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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Satna: The youth who got the job of forest constable in MP made the uncle as the father, revealed in the investigation of the CM helpline

सतना: एमपी में वन आरक्षक की नौकरी पाने युवक ने मामा को बनाया बाप, सीएम हेल्पलाइन की पड़ताल में हुआ खुलासा

Mon, 25 Apr 2022 04:40 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 25 Apr 2022 04:40 PM IST
सार

सतना जिले में उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक युवक ने मध्य प्रदेश में नौकरी पाने के लिए अपने पिता को ही बदल लिया। युवक ने अपने मामा को पिता बनाकर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के जरिए 2008 में सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली।

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Satna: The youth who got the job of forest constable in MP made the uncle as the father, revealed in the investigation of the CM helpline
सतना में युवक ने सरकारी नौकरी पाने बदल लिया बाप। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने के लिए यूपी के एक शख्स ने अपने मामा को पिता बना लिया। इस तरह धोखाधड़ी कर युवक ने मध्य प्रदेश में वन आरक्षक की सरकारी नौकरी पा ली। बीते 14 सालों से शख्त वन आरक्षक के पद पर पदस्थ था। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद हाल ही में मामले का खुलासा हुआ। 
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दरअसल वन मंडल सतना में कार्यरत प्रेम नारायण आरख ने नायब तहसीलदार मझगवां द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर अनुसूचित जनजाति वर्ग से नौकरी हासिल की है। यूपी में आरख जाति पिछड़ा वर्ग में आती है। एमपी में सरकारी नौकरी पाने के लिए युवक ने अपने मामा को अपना पिता बना लिया। युवक प्रेमनारायण के मामा और पिता का नाम रामखेलावन आरख है। एक जैसा नाम होने का फायदा उठाते हुए युवक ने मध्य प्रदेश में आरक्षण से नौकरी पा ली। उसका चयन वन रक्षक पद पर सितंबर 2008 में हुआ था। वर्तमान में वह बरौंधा में पदस्थ है। बीते 14 साल से युवक फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाकर सरकारी आय अर्जित कर रहा है।
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 सीएम हेल्पलाइन की पड़ताल से खुलासा
फर्जी जाति निवास प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी पाने वाले प्रेमनारायण के खिलाफ जनवरी 2021 में एसडीएम मझगवां से शिकायत की गई थी, जिस पर कार्रवाई करने के लिए डीएफओ ने एसडीएम से जाति- निवास प्रमाण पत्र के बारे में एसडीएम से कई बार जानकारी मांगी, लेकिन सालभर बीत जाने के बाज भी जानकारी नहीं मिली। कार्रवाई न होने से मामला सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा, जिसके बाद वन आरक्षक की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
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