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26 साल बाद फिर वर्दी में: संत बन चुके पूर्व जवान की हुई CRPF में वापसी, बर्खास्तगी के बाद बन गए थे संत
Wed, 02 Sep 2026 10:32 PM IST
मुरैना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
Published by: मुरैना ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 10:32 PM IST
सार
मुरैना के गिरवर सिंह तोमर 26 साल पहले सीआरपीएफ से बर्खास्त होने के बाद संत बन गए थे। उन्होंने बर्खास्तगी के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई जारी रखी। कोर्ट के आदेश के बाद सीआरपीएफ ने 26 अगस्त 2026 को उन्हें दोबारा सेवा में लेने का आदेश दिया। अब उनकी पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुई है।
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26 साल बाद साधु को मिली वर्दी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिंदगी में कई बार हालात इंसान को ऐसी राह पर ले जाते हैं, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होती। लेकिन अगर जुनून जिंदा हो तो इंसान वर्षों बाद भी अपने सपने तक लौट सकता है। मुरैना के छिछावली गांव निवासी गिरवर सिंह तोमर की कहानी कुछ ऐसी ही है। 26 साल पहले सीआरपीएफ से बर्खास्त हुए गिरवर सिंह ने नौकरी छूटने के बाद संत का जीवन अपना लिया था। अब 26 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें दोबारा सेवा में लौटने का मौका मिला है।
गिरवर सिंह को किशोरावस्था से ही सेना में जाने का जुनून था। कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 1991 में उनका चयन सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर हुआ। करीब आठ साल तक उन्होंने सेवा की। इसी दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई। 21 अक्टूबर 1999 को गिरवर सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। नौकरी जाने के बाद वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे।
ये भी पढ़ें- 45 वर्षों बाद बदला महाकाल मार्ग का स्वरूप, राजसी सवारी से पहले चमकी सड़कें; लोग बोले- थैंक यू सीएम
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कई साल मंदिर में बिताए
कुछ समय परिवार के साथ रहने के बाद उन्होंने गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित बारहद्वारी मंदिर में रहना शुरू कर दिया। गिरवर सिंह ने करीब चार-पांच साल बारहद्वारी मंदिर में बिताए। इसके बाद वे मुरैना के गुफा मंदिर पहुंचे। धीरे-धीरे उनका जीवन पूरी तरह आध्यात्म की ओर मुड़ गया। मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें गिरवरदास महाराज नाम दिया। इसके बाद वे पूजा-पाठ और मंदिर सेवा में ही अपना जीवन बिताने लगे। हालांकि, उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखी। गिरवर सिंह ने वर्ष 1999 में बर्खास्तगी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वर्ष 2007 में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन सीआरपीएफ की ओर से स्टे लिए जाने के बाद मामला आगे बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने डबल बेंच में अपील की और वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया जारी रही।
28 अगस्त 2025 को कोर्ट ने सीआरपीएफ को आदेश दिया कि तीन महीने के भीतर गिरवर सिंह को दोबारा ज्वाइनिंग दी जाए। तय समय में ज्वाइनिंग नहीं मिलने पर उन्होंने फिर कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 26 अगस्त 2026 को सीआरपीएफ ने 26 साल पुराने मामले में गिरवर सिंह को दोबारा सेवा में लेने का आदेश जारी कर दिया।
छग के बीजापुर में मिली पोस्टिंग
उन्हें अब छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टिंग दी गई है। जिस व्यक्ति ने 26 साल पहले वर्दी उतारकर संत का जीवन अपना लिया था, वह अब उम्र के इस पड़ाव पर फिर उसी वर्दी में देश सेवा करने के लिए तैयार है। गिरवर सिंह की कहानी सिर्फ नौकरी में वापसी की कहानी नहीं है। यह उस जुनून, धैर्य और संघर्ष की कहानी है, जिसमें 26 साल तक इंतजार करने के बाद आखिरकार उन्हें न्याय और एक बार फिर देश सेवा का मौका मिला।
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गिरवर सिंह को किशोरावस्था से ही सेना में जाने का जुनून था। कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 1991 में उनका चयन सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर हुआ। करीब आठ साल तक उन्होंने सेवा की। इसी दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई। 21 अक्टूबर 1999 को गिरवर सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। नौकरी जाने के बाद वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे।
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कई साल मंदिर में बिताए
कुछ समय परिवार के साथ रहने के बाद उन्होंने गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित बारहद्वारी मंदिर में रहना शुरू कर दिया। गिरवर सिंह ने करीब चार-पांच साल बारहद्वारी मंदिर में बिताए। इसके बाद वे मुरैना के गुफा मंदिर पहुंचे। धीरे-धीरे उनका जीवन पूरी तरह आध्यात्म की ओर मुड़ गया। मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें गिरवरदास महाराज नाम दिया। इसके बाद वे पूजा-पाठ और मंदिर सेवा में ही अपना जीवन बिताने लगे। हालांकि, उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखी। गिरवर सिंह ने वर्ष 1999 में बर्खास्तगी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वर्ष 2007 में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन सीआरपीएफ की ओर से स्टे लिए जाने के बाद मामला आगे बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने डबल बेंच में अपील की और वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया जारी रही।
28 अगस्त 2025 को कोर्ट ने सीआरपीएफ को आदेश दिया कि तीन महीने के भीतर गिरवर सिंह को दोबारा ज्वाइनिंग दी जाए। तय समय में ज्वाइनिंग नहीं मिलने पर उन्होंने फिर कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 26 अगस्त 2026 को सीआरपीएफ ने 26 साल पुराने मामले में गिरवर सिंह को दोबारा सेवा में लेने का आदेश जारी कर दिया।
छग के बीजापुर में मिली पोस्टिंग
उन्हें अब छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टिंग दी गई है। जिस व्यक्ति ने 26 साल पहले वर्दी उतारकर संत का जीवन अपना लिया था, वह अब उम्र के इस पड़ाव पर फिर उसी वर्दी में देश सेवा करने के लिए तैयार है। गिरवर सिंह की कहानी सिर्फ नौकरी में वापसी की कहानी नहीं है। यह उस जुनून, धैर्य और संघर्ष की कहानी है, जिसमें 26 साल तक इंतजार करने के बाद आखिरकार उन्हें न्याय और एक बार फिर देश सेवा का मौका मिला।
