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शाजापुर: हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर 97 कृष्णमृगों का रेस्क्यू, 31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान, 200 कर्मचारी तैनात
Sat, 10 Oct 2026 11:50 PM IST
शाजापुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाजापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाजापुर
Published by: शाजापुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:50 PM IST
सार
फसलों को नुकसान पहुंचा रहे कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए शाजापुर के शुजालपुर क्षेत्र में विशेष अभियान शुरू किया गया है। दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञों ने हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक की मदद से कृष्णमृगों को सुरक्षित घेरे तक पहुंचाया।
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बोमा पद्धति से पकड़ रहे कृष्णामृग
विस्तार
जिले के शुजालपुर और कालापीपल सहित उज्जैन के सीमावर्ती क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू हो गया है। शनिवार को ग्राम हन्नूखेड़ी में हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा पद्धति के जरिए 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया। यह अभियान 9 से 31 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर दूसरे स्थानों पर पहुंचाना और किसानों को फसलों के नुकसान से राहत दिलाना है।
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हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा तकनीक के जरिए वन्यजीवों के रेस्क्यू की शुरुआत लगातार दूसरे वर्ष शुजालपुर क्षेत्र से हुई है। पिछले साल भी देश में पहली बार इस आधुनिक पद्धति का इस्तेमाल इसी इलाके में किया गया था। अभियान के पहले चरण में शनिवार को हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को सुरक्षित घेरे की ओर पहुंचाया गया। दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर विशेषज्ञों की सलाह से रेस्क्यू रोक दिया गया। अभियान का अगला चरण शनिवार देर शाम या रविवार सुबह शुरू करने की योजना थी।
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दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ शामिल
इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं। इनके साथ वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी तैनात हैं। भोपाल सहित अन्य जिलों से पहुंचे करीब 200 कर्मचारी अभियान में सहयोग कर रहे हैं। वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और स्थानांतरित करने के लिए विभागीय अमला निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कर रहा है। अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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प्रमुख सचिव वन ने लिया तैयारियों का जायजा
अभियान शुरू होने से एक दिन पहले 9 अक्टूबर को प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र कुमार सिंह, वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन ने ग्राम हन्नूखेड़ी पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने अभियान से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से भी सहयोग करने और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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कृष्णमृग और नीलगाय से फसलों को नुकसान
शाजापुर जिले के शुजालपुर, कालापीपल और आसपास के क्षेत्रों में कृष्णमृग और नीलगाय किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस समस्या से राहत दिलाने के लिए वन विभाग पहले भी अभियान चलाकर इन वन्यजीवों को पकड़कर दूसरे स्थानों पर छोड़ चुका है। अब एक बार फिर इसी उद्देश्य से रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।
ग्रामीणों से खेतों में काम रोकने की अपील
अभियान के दौरान वन विभाग ने ग्रामीणों से कुछ सावधानियां बरतने की अपील की है। विभाग के निर्देशों के अनुसार विभाग ने कहा है कि अभियान जारी रहने तक संबंधित क्षेत्रों में खेतों की सिंचाई और कृषि कार्य रोककर रखें,बच्चों को बोमा स्थल से दूर रखें, पालतू मवेशियों को बाड़े में बांधकर रखें, हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर मौके पर भीड़ न लगाएं और वन विभाग और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।
ग्रामीणों का भी लेंगे सहयोग
रेस्क्यू अभियान के दौरान स्थानीय लोगों की मदद भी ली जाएगी। ग्रामीणों को क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी और उनके आवागमन की जानकारी रहती है, जो अभियान के लिए उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर और विदेशी विशेषज्ञों की टीम को देखने के लिए लोगों के मौके पर पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में अभियान वाले क्षेत्रों में भीड़ को नियंत्रित करने और वन विभाग के काम में सहयोग के लिए स्थानीय लोगों की मदद ली जाएगी। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में सहयोग करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। वन विभाग का यह अभियान वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने और किसानों को फसलों के नुकसान से राहत दिलाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
