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नवरात्रि विशेष: मां विजयासन देवी के दरबार में गूंजे जयकारे, लाखों भक्तों के लिए रोप वे समेत कई इंतजाम

Mon, 12 Oct 2026 07:01 AM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Mon, 12 Oct 2026 07:01 AM IST
सार

सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी धाम में शारदीय नवरात्रि महोत्सव शुरू हो गया है। नौ दिनों में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने 250 पुलिसकर्मियों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, चिकित्सा, पेयजल और पार्किंग की व्यवस्था की है। रोपवे सुबह चार बजे से रात दस बजे तक संचालित रहेगा।

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salakanpur maa vijayasan devi temple navratri festival 2026 arrangements
सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी धाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी धाम में रविवार से शारदीय नवरात्रि महोत्सव शुरू हो गया। पहले ही दिन मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। नौ दिनों में यहां लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। प्रशासन ने सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा, सीसीटीवी और रोपवे सहित विशेष व्यवस्थाएं की हैं।
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पहाड़ों पर विराजमान मां विजयासन के पावन धाम में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही भक्ति, विश्वास और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला। अगले नौ दिनों तक मंदिर परिसर मां के जयकारों, घंटियों की गूंज और पूजा-अर्चना से भक्तिमय रहेगा। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना लेकर पहुंचेंगे। रविवार को शुभ मुहूर्त में घट स्थापना और ज्योति प्रज्ज्वलन के साथ शारदीय नवरात्रि महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ।
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स्वयंभू प्रतिमा, दिव्यता का अनोखा अनुभव
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित मां विजयासन की प्रतिमा प्राकृतिक रूप से निर्मित मानी जाती है, जिसे स्वयंभू स्वरूप कहा जाता है। इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। परिसर में लक्ष्मी, सरस्वती और भैरव बाबा के मंदिर भी श्रद्धा को और मजबूत करते हैं।
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1000 फीट ऊंचाई पर स्थित पवित्र धाम
यह मंदिर लगभग 1000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। पहले यहां पहुंचना कठिन था, लेकिन अब सीढ़ियों, सड़क मार्ग और रोपवे की सुविधा से यात्रा आसान हो गई है। विशेष रूप से वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधाएं बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं।

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सुरक्षा के लिए 250 पुलिसकर्मी तैनात
श्रद्धालुओं को सुविधाजनक ढंग से दर्शन कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंदिर परिसर, सीढ़ी मार्ग और प्रमुख स्थानों पर करीब 250 पुलिसकर्मियों सहित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। निगरानी के लिए प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का प्रयास है कि भीड़ के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

सुबह चार से रात 10 बजे तक चलेगा रोपवे
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोपवे सुबह चार बजे से रात 10 बजे तक संचालित रहेगा। रोपवे में चार बोगियां हैं, जिनमें प्रत्येक में चार-चार लोग एक साथ सफर कर सकते हैं। श्रद्धालु सीढ़ी मार्ग से भी मंदिर तक पहुंच सकेंगे। सीढ़ियों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि बुजुर्गों और अन्य दर्शनार्थियों को यथासंभव सुविधा मिल सके।

पेयजल, सफाई और चिकित्सा की व्यवस्था
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पेयजल, साफ-सफाई और बिजली की व्यवस्था की गई है। परिसर में चलित शौचालय भी स्थापित किए गए हैं। मंदिर परिसर में हेल्थ कैंप लगाया जाएगा, जहां आवश्यक दवाएं उपलब्ध रहेंगी। आपात स्थिति के लिए दो एंबुलेंस और डॉक्टर सहित चिकित्सा टीम की व्यवस्था रहेगी। कलेक्टर बालागुरू के. ने स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने तथा कचरा निर्धारित डस्टबिन में डालने की अपील की है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का आग्रह भी किया है।


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पांच समय होगी आरती, रात में दर्शन रहेंगे बंद
मंदिर में निर्धारित समय पर आरती और पूजा-अर्चना होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुबह 5:30 बजे, 9:30 बजे, दोपहर 11:30 बजे, शाम 7:30 बजे और रात 9:30 बजे आरती का कार्यक्रम रहेगा। रात 12 बजे से सुबह तीन बजे तक मंदिर के पट बंद रहेंगे। श्रद्धालुओं को दर्शन की योजना बनाते समय मंदिर के निर्धारित समय का ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

पंचमी पर श्रृंगार, अष्टमी पर निशा पूजन
मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय के अनुसार, 15 अक्तूबर को पंचमी पर मां विजयासन का भव्य श्रृंगार होगा। 18 अक्टूबर को अष्टमी की मध्यरात्रि में पारंपरिक निशा पूजन और महाहवन किया जाएगा। 19 अक्टूबर को नवमी पर कन्या पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर्व के साथ महोत्सव की पूर्णाहुति होगी।
 
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