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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain: The health of Mahamandaleshwar, who gave up food, deteriorated, got leave after examination in the hospital .. said - I will not take food till Shipra is purified

उज्जैन: अन्न त्यागने वाले महामंडलेश्वर की तबीयत बिगड़ी, बोले-शिप्रा शुद्धिकरण होने तक मैं अन्न ग्रहण नहीं करूंगा

Sun, 12 Dec 2021 08:27 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Sun, 12 Dec 2021 08:27 PM IST
सार

शिप्रा नदी के शुद्धिकरण के लिए अन्न त्यागने वाले महामंडलेश्वर ज्ञानदास की तबीयत शनिवार को बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दी गई। रविवार को प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य का परीक्षण किया।

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Ujjain: The health of Mahamandaleshwar, who gave up food, deteriorated, got leave after examination in the hospital .. said - I will not take food till Shipra is purified
महामंडलेश्वर का स्वास्थ्य परीक्षण करते हुए। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शिप्रा नदी के शुद्धिकरण के लिए अन्न त्यागने वाले महामंडलेश्वर ज्ञानदास की तबीयत शनिवार को बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। बाद में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दी गई। रविवार को प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य का परीक्षण दिया। उनकी सेहत पहले से ठीक बताई जा रही है।
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रविवार को ज्ञानदास महाराज ने कहा कि आज मेरा स्वास्थ्य कल से बेहतर है। मैं शिप्रा नदी किनारे धरने पर बैठे संतों के बीच भी पहुंचा। मुझसे प्रशासन ने अन्न ग्रहण करने के लिए कहा, लेकिन मैंने उन्हें मना कर दिया है। सभी संतों का एक स्वर में मानना है कि जब तक शिप्रा शुद्धिकरण का ठोस जवाब नहीं मिलता, हम धरना समाप्त नहीं करेंगे। अभी शिप्रा नदी किनारे बैठकर संत भजन गा रहे हैं और राम नाम जप रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि शिप्रा शुद्धिकरण के लिए महामंडलेश्वर ज्ञानदास ने 16 नवंबर से अन्न त्याग रखा है। वे मंगलनाथ रोड पर भगवान अंगारेश्वर मंदिर के पास दादू आश्रम में अनशन पर बैठे हैं। शनिवार को उनका रक्तचाप कम हो गया था। इस पर अस्पताल ले जाना पड़ा। डॉक्टरों ने जांच की और जरूरी दवाई दी। यह भी कहा कि अन्न ग्रहण नहीं किया तो तबीयत बिगड़ सकती है। संत अभी सिर्फ दूध, जल और नारियल पानी ही ले रहे हैं। ज्ञानदास महाराज का कहना है कि शिप्रा का शुद्धिकरण किया जाए और उज्जैन को पवित्र नगरी घोषित कर मांस-मदिरा की दुकानों को शहर से बाहर किया जाए। शिप्रा शुद्धिकरण होने तक मैं अन्न ग्रहण नहीं करूंगा। मुझे कुछ होता है इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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डी ग्रेड में है शिप्रा नदी का पानी
इधर प्रदूषण विभाग के अध्ययन में हुए खुलासे के बाद यह बात सामने आई है कि उज्जैन में शिप्रा नदी का पानी बुरी स्थिति में है। रिपोर्ट के अनुसार नदी का पानी ए से ई ग्रेड में मापा जाता है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शिप्रा नदी का पानी डी ग्रेड का है। सबसे ज्यादा प्रदूषण इंदौर से आ रही कान्ह नदी के कारण हो रहा है। इस नदी के माध्यम से इंदौर के इंडस्ट्रियल एरिया का वेस्ट और गंदा पानी शिप्रा में मिलता है, जबकि देवास के औद्योगिक क्षेत्र से गुजर रही नदी का पानी भी शिप्रा में मिल रहा है। इससे भी यह प्रदूषित हो रही है। उज्जैन में घरेलू कचरे और सीवरेज का पानी प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। इस रिपोर्ट के बाद कहा जा रहा है कि आचमन तो ठीक लेकिन स्नान के लिए भी शिप्रा का पानी ठीक नहीं है।
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