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Sehore news: खाद संकट से कराह रहा सीहोर, किसानों की नींद उड़ी, अब भी करनी पड़ रही है जद्दोजहद
Fri, 15 Aug 2025 09:59 AM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Fri, 15 Aug 2025 09:59 AM IST
सार
सीहोर जिले के भैरूंदा व बुधनी क्षेत्रों में खाद संकट गहराया है। सहकारी समितियों में ताले लगे हैं और किसान लंबी कतारों में खड़े हैं। कालाबाजारी और अनियमित वितरण से छोटे किसान बेहाल हैं।
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खाद संकट से किसान परेशान। (फाइल फोटो)
विस्तार
मध्य प्रदेश में किसानों के लिए खाद की कमी न होने के दावे लगातार किए जाते हैं, मगर हकीकत इसके उलट है। भैरूंदा और बुधनी क्षेत्रों में खाद की किल्लत ने खेती को संकट में डाल दिया है। सहकारी समितियों में ताले लटके हैं और छोटे किसान सुबह से शाम तक कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। रसूखदार किसानों को आसानी से खाद मिल रही है, जबकि गरीब किसान संघर्ष कर रहे हैं।
जिले में खाद की कमी ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। किसानों को अपनी फसलों के लिए आवश्यक खाद प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है, जिससे खेती की गतिविधियां बाधित हो रही हैं। जिले में मांग की तुलना में आपूर्ति कम है। साथ ही खाद वितरण में अनियमितताएं पाई जा रही हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कुछ किसानों को खाद के सही उपयोग और लाभों की जानकारी न होने से भी समस्या गहराती जा रही है। खाद की कमी से उत्पादन क्षमता घट सकती है और किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। कृषि विभाग का कहना है कि 55 हजार टन के लक्ष्य में से 53 हजार टन यूरिया बांटा जा चुका है।
केंद्रीय कृषि मंत्री के क्षेत्र में बेहाल किसान
कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि बुधनी विधानसभा क्षेत्र में किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। तजपुरा सोसाइटी में किसानों को पासबुक के लिए भी लंबी कतारें लगानी पड़ीं।
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बुजुर्ग महिलाएं भी लगीं कतारों में
11 अगस्त को भैरूंदा किसान समृद्धि केंद्र पर हालात इतने बिगड़े कि 70–80 वर्ष की महिलाएं भी लाइन में खड़ी रहीं। सुबह 6 बजे से इंतजार कर रहे किसानों ने 10:30 बजे इंदौर–भोपाल मार्ग जाम कर दिया। इसके बाद टोकन बांटे गए, लेकिन पर्याप्त खाद फिर भी नहीं मिली। गोदाम प्रभारी महेंद्र मेवाड़ा के अनुसार, सोमवार को 93 टन यूरिया का वितरण हुआ, जबकि 3200 टन की आवश्यकता अभी भी बाकी है। शासन को अतिरिक्त मांग भेजी जा चुकी है।
लाडकुई में सड़क जाम और कालाबाजारी के आरोप
पिछले महीने लाडकुई गांव में किसानों ने लंबी कतारों और यूरिया की कमी को लेकर सड़क जाम कर दिया। आरोप है कि सरकारी मूल्य 266 रुपये की बोरी 300–350 रुपये में बेची जा रही है। किसान संगठनों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की।
ये भी पढ़ें: किले में कैद थे 370 फिरंगी, बाहर क्रांतिकारियों का डेरा, सात माह बाद ऐसे बचे
भैरूंदा में पासबुक की कतारें
जुलाई के दूसरे सप्ताह में निपानिया सेवा सहकारी समिति पर किसानों को सुबह से ही पासबुक लेकर लाइन लगानी पड़ी। महज एक बोरी खाद मिलने पर किसानों ने हंगामा किया। किसानों का कहना था कि प्रति एकड़ दो बोरी का प्रावधान है, लेकिन उन्हें आधा ही मिल रहा है।
ये भी पढ़ें: 21 लाख का घर बनवाया, हथेलियां बिछाकर शहीद की मां को कराया प्रवेश, देखिए दिल छू लेने वाली तस्वीरें
प्रशासन का तर्क: स्टॉक करने से बढ़ रही भीड़
डीडीए एके उपाध्याय का कहना है कि भैरूंदा और बुधनी ब्लॉक में 5 हजार टन से अधिक खाद वितरित की जा चुकी है। कुछ किसान रबी फसल के लिए अभी से खाद का स्टॉक कर रहे हैं, जिससे भीड़ बढ़ रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि भैरूंदा में दिक्कत है और जल्द ही रेक की आपूर्ति की जाएगी।
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जिले में खाद की कमी ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। किसानों को अपनी फसलों के लिए आवश्यक खाद प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है, जिससे खेती की गतिविधियां बाधित हो रही हैं। जिले में मांग की तुलना में आपूर्ति कम है। साथ ही खाद वितरण में अनियमितताएं पाई जा रही हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कुछ किसानों को खाद के सही उपयोग और लाभों की जानकारी न होने से भी समस्या गहराती जा रही है। खाद की कमी से उत्पादन क्षमता घट सकती है और किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। कृषि विभाग का कहना है कि 55 हजार टन के लक्ष्य में से 53 हजार टन यूरिया बांटा जा चुका है।
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केंद्रीय कृषि मंत्री के क्षेत्र में बेहाल किसान
कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि बुधनी विधानसभा क्षेत्र में किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। तजपुरा सोसाइटी में किसानों को पासबुक के लिए भी लंबी कतारें लगानी पड़ीं।
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बुजुर्ग महिलाएं भी लगीं कतारों में
11 अगस्त को भैरूंदा किसान समृद्धि केंद्र पर हालात इतने बिगड़े कि 70–80 वर्ष की महिलाएं भी लाइन में खड़ी रहीं। सुबह 6 बजे से इंतजार कर रहे किसानों ने 10:30 बजे इंदौर–भोपाल मार्ग जाम कर दिया। इसके बाद टोकन बांटे गए, लेकिन पर्याप्त खाद फिर भी नहीं मिली। गोदाम प्रभारी महेंद्र मेवाड़ा के अनुसार, सोमवार को 93 टन यूरिया का वितरण हुआ, जबकि 3200 टन की आवश्यकता अभी भी बाकी है। शासन को अतिरिक्त मांग भेजी जा चुकी है।
लाडकुई में सड़क जाम और कालाबाजारी के आरोप
पिछले महीने लाडकुई गांव में किसानों ने लंबी कतारों और यूरिया की कमी को लेकर सड़क जाम कर दिया। आरोप है कि सरकारी मूल्य 266 रुपये की बोरी 300–350 रुपये में बेची जा रही है। किसान संगठनों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की।
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भैरूंदा में पासबुक की कतारें
जुलाई के दूसरे सप्ताह में निपानिया सेवा सहकारी समिति पर किसानों को सुबह से ही पासबुक लेकर लाइन लगानी पड़ी। महज एक बोरी खाद मिलने पर किसानों ने हंगामा किया। किसानों का कहना था कि प्रति एकड़ दो बोरी का प्रावधान है, लेकिन उन्हें आधा ही मिल रहा है।
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प्रशासन का तर्क: स्टॉक करने से बढ़ रही भीड़
डीडीए एके उपाध्याय का कहना है कि भैरूंदा और बुधनी ब्लॉक में 5 हजार टन से अधिक खाद वितरित की जा चुकी है। कुछ किसान रबी फसल के लिए अभी से खाद का स्टॉक कर रहे हैं, जिससे भीड़ बढ़ रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि भैरूंदा में दिक्कत है और जल्द ही रेक की आपूर्ति की जाएगी।


