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Sehore News: अब खर्चीली खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती करेंगे किसान, प्रशिक्षण के लिए करवा रहे ऑनलाइन पंजीयन

Tue, 20 Sep 2022 04:12 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 20 Sep 2022 04:12 PM IST
सार

खेती को लाभ का धंधा बनाने की कवायद में जुटी मध्यप्रदेश सरकार के लिए यह खबर राहत वाली है कि अब किसान खुद भी खर्चीली एवं जहरीली खेती को तौबा करने का मूड बनाने लगे हैं। किसान जहरीली खेती के साथ ही अब कम लागत की खेती को अपनाना चाहते हैं। इसके लिए अब उनमें जागरुकता आई है और वे प्राकृतिक खेती को अपनाने में लगे हैं।

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Sehore farmers moved towards natural farming leaving expensive poisonous farming
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media

विस्तार

सीहोर जिले के किसान लगातार प्राकृतिक खेती के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन पंजीयन करवा रहे हैं। इसके लिए वे प्रशिक्षण भी प्राप्त कर रहे हैं, ताकि खुद भी प्राकृतिक खेती को अपनाएं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

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सीहोर में अब तक करीब दो हजार किसानों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। कृषि विभाग सीहोर की ओर से प्राकृतिक खेती को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि विभाग की मंशा है कि ज्यादा से ज्यादा किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएं और शुरुआत में कम से कम अपना एवं परिवार का अनाज वे पूरी तरह प्राकृतिक रूप से ही पैदा करें। इसके बाद वे अपनी पूरी खेती भी प्राकृतिक तरीके से करें।
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पंजीयन में सीहोर विकास खंड सबसे आगे...
सीहोर में खासकर सीहोर विकास खंड के तहत आने वाले गांवों के किसानों का फिलहाल प्राकृतिक खेती की तरफ ज्यादा रूझान है। यही कारण है कि इस बार करीब दो हजार किसानों ने इसके लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन पंजीयन भी कराएं हैं। इसमें सबसे ज्यादा लगभग 944 किसान सीहोर तहसील के हैं। इसके अलावा 895 से अधिक किसान अन्य तहसीलों के हैं, जिन्होंने प्राकृतिक खेती के लिए पंजीयन कराया है।
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इतना ही नहीं इसके लिए किसानों ने प्रशिक्षण भी लिया है, ताकि वे अपने खेतों में प्राकृतिक खेती को करें। अब कृषि विभाग जिले के अन्य विकास खंडों में भी प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। ताकि किसानों को पता चले कि वे किस प्रकार से प्राकृतिक खेती को अपनाएं।

Sehore farmers moved towards natural farming leaving expensive poisonous farming
प्राकृतिक खेती करेंगे किसान - फोटो : Social Media

राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में लगी हुई है। इसके लिए सरकार की तरफ से किसानों को लाभ भी दिया जा रहा है। दरअसल, प्राकृतिक खेती के लिए सरकार ने एक देशी गाय रखने पर अनुदान देने की योजना भी शुरू की है। इसके लिए एक गाय पर सरकार प्रतिमाह किसान को 900 रुपये देगी।

हालांकि, योजना का लाभ केवल एक ही गाय पर मिलेगा। यदि किसान एक से ज्यादा गाय रखता है तो उसका खर्चा उसे ही वहन करना पड़ेगा। प्राकृतिक खेती के लिए गाय का गोबर और गौमूत्र बेहद जरूरी है। एक गाय के गोबर और गौमूत्र से किसान 25-30 एकड़ जमीन में प्राकृतिक खेती आराम से कर सकता है। इसके लिए सरकार एक गाय पर प्रतिमाह 900 रुपये देगी।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए वृहद कार्यक्रम चलाए जाने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में प्राकृतिक खेती करने के इच्छुक किसानों के पंजीयन के लिए पोर्टल तैयार किया गया है। किसानों से प्राकृतिक खेती के लिए ऑनलाइन पंजीयन करने के लिए प्रक्रिया अपनाने की अपील की गई है।

किसान अपने मोबाइल पर विभागीय वेबसाइट WWW.MPAgriculture.org टाइप करें। वेबसाइट के होम पेज पर नीचे दी गई लिंक पर किसान पंजीयन के लिए क्लिक करें। पंजीयन तीन स्टेप में होगा, जिसमें कृषक की जानकारी, मोबाइल का वेरीफिकेशन एवं अन्य जानकारी फीड कर भरेंगे। प्रक्रिया पूर्ण कर लेने पर कृषक का प्राकृतिक खेती के लिए पंजीयन हो जाएगा।

उपसंचालक कृषि केके पांडे ने बताया, सीहोर जिले के ज्यादा से ज्यादा किसान प्राकृतिक खेती अपनाएं। इसके लिए कृषि विभाग जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों ने भी दिलचस्पी दिखाई है। इस बार बड़ी संख्या में किसानों ने प्राकृतिक खेती के लिए ऑनलाइन एवं आफलाइन पंजीयन भी कराया है। किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है।

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