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Sehore News: रुद्राक्ष महोत्सव में कथा के छठवें दिन टूटे रिकॉर्ड, लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

Mon, 03 Mar 2025 12:31 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Mon, 03 Mar 2025 12:31 PM IST
सार

कुबेरेश्वरधाम पर रुद्राक्ष महोत्सव के रूप में साल में एक बार भव्य आयोजन किया जाता है। अब कुबेरेश्वर धाम पर भी गरीब कन्याओं के नि:शुल्क विवाह कराए जाएंगे।

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Sehore news Lakhs of devotees reached Rudraksh Mahotsav
प्रदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला

सीहोर जिले में रुद्राक्ष महोत्सव में कथा के छठवें दिन पुराने सारे रिकॉर्ड टूट गए। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण धाम पूरी तरह तरह से भर गया। रविवार बीकेंड और प्रयासराज में कुंभ स्नान खत्म होने के कारण श्रद्धालुओं का जनसैलाब पूरी तरह से कुबेरेश्वर धाम पर पहुंच गया।



हालत ये थे कि रविवार को रेलवे स्टेशन पर आने वाली सभी गाड़ियां सीहोर स्टेशन पर खाली हो रही थी। इसके चलते सुबह से ही हाइवे पर हुजूम के रूप में श्रद्धालु नजर आ रहे थे। एक साथ लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण कई बार जाम के हालत भी बने। समिति ने रविवार को आठ से दस लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा किया गया है।

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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

जिस पर भोले बाबा का हो आशीर्वाद, उसका क्या दुनिया के कष्टों से सरोकार
जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम पर जारी सात दिवसीय भव्य रुद्राक्ष महोत्सव में कथा का श्रवण करने आए लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं को संबोधित करते अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जिस पर भोले बाबा का हो आशीर्वाद, उसका क्या दुनिया के कष्टों से सरोकार, जिसका नेटवर्क भगवान शिव से रहता है, उसके नेटवर्क सबसे टूट जाते हैं। यहां पर कंकर-कंकर में शंकर है और शिव से संबंध बनाने के लिए पूरी आस्था के साथ शिव पर भरोसा करों। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी और मनुष्य की प्रवृत्ति एक जैसी होती है। जैसे मधुमक्खी पुष्पों से रस लाकर छत्तें में जमा करती है और वैसे ही मनुष्य जोड़ने की प्रक्रिया में उम्र भर लगा रहता है, लेकिन एक दिन सब कुछ हाथ से निकल जाता है।

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मंदिर - फोटो : अमर उजाला

बागेश्वर धाम की तरह कुबेरेश्वर धाम पर भी गरीब कन्याओं के विवाह
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कुबेरेश्वरधाम पर रुद्राक्ष महोत्सव के रूप में साल में एक बार भव्य आयोजन किया जाता है। अब कुबेरेश्वर धाम पर भी गरीब कन्याओं के नि:शुल्क विवाह कराए जाएंगे। यहां पर सामूहिक रूप से विवाह सम्मेलन करने में परेशानी आएगी, लेकिन विठलेश सेवा समिति के द्वारा धाम पर प्रतिदिन एक कन्या के विवाह के हिसाब से कम से कम 365 से अधिक कन्याओं का निशुल्क विवाह साल भर के दौरान कराया जाएगा और कन्यादान भी किया जाएगा।

बूढ़े लडख़ड़ाते कदम भी खुशी-खुशी तय कर रहे हैं एक किलोमीटर का सफर
पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है। श्रद्धालुओं का जुनून इस कदर है कि बूढ़े लडख़ड़ाते कदम भी एक किलोमीटर का सफर खुशी-खुशी तय कर रहे हैं। कथा खत्म होने के बाद लाखों श्रद्धालु अपने घर तक पहुंचने के लिए तमाम कष्ट सहन कर रहे हैं। हजारों श्रद्धालु ऐसे हैं जो महाराष्ट्र, छत्तीसगड़, बिहार, उत्तर प्रदेश ही नहीं हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश से कथा सुनने आ रहे हैं। वे रात को पंडाल में ही रात गुजार रहे हैं। रात को पंडाल में एक अद्भुत दुनिया नजर आ रही है। छोटे-छोटे बच्चों के साथ परिवार के लोग और बुजुर्ग भगवान शंकर की भक्ति में झूम रहे हैं। वे बस यही कह रहे हैं... जिस पर भोले बाबा का हो आशीर्वाद...उसका क्या दुनिया के कष्टों से सरोकार। हर-हर महादेव।

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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

महादेव आपको कभी डूबने नहीं देगा
शंकर भगवान का चरित्र विश्वास का चरित्र है, जिस दिन अगर शिवजी के प्रति भाव अथवा भरोसा जागृत ना हो सके तो आप शिव महापुराण में जाना, उसके बाद अगर विश्वास और भरोसा जागृत होगा, तारेगा भी महादेव और मारेगा भी महादेव तो आपका कल्याण हो जाएगा। महादेव आपको कभी डूबने नहीं देगा, उस पर सच्चा विश्वास होगा तो वह हाथ पकड़ कर खींच कर बाहर कर देगा। शिव महापुराण की कथा कहती है शिव जी को आपसे न बेल पत्र चाहिए न चावल का दाना चाहिए। शंकर भगवान को आपसे कुछ भी नहीं चाहिए, शिवजी तो कहते हैं मैं भी भगवान के नाम में डूबा रहता हूं। तुम भी परमात्मा के नाम में डूबे रहो मैं तुम्हारा सब कार्य करके चले जाऊंगा। तुम आश्रित हो जाओ और भगवान के भरोसे जीना प्रारंभ कर दो। हम दुनिया के भरोसे पर जीते हैं। पर परमात्मा के भरोसे नहीं जी पाते, हम उसके आश्रित नहीं हो पाते, कभी ऐसा भी होता है कि हमारा पुण्य भी पाप में बदल जाता है।
 

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प्रदीप मिश्रा - फोटो : अमर उजाला

पत्रों का उल्लेख किया, श्रद्धालुओं की पूरी हो रही मुराद
कथा के बीच में कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने कुछ पत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ माताओं ने उन्हें पत्र भेजा है। उनमें से कुछ पत्रों को मिश्रा ने भक्तों को पढक़र सुनाया। उन्होंने बताया कि कथा का श्रवण करने आई सोनभद्र से पुष्पा जायसवाल का पत्र है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि उनके पति और दोनों बेटे कुछ नहीं करते थे, कथा से प्रेरित होकर उन्होंने भगवान शिव की भक्ति की और आज उनके पास जमीन, मकान, दुकान और फैक्ट्री है, पति समेत दोनों बेटे आज धंधे में व्यस्त है। इसी प्रकार रायसेन की किरण ने बताया कि उनके पुत्र को चार साल से नौकरी की तलाश थी, जब मैंने उसे पड़ाई के साथ शिव की भक्ति करने का उपाय बताया तो वह आज पुलिस विभाग में कार्यरत है और वर्तमान में कुबेरेश्वर धाम पर उसकी ड्यूटी लगी हुई है।

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