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सीहोर: ग्यारस पर 20 फीट के भव्य डोल पर भ्रमण करने निकले श्री नृसिंह, 10 घंटे तक शहर में गूंजा भक्ति का उल्लास
Tue, 22 Sep 2026 08:39 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 08:39 PM IST
सार
सीहोर में डोल ग्यारस पर 75 साल पुरानी परंपरा का भव्य नजारा देखने को मिला। कोलीपुरा के नरसिंह लक्ष्मी मंदिर का करीब 20 फीट ऊंचा डोल 10 घंटे तक शहर में घूमा, जिसके दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
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डोल का पूजन करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डोल ग्यारस के पावन पर्व पर सीहोर बुधवार को भगवान की भक्ति, जयकारों और पारंपरिक उल्लास से सराबोर नजर आया। शहर के विभिन्न मंदिरों से भगवान के विमान निकाले गए। वहीं कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर से करीब 20 फीट ऊंचे भव्य डोल में भगवान श्री नृसिंह विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। 10 घंटे से अधिक समय तक चली इस धार्मिक यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
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20 फीट ऊंचे डोल में विराजे भगवान
सुबह मंदिर में भगवान श्री नृसिंह का विशेष शृंगार किया गया। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती के बाद भगवान को भव्य डोल में विराजमान किया गया। जैसे ही डोल नगर भ्रमण के लिए रवाना हुआ, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रास्ते में लोगों ने पुष्प अर्पित कर भगवान की आरती उतारी और श्रद्धा के साथ शीश नवाया।
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डमरू और बैंड की गूंज से भक्तिमय हुआ माहौल
डोल यात्रा में डमरू टीम, बैंड-बाजे और लहंगी कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और धार्मिक गीतों की धुन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मार्ग में कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों में भगवान के दर्शन को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
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देवनगर से कोतवाली तक उमड़ा जनसैलाब
भगवान श्री नृसिंह का डोल कोलीपुरा से शुरू होकर देवनगर कॉलोनी, बढ़ियाखेड़ी, नदी चौराहा, कोतवाली चौराहा सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। डोल जहां से भी निकला, वहां श्रद्धालु घरों और दुकानों से बाहर निकलकर भगवान के दर्शन करने पहुंचे। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर डोल का स्वागत किया गया और भगवान की आरती उतारी गई।
डोल के नीचे से निकलकर लिया आशीर्वाद
डोल ग्यारस की यात्रा में वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का भावपूर्ण दृश्य भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्री नृसिंह के डोल के नीचे से निकले और आशीर्वाद लिया। संत माधवदास महाराज और मंदिर समिति अध्यक्ष दुर्गेश यादव ने बताया कि श्रद्धालुओं में इस परंपरा को लेकर विशेष आस्था है। डोल के नीचे से निकलते समय भक्तों के चेहरों पर श्रद्धा और भावुकता साफ नजर आई।
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75 वर्षों से चली आ रही परंपरा
श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर से डोल निकालने की परंपरा 75 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। हर वर्ष डोल ग्यारस पर भगवान का विशेष शृंगार कर उन्हें डोल में विराजमान कराया जाता है और नगर भ्रमण कराया जाता है।
शहर के अन्य मंदिरों से भी निकले विमान
डोल ग्यारस के अवसर पर शहर के अन्य मंदिरों से भी भगवान के विमान निकाले गए। कोतवाली चौराहे पर दो दर्जन से अधिक मंदिरों के विमान एकत्रित हुए। बड़े मंदिरों, छोटे मंदिरों और लोधी मोहल्ला क्षेत्र के मंदिरों के विमान भी शोभायात्रा में शामिल हुए। आकर्षक झांकियों से सजे इन विमानों के दर्शन के लिए मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंडी क्षेत्र से भी भगवान डोल में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। मंडी क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से होता हुआ डोल ग्यारस का जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा।
जयकारों से गूंजता रहा शहर
पूरे नगर भ्रमण के दौरान हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की जैसे जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ पुष्प अर्पित करते रहे। डोल के साथ चल रही पारंपरिक प्रस्तुतियों और श्रद्धालुओं की आस्था ने सीहोर में डोल ग्यारस को धार्मिक उल्लास और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा यादगार आयोजन बना दिया।
