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रेमडेसिविर पर बड़ा खुलासा: इंदौर का डॉक्टर हिमाचल में बना रहा था नकली इंजेक्शन

Fri, 16 Apr 2021 12:17 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: देव कश्यप Updated Fri, 16 Apr 2021 12:17 AM IST
सार

  • रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी के बीच इस इंजेक्शन की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया
  • जांच में पता चला है कि एक डॉक्टर बीते एक साल से कांगड़ा में फॉर्मुलेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहा था
  • आरोपी डॉक्टर के पास से 16 बॉक्स में 400 नकली वाॅयल भी मिले हैं

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shortage of Remdesivi injection News Indore Crime Branch arrested one man for selling fake injection
इंदौर में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ एक डॉक्टर गिरफ्तार - फोटो : इंदौर पुलिस

विस्तार

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच कई राज्यों में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी हो रही है। इसी बीच इस इंजेक्शन की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे डाॅक्टर को गिरफ्तार किया है जो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की अपनी कंपनी में बिना लाइसेंस के रेमडेसिविर इंजेक्शन बना रहा था।

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आरोपी डॉ. विनय त्रिपाठी के पास से 16 बॉक्स में 400 नकली वाॅयल भी मिले हैं। जांच में पता चला है कि वह बीते एक साल से कांगड़ा में सूरजपुर स्थित फॉर्मुलेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहा था।
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डीआईजी मनीष कपूरिया ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का स्टॉक किसी एक व्यक्ति के पास है। वह इंदौर में सप्लाई करने वाला है। इस पर टीम ने पड़ताल के बाद त्रिपाठी को पकड़ा। जब इस संबंध में पूछताछ की गई, तो पता चला कि त्रिपाठी ये इंजेक्शन हिमाचल प्रदेश से लेकर आए हैं। जब उनसे संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो वे कागजात नहीं दे पाए। मामले में क्राइम ब्रांच के साथ ड्रग विभाग की टीम भी जांच कर रही है। पता चला है कि व्यक्ति फार्मा बिजनेस से जुड़ा है। पीथमपुर में उसकी यूनिट भी है।

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जानकारी के मुताबिक, डॉ. विनय त्रिपाठी ने दिसंबर 2020 को कंपनी के मैनेजर पिंटू कुमार के माध्यम से जिला कांगड़ा के एडिशनल ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला के पास इंजेक्शन के उत्पादन के लिए अनुमति मांगी थी। अथॉरिटी ने कंपनी को इसके उत्पादन की अनुमति नहीं दी थी। तब विनय की कंपनी पैंटाजोल टेबलेट्स का ही उत्पादन कर रही थी।

 

कंपनी के मैनेजर पिंटू कुमार ने बताया कि पिछले साल लॉकडाउन लगने के बाद से कंपनी बंद थी। अगस्त 2020 को इंदौर के रहने वाले डॉ. विनय त्रिपाठी ने ही कंपनी में फिर से उत्पादन शुरू करवाया था। स्टाफ को हर महीने सैलरी भी वही दे रहा था।
 

पिंटू ने बताया कि ‘दिसंबर 2020 को डॉ. विनय त्रिपाठी के कहने पर मैंने एडिशनल ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला आशीष रैना को रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन अनुमति नहीं मिली थी। रेमडेसिविर इंजेक्शन हमारी कंपनी में बनाया जा रहा था, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। कंपनी में वर्तमान में सात कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें दो सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल हैं।
 

वहीं एडिशनल ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला आशीष रैना ने बताया कि कंपनी को रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने की अनुमति विभाग ने नहीं दी है। साथ ही नूरपुर के ड्रग इंस्पेक्टर प्यार चंद को मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं।

एक अन्य मामले में तीन लोग गिरफ्तार
इंदौर में रेमडेसिविर की कालाबाजरी का एक अन्य मामला भी सामने आया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 'एसटीएफ को सूचना मिली की कुछ लोग रेमडेसिविर के इंजेक्शन 20,000 रुपये में बेच रहे हैं। इनके पास से 6 इंजेक्शन प्राप्त हुए हैं। मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।'


 

 

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