल अर्पित कर चुके हैं, लेकिन 108 वर्षीय धनी बाई की यह अटूट शिव भक्ति आज हर किसी के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है।
