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Shahdol News: डेढ़ दिन की जिंदगी के बाद दुनिया से विदा हुए दो जिस्म एक दिल वाले नवजात, ये रहा पूरा मामला

Tue, 05 Nov 2024 02:31 PM IST
शहडोल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल Published by: शहडोल ब्यूरो Updated Tue, 05 Nov 2024 02:31 PM IST
सार

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामले कभी-कभी ही सामने आते हैं, जिसमें दो अलग-अलग भ्रूण प्रारंभिक गर्भावस्था में गर्भ के अंदर ही एक दूसरे से चिपक जाते हैं, जिससे ऐसी स्थिति निर्मित हो जाती है।

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Shahdol After living for one and half days newborns with two bodies and one heart departed from world
नवजात की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहडोल मेडिकल कॉलेज में डेढ़ दिन पहले रविवार शाम दो जिस्म व एक दिल के साथ जन्म लेने वाले नवजात डेढ़ दिन बाद बीती रात तीन बजे दुनिया से विदा हो गए। दोनों का मेडिकल कॉलेज में पीछे डेढ़ दिन से उपचार किया जा रहा था। विशेषज्ञों ने बताया कि एक दिल के सहारे ऐसे नवजातों का जीवित रह पाना बहुत ही मुश्किल हो पाता है।

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मालूम हो कि शासकीय मेडिकल कॉलेज में रविवार को अनूपपुर जिले के कोतमा निवासी वर्षा जोगी पति रवि जोगी 25 वर्ष को परिजनों द्वारा प्रसव के लिए लाया गया था। जहां शाम करीब छह बजे प्रसूता का सीजर किया गया था, जिसमें एक ऐसे जुड़वा बच्चे ने जन्म लिया, जिनके जिस्म दो अलग-अलग थे। लेकिन दिल एक था और वही एक दिल दोनों के सीने से जुड़ा हुआ था। इन नवजातों का शरीर एक दूसरे से जुड़े हुए थे। इनके दो अलग-अलग जिस्म तो दिखाई दे रहे थे, लेकिन दिल केवल एक था, जिससे यह दोनों नवजात जुड़े हुए थे, जिनकी सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात तीन बजे मौत हो गई।
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इन्हें जन्म देने वाली प्रसूता समेत परिवार के लोग जिस्म से जुड़े ऐसे बच्चे को देख चिंता में थे। उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा था कि शरीर से एक दूसरे से जुड़े इन बच्चों का वह कैसे पालन पोषण कर पाएंगे। साथ ही इनका भविष्य क्या होगा। वहीं, उनके स्वास्थ्य को लेकर भी परिजन चिंतित थे। नवजातों को ऑक्सीजन सपोर्ट में रखा गया था।
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विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामले कभी-कभी ही सामने आते हैं, जिसमें दो अलग-अलग भ्रूण प्रारंभिक गर्भावस्था में गर्भ के अंदर ही एक दूसरे से चिपक जाते हैं, जिससे ऐसी स्थिति निर्मित हो जाती है। ऐसे बच्चे का जीवन आगे स्थिर रह पाना बड़ा ही कठिन होता है। क्योंकि एक दिल से दो नवजात का जीवित रह पाना बहुत ही मुश्किल होता है। प्रारंभिक अवस्था में भ्रूण जुड़ने अथवा एक दूसरे से चिपके रहते हुए भ्रूण का विकास होकर नवजात बनता है तो ऐसी स्थिति सामने आती है। मेडिकल की भाषा में ऐसे नवजातों को सीमंस ट्विन्स भी कहा जाता है।

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