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सरदार सरोवर बांध: 10वें दिन भी मेधा का अनशन जारी

Sat, 05 Aug 2017 10:11 PM IST
एजेंसी/ भाषा
एजेंसी/ भाषा Updated Sat, 05 Aug 2017 10:11 PM IST
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Sardar Sarovar Dam :Medha Patkar is on hunger strike continues on the 10th day
मेधा पाटकर - फोटो : ANI

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अपर सचिव चंद्रशेखर बोरकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर से आज मुलाकात कर उनसे बार-बार अनुरोध कर अनशन तोड़ने का भरसक प्रयास किया, लेकिन मेधा ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

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सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र के प्रभावितों के लिये उचित पुनर्वास की मांग को लेकर मेधा अपने 11अन्य साथियों के साथ मध्यप्रदेश के धार जिले के चिखल्दा गांव में 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठी हैं और आज उनके अनशन का 10वां दिन है।
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बोरकर के नेतृत्व वाली इस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय संत भय्यूजी महाराज, धार के कलेक्टर श्रीमन शुक्ल, इंदौर के संभागायुक्त संजय दुबे एवं इंदौर के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक अजय शर्मा शामिल थे। यह प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री चौहान द्वारा कल मेधा को किये गये ट्वीट के एक दिन बाद भेजा गया।
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मुख्यमंत्री ने कल मेधा को ट्वीट कर कहा था, ‘‘सभी विस्थापितों के हितों की चिंता करना मेरा कर्तव्य है। मैं और पूरा प्रशासन उनके साथ खड़े हैं। आप व आपके स्वास्थ्य की चिंता है। निवेदन है अनशन समाप्त करें।’’ चौहान ने ट्वीट में आगे लिखा था, ‘‘मैंने प्रभावितों से व्यक्तिगत रूप से बात की है और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए आदेश जारी कर दिये हैं।’’

इस पर मेधा ने कल जवाब दिया था, ‘‘ट्विटर पर उपवास नहीं तोड सकती। यदि लीगल अथारिटी टीम आएगी और डूब प्रभावितों के मुद्दों पर एक्शन लेगी व बांध में पानी भरना बंद कर पहले पुनर्वास करेंगे, तभी आंदोलन खत्म होगा।’’ विस्थापितों के लडाई लड रही कार्यकर्ता हिम्शी सिंह ने धार से ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इस प्रतिनिधिमंडल के पास सरकार का अथारिटी लेटर नहीं था।

इसलिए मेधाजी ने इस प्रतिनिधिमंडल का अनुरोध स्वीकार नहीं किया और अनशन तोडने से मना कर दिया।’’ हालांकि, इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल धार के कलेक्टर श्रीमन शुक्ल ने कहा कि हमने मेधाजी की मांगों को नोट कर लिया है। हमने स्थानीय मांगों का पहले ही समाधान करना शुरू कर दिया है।’’ शुक्ल ने स्वीकार किया कि प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध के बाद भी मेधा ने अपना अनशन नहीं तोडा है।

स्वास्थ्य के बारे में पूछे जाने पर मेधा ने कहा स्वास्थ्य ठीक नहीं

Sardar Sarovar Dam :Medha Patkar is on hunger strike continues on the 10th day
मेधा पाटकर - फोटो : ANI

मेधा के गिरते स्वास्थ्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। दो दिन पहले चिकित्सकों ने उसका मेडिकल परीक्षण किया। उसमें ग्लुकोस की कमी और लो ब्लड प्रेशर की रिपोर्ट आई थी।

शुक्ल ने बताया कि कल भी पुनः दोबारा मेडिकल के लिए टीम को भेजा था। लेकिन मेधा जी एवं उनके साथ अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे अन्य आंदोलनकारियों ने मेडिकल कराने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘भय्यूजी महाराज भी हमारे साथ मेधाजी को आज मिले।’’ उन्होंने दावा किया कि प्रभावित लोग बडी संख्या में पुनर्वास स्थलों पर पहुंच रहे हैं। वहीं, नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेताओं ने बताया कि जब तक सरदार सरोवर बांध से प्रभावित सभी लोगों को उचित पुनर्वास नहीं हो जाता और मुआवजा नहीं मिलता, तब तक उपवास जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार हमसे छलावा कर रही है। विस्थापितों के बारे में झूठे आंकडे पेश कर रही है। दूसरी ओर, मध्यप्रदेश नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘सरदार सरोवर बांध से प्रभावित मध्यप्रदेश के करीब 6,500 परिवर अब भी इस बांध के कैचमेंट इलाके में रह रहे हैं। हालांकि, दो दिन पहले उन्होंने कहा था कि सरदार सरोवर बांध से मध्यप्रदेश के 71 गांवों से 7,010 परिवरों का विस्थापन होना बाकी बचा हुआ है। इनमें से 4,618 परिवार धार जिले में तथा 2,392 परिवार बडवानी जिले में निवासरत हैं।

उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध के मामले में उच्चतम न्यायालय ने इस साल फरवरी में निर्णय दिया था कि 31 जुलाई तक इस बांध की डूब क्षेत्र में आ रहे विस्थापित परिवारों को अपने-अपने घरों एवं जमीन को छोड़ना था। यह अंतिम समय सीमा थी। नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेताओं का दावा है कि नवागाम के पास गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के गेटों को जून में बंद करने से मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के आसपास रहने वाले धार, बडवानी, अलीराजपुर एवं खरगौन जिलों के 40,000 परिवार डूब की चपेट में आ रहे है। इन घरों में करीब तीन लाख लोग रहते हैं। वे बेघर हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें 31 जुलाई तक अपने-अपने घरों को छोडने को कहा था, लेकिन कई लोग उचित पुनर्वास की मांग को लेकर अपने घर खाली करने को तैयार नहीं हैं और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम तब तक अपने घरों को नहीं छोडेंगे, जब तक हमारे लिए उचित पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो जाती।

नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार के अधिकारी डूब प्रभावित लोगों को अपने स्थान से हटाकर टीन शेड में रहने के लिये बाध्य कर रहे हैं तथा पुनर्वास स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गयी हैं। टीन शेड के रूप में बने इन अस्थायी घरों में कोई भी नहीं रह सकता है।

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