Ujjain: फर्जी ई-चालान APK से 24.40 लाख की साइबर ठगी, गुजरात पुलिस ने उज्जैन से दो आरोपी दबोचे
सूरत साइबर क्राइम सेल ने 24.40 लाख रुपये की साइबर ठगी मामले में उज्जैन के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों कमीशन लेकर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। फर्जी ई-चालान APK डाउनलोड कराने के बाद पीड़ित का मोबाइल हैक कर रकम उड़ाई गई।
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सूरत साइबर क्राइम सेल ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने एक ऐसा बैंक खाता उपलब्ध कराया था, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया गया। इस ठगी में एक व्यक्ति से फर्जी आरटीओ ई-चालान APK फाइल डाउनलोड करवाकर उसका मोबाइल हैक किया गया और उसके खाते से 24.40 लाख रुपये निकाल लिए गए। पुलिस ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस निरीक्षक एम.सी. नायक के नेतृत्व में तकनीकी जांच और मानव खुफिया सूचना (ह्यूमन इंटेलिजेंस) के आधार पर यह कार्रवाई उज्जैन में की गई।
पुलिस के अनुसार, यह ठगी 21 जनवरी से 25 मई के बीच हुई। शिकायतकर्ता को 'E-Chalan.apk' नाम का एक फर्जी डिजिटल आरटीओ ई-चालान एप भेजा गया था। जैसे ही उसने यह APK फाइल डाउनलोड की, उसका मोबाइल फोन हैक हो गया। इसके बाद आरोपियों ने बिना उसकी जानकारी के उसके बैंक खाते से 24.40 लाख रुपये तीन अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
इस मामले में सूरत साइबर क्राइम पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66(C) और 66(D) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उज्जैन जिले के बड़नगर निवासी 26 वर्षीय मजदूर रितिक बाली और 44 वर्षीय बेरोजगार टिंकू परमार के रूप में हुई है।
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पुलिस के मुताबिक, रितिक बाली ने एक नया यूको बैंक खाता खुलवाया, उसका बैंक किट हासिल किया और 4,000 रुपये कमीशन लेकर वह किट टिंकू परमार को सौंप दी। इसके बाद टिंकू परमार ने रितिक को कमीशन दिया, बैंक किट अपने कब्जे में ली और 8,000 रुपये लेकर उसे साइबर ठगी गिरोह के एक फरार सदस्य को सौंप दिया। जांच में सामने आया कि 12 जनवरी से 31 मई के बीच इस यूको बैंक खाते के जरिए 7,63,415 रुपये का लेन-देन हुआ।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) की जांच में यह भी पता चला कि इसी बैंक खाते से जुड़े बिहार के दो साइबर ठगी मामलों में कुल 70,500 रुपये की धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। सूरत साइबर सेल की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) बिशाखा जैन ने बताया कि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सूरत के पीड़ित के खाते से निकाली गई रकम उज्जैन के एक खाताधारक के यूको बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।
उन्होंने कहा, "तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि रकम उज्जैन के एक खाताधारक के यूको बैंक खाते में भेजी गई थी। हमारी टीम उज्जैन पहुंची और खाताधारक से पूछताछ की। जांच में सामने आया कि वह भी धोखे का शिकार हुआ था। वह रितिक का मित्र है।" डीसीपी ने बताया कि आगे की जांच में पता चला कि दोनों आरोपियों ने कमीशन के बदले खाताधारक से बैंक खाता हासिल किया और फिर उसे साइबर ठगी गिरोह के मुख्य आरोपियों को उपलब्ध करा दिया।
उन्होंने कहा, "तकनीकी जांच और मानव खुफिया सूचना के आधार पर हमने उज्जैन से रितिक बाली और टिंकू परमार को गिरफ्तार किया। दोनों को अदालत में पेश किया जा रहा है। ये मुख्य साइबर ठगी गिरोह से जुड़े थे और कमीशन लेकर लोगों के बैंक खाते हासिल कर उन्हें गिरोह तक पहुंचाते थे।" पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे बैंक, ग्राहक सेवा, केवाईसी अपडेट, निमंत्रण पत्र या आरटीओ ई-चालान के नाम पर भेजी गई किसी भी APK फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसी फाइलों के जरिए मोबाइल फोन हैक कर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता है।
