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MP: श्योपुर में लावारिस बच्ची से खुला मानव तस्करी नेटवर्क, उद्योगपति दंपती समेत छह आरोपी गिरफ्तार; पूछताछ जारी
Mon, 27 Apr 2026 02:09 PM IST
श्योपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
Published by: श्योपुर ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 02:09 PM IST
सार
श्योपुर में हाईवे किनारे मिली दो साल की बच्ची के मामले ने मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया, पुलिस ने 35 घंटे में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में इंदौर के महालक्ष्मी नगर में ब्यूटी पार्लर संचालिका नीता जैन और उसका पति वैभव जैन शामिल हैं। वैभव जैन उद्योगपति बताया जा रहा है। पढ़ें हैरान कर देने वाली यह खबर
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मानव तस्करी गिरोह पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्योपुर के सोंईकलां के पास हाईवे किनारे मिली दो साल की लावारिस बच्ची का मामला अब एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क तक जा पहुंचा है। जिला पुलिस ने 35 घंटे के ताबड़तोड़ ऑपरेशन में तीन जिलों से उद्योगपति दंपती समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे रैकेट से पर्दा उठाना शुरू कर दिया है।
घटना की शुरुआत 18 अप्रैल को हुई, जब सोंईकलां के पास हाईवे किनारे एक मासूम बच्ची लावारिस हालत में मिली। पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो एक कार एमपी 07 जेडए 0067 की चाल संदिग्ध लगी। कार बेहद धीमी गति से चल रही थी। नंबर के आधार पर कार मालिक का पता लगाया गया जो राजगढ़ निवासी आकाश मूंदड़ा निकला। यहीं से जांच की सुई मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क की ओर घूम गई।
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छह आरोपियों को दबोचा गया
एसपी सुधीर अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन विशेष टीमें गठित कीं। करीब 20 पुलिसकर्मियों ने 35 घंटे तक इंदौर, धार और खरगौन में दबिश दी। इस दौरान छह आरोपियों को दबोचा गया। गिरफ्तार आरोपियों में इंदौर के महालक्ष्मी नगर में ब्यूटी पार्लर संचालिका नीता जैन और उसका पति वैभव जैन शामिल हैं। वैभव जैन उद्योगपति बताया जा रहा है। इनके अलावा राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा, उसकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा तथा धार और खरगौन की दो महिलाएं भी गिरफ्तार हुई हैं।
मामले की जानकारी मीडिया के साथ साझा करती पुलिस टीम।
रूह कंपा देने वाले हुए खुलासे
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बच्ची का सौदा 21 नवंबर 2024 को किया गया था, जब वह महज छह दिन की थी। धार जिले की एक क्लीनिक संचालिका ने बच्ची को खरगौन की महिला से लेना बताया। इसके बाद इंदौर में नीता जैन और उसके पति वैभव जैन के जरिए यह मासूम राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा को करीब एक लाख रुपये में बेच दी गई। इस तरह बच्ची कई हाथों से गुजरती रही और अंत में लावारिस हालत में हाईवे पर छोड़ दी गई।
जांच में सबसे मजबूत कड़ी इंदौर के महालक्ष्मी नगर से जुड़ी मिली है। पुलिस को संकेत मिले हैं कि यहां ब्यूटी पार्लर की आड़ में पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा था। बच्ची के खरीदार और सप्लायर दोनों यहीं से एक दूसरे के संपर्क में आए। पार्लर में आने वाली महिलाओं की आड़ में सौदेबाजी की जाती थी। पुलिस अब पार्लर के बैंक खातों और कॉल डिटेल खंगाल रही है।
ये भी पढ़ें- Live MP Assembly Special Session: ओबीसी आरक्षण पर मंत्री गौर का बड़ा दावा, कांग्रेस MLA ने उठाया किसानों का मुद्दा
मासूम के असली माता-पिता कौन हैं?
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मासूम के असली माता-पिता कौन हैं। धार और खरगौन की गिरफ्तार महिलाओं से पूछताछ जारी है। एसपी सुधीर अग्रवाल का कहना है कि बच्ची को जन्म देने वाली मां और पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच तेज कर दी गई है। जल्द ही पूरे रैकेट का खुलासा किया जाएगा।
मानव तस्करी से संबंधित आरोपी पुलिस की गिरफ्त में।
इंदौर, धार और खरगौन में पुलिस टीम की दबिश
श्योपुर पुलिस की तीन टीमों ने एक साथ इंदौर, धार और खरगौन में दबिश दी। आरोपियों को पकड़कर श्योपुर लाया गया है। पूछताछ में कई और नाम सामने आने की उम्मीद है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से नवजात बच्चों की खरीद फरोख्त में लिप्त है।
एक मासूम को सिर्फ छह दिन की उम्र में बेच देना और दो साल तक हाथों-हाथ बिकते रहना मानवता को शर्मसार करता है। श्योपुर पुलिस की तत्परता से इस घिनौने कारोबार का पर्दाफाश होना शुरू हुआ है। अब पूरे प्रदेश की नजर इस जांच पर टिकी है कि बच्ची के असली माता-पिता कौन हैं और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
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घटना की शुरुआत 18 अप्रैल को हुई, जब सोंईकलां के पास हाईवे किनारे एक मासूम बच्ची लावारिस हालत में मिली। पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो एक कार एमपी 07 जेडए 0067 की चाल संदिग्ध लगी। कार बेहद धीमी गति से चल रही थी। नंबर के आधार पर कार मालिक का पता लगाया गया जो राजगढ़ निवासी आकाश मूंदड़ा निकला। यहीं से जांच की सुई मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क की ओर घूम गई।
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छह आरोपियों को दबोचा गया
एसपी सुधीर अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन विशेष टीमें गठित कीं। करीब 20 पुलिसकर्मियों ने 35 घंटे तक इंदौर, धार और खरगौन में दबिश दी। इस दौरान छह आरोपियों को दबोचा गया। गिरफ्तार आरोपियों में इंदौर के महालक्ष्मी नगर में ब्यूटी पार्लर संचालिका नीता जैन और उसका पति वैभव जैन शामिल हैं। वैभव जैन उद्योगपति बताया जा रहा है। इनके अलावा राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा, उसकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा तथा धार और खरगौन की दो महिलाएं भी गिरफ्तार हुई हैं।
मामले की जानकारी मीडिया के साथ साझा करती पुलिस टीम।
रूह कंपा देने वाले हुए खुलासे
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बच्ची का सौदा 21 नवंबर 2024 को किया गया था, जब वह महज छह दिन की थी। धार जिले की एक क्लीनिक संचालिका ने बच्ची को खरगौन की महिला से लेना बताया। इसके बाद इंदौर में नीता जैन और उसके पति वैभव जैन के जरिए यह मासूम राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा को करीब एक लाख रुपये में बेच दी गई। इस तरह बच्ची कई हाथों से गुजरती रही और अंत में लावारिस हालत में हाईवे पर छोड़ दी गई।
जांच में सबसे मजबूत कड़ी इंदौर के महालक्ष्मी नगर से जुड़ी मिली है। पुलिस को संकेत मिले हैं कि यहां ब्यूटी पार्लर की आड़ में पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा था। बच्ची के खरीदार और सप्लायर दोनों यहीं से एक दूसरे के संपर्क में आए। पार्लर में आने वाली महिलाओं की आड़ में सौदेबाजी की जाती थी। पुलिस अब पार्लर के बैंक खातों और कॉल डिटेल खंगाल रही है।
ये भी पढ़ें- Live MP Assembly Special Session: ओबीसी आरक्षण पर मंत्री गौर का बड़ा दावा, कांग्रेस MLA ने उठाया किसानों का मुद्दा
मासूम के असली माता-पिता कौन हैं?
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मासूम के असली माता-पिता कौन हैं। धार और खरगौन की गिरफ्तार महिलाओं से पूछताछ जारी है। एसपी सुधीर अग्रवाल का कहना है कि बच्ची को जन्म देने वाली मां और पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच तेज कर दी गई है। जल्द ही पूरे रैकेट का खुलासा किया जाएगा।
मानव तस्करी से संबंधित आरोपी पुलिस की गिरफ्त में।
इंदौर, धार और खरगौन में पुलिस टीम की दबिश
श्योपुर पुलिस की तीन टीमों ने एक साथ इंदौर, धार और खरगौन में दबिश दी। आरोपियों को पकड़कर श्योपुर लाया गया है। पूछताछ में कई और नाम सामने आने की उम्मीद है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से नवजात बच्चों की खरीद फरोख्त में लिप्त है।
एक मासूम को सिर्फ छह दिन की उम्र में बेच देना और दो साल तक हाथों-हाथ बिकते रहना मानवता को शर्मसार करता है। श्योपुर पुलिस की तत्परता से इस घिनौने कारोबार का पर्दाफाश होना शुरू हुआ है। अब पूरे प्रदेश की नजर इस जांच पर टिकी है कि बच्ची के असली माता-पिता कौन हैं और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
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