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Sehore News: 2700 में गेहूं खरीदी का वादा पूरा नहीं, सड़क पर उतरेंगे किसान, इस हफ्ते बैठक में बनेगी रणनीति
Sat, 01 Feb 2025 05:13 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2025 05:13 PM IST
सार
किसान स्वराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजेन्द्र जाट ने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद सरकार को अपने वादे पर खरा उतरना चाहिए था। लेकिन, सरकार ने 125 रुपये का बोनस देकर "ऊंट के मुंह में जीरा" डालने जैसा काम किया। सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर बढ़ाई गई राशि पर्याप्त नहीं है।
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सड़क पर उतरने की तैयारी में किसान।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
बीते वर्ष सितंबर माह में संपन्न हुई ट्रैक्टर रैली की तर्ज पर इस बार भी किसान बड़े आंदोलन का मन बना चुके हैं। इसके पीछे बड़ा कारण सरकार द्वारा चुनाव के समय किया गया वादा पूरा नहीं किया जाना है। इसके लिए किसानों द्वारा इस सप्ताह में रणनीति तैयार करने के लिए बड़ी बैठक आयोजित की जा रही है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारी गांव-गांव पहुंचकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं। संभवत: फरवरी माह में ही किसान बड़ा आंदोलन कर सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
सरकार ने वादे के मुताबिक खरीद के आदेश जारी नहीं किए
दरअसल, विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में गेहूं 2600 रुपये और धान 2500 रुपये प्रति क्विंटल खरीदे जाने की बात कही थी। लेकिन, भाजपा इससे एक कदम आगे बढ़ी और अपने संकल्प पत्र में गेहूं 2700 रुपये और धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदे जाने की घोषणा की। अब रबी फसल की कटाई शुरू होने वाली है, और सरकार द्वारा खरीद प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। आगामी 31 मार्च तक पंजीयन के लिए पोर्टल खुला रहेगा। सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 रुपये से बढ़ाकर 2425 रुपये किया गया है। यानी 150 रुपये की बढ़ोतरी कर खरीदी किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक संकल्प पत्र के मुताबिक खरीद के आदेश जारी नहीं किए गए हैं। बीते वर्ष सरकार ने किसानों को 125 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया था, जिससे उन्हें कुल 2400 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य प्राप्त हुआ था।
125 रुपये का बोनस देकर किसानों को संतुष्ट करने का प्रयास
किसान स्वराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजेन्द्र जाट ने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद सरकार को अपने वादे पर खरा उतरना चाहिए था। लेकिन, सरकार ने 125 रुपये का बोनस देकर "ऊंट के मुंह में जीरा" डालने जैसा काम किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर बढ़ाई गई राशि पर्याप्त नहीं है। खेती महंगी होने के कारण किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती। ऐसे में सरकार द्वारा किसानों के साथ वादा खिलाफी करना उचित नहीं है। अगर, सरकार घोषणा पत्र के अनुसार गेहूं और धान की खरीदी नहीं करती तो किसानों को एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार खेती को फायदे का धंधा बनाएगी और एमएसपी में वृद्धि करेगी, लेकिन इस साल भी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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पदाधिकारी गांव-गांव जा रहे
सरकार की वादा खिलाफी को लेकर 23 सितंबर 2024 को आयोजित ट्रैक्टर रैली से भी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं। अगर, गेहूं खरीदी से पहले प्रदेश सरकार किसानों को 125 रुपये का बोनस देने संबंधी आदेश जारी करती है, तो आंदोलन कुछ हद तक रुक सकता है।
इन मांगों को लेकर किया जाएगा प्रदर्शन
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सरकार ने वादे के मुताबिक खरीद के आदेश जारी नहीं किए
दरअसल, विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में गेहूं 2600 रुपये और धान 2500 रुपये प्रति क्विंटल खरीदे जाने की बात कही थी। लेकिन, भाजपा इससे एक कदम आगे बढ़ी और अपने संकल्प पत्र में गेहूं 2700 रुपये और धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदे जाने की घोषणा की। अब रबी फसल की कटाई शुरू होने वाली है, और सरकार द्वारा खरीद प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। आगामी 31 मार्च तक पंजीयन के लिए पोर्टल खुला रहेगा। सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 रुपये से बढ़ाकर 2425 रुपये किया गया है। यानी 150 रुपये की बढ़ोतरी कर खरीदी किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक संकल्प पत्र के मुताबिक खरीद के आदेश जारी नहीं किए गए हैं। बीते वर्ष सरकार ने किसानों को 125 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया था, जिससे उन्हें कुल 2400 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य प्राप्त हुआ था।
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125 रुपये का बोनस देकर किसानों को संतुष्ट करने का प्रयास
किसान स्वराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजेन्द्र जाट ने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद सरकार को अपने वादे पर खरा उतरना चाहिए था। लेकिन, सरकार ने 125 रुपये का बोनस देकर "ऊंट के मुंह में जीरा" डालने जैसा काम किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर बढ़ाई गई राशि पर्याप्त नहीं है। खेती महंगी होने के कारण किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती। ऐसे में सरकार द्वारा किसानों के साथ वादा खिलाफी करना उचित नहीं है। अगर, सरकार घोषणा पत्र के अनुसार गेहूं और धान की खरीदी नहीं करती तो किसानों को एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार खेती को फायदे का धंधा बनाएगी और एमएसपी में वृद्धि करेगी, लेकिन इस साल भी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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पदाधिकारी गांव-गांव जा रहे
सरकार की वादा खिलाफी को लेकर 23 सितंबर 2024 को आयोजित ट्रैक्टर रैली से भी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं। अगर, गेहूं खरीदी से पहले प्रदेश सरकार किसानों को 125 रुपये का बोनस देने संबंधी आदेश जारी करती है, तो आंदोलन कुछ हद तक रुक सकता है।
इन मांगों को लेकर किया जाएगा प्रदर्शन
- पारदीपुरा भैरूंदा में बनाई जा रही नवीन कृषि उपज मंडी का बंद पड़ा निर्माण कार्य पुनः शुरू किया जाए।
- गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
- मक्का की खरीदी 2500 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर शुरू की जाए।
- धान का एमएसपी 3100 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
- मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला शीघ्र शुरू की जाए।
- किसानों के खेतों में झूलते बिजली के तारों को दुरुस्त किया जाए।
- जायद फसल (मूंग सीजन) में किसानों को पर्याप्त मात्रा में बिजली उपलब्ध कराई जाए।
- सोयाबीन व धान विक्रय के बाद शेष बचे किसानों को शीघ्र भुगतान किया जाए।
- किसानों से इन मुद्दों पर चर्चा कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
