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Sagar News: BMC से रहस्यमय ढंग से गायब मरीज की जिला अस्पताल में मौत, 11 दिन बाद मिला शव; सिस्टम पर उठे सवाल

Tue, 17 Mar 2026 11:09 AM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Tue, 17 Mar 2026 11:09 AM IST
सार

बीएमसी से लापता मरीज का 11 दिन बाद जिला अस्पताल के आईसीयू में शव मिलने से हड़कंप मच गया। अज्ञात मरीज का इतने दिनों तक अस्पताल में इलाज चला। मामले में स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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Sagar News: Patient Missing from BMC Found Dead in District Hospital After 11 Days; Serious Questions Raised
जिला चिकित्सालय फाइल फोटो

विस्तार

जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज से 11 दिन पहले रहस्यमय तरीके से लापता हुए एक मरीज का शव जिला अस्पताल के आईसीयू में मिला है। इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि पुलिस की सक्रियता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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क्या है पूरा मामला
मृतक की पहचान मोतीनगर थाना क्षेत्र निवासी दिलीप उर्फ पाउडर साहू के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, दिलीप को 25 फरवरी को पीठ में तेज दर्द की शिकायत के बाद BMC में भर्ती कराया गया था। करीब 8 दिनों तक उनका इलाज चला और स्थिति सामान्य थी।
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5 मार्च की सुबह जब परिजन कुछ देर के लिए वार्ड से बाहर गए तो वापस लौटने पर दिलीप अपने बिस्तर पर नहीं मिले। काफी तलाश के बाद जब वे नहीं मिले, तो सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज में दिलीप वार्ड से निकलकर कुछ दूर जाते दिखे लेकिन उसके बाद वे अस्पताल परिसर से बाहर कैसे निकले, यह रहस्य बना रहा।
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परिजनों ने गोपालगंज थाने में दिलीप की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस और परिवार उनकी तलाश कर रहे थे लेकिन रविवार को अचानक खबर मिली कि दिलीप का जिला अस्पताल में निधन हो गया है। 5 मार्च की शाम किसी अज्ञात व्यक्ति ने दिलीप को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। हालत नाजुक होने के कारण उन्हें तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां 10 दिनों तक उनका इलाज चला।

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इतने दिनों तक जिला अस्पताल में एक 'अज्ञात' मरीज का इलाज होता रहा लेकिन अस्पताल प्रशासन ने पुलिस या अन्य केंद्रों को इसकी सूचना साझा नहीं की। इस पूरी घटना ने तीन विभागों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।


दिलीप की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते दोनों अस्पतालों के बीच समन्वय होता या पुलिस सक्रियता दिखाती, तो शायद दिलीप आज जीवित होते। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के साथ-साथ दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

मामले को लेकर शहर के गोपालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा का कहना है कि पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि दिलीप को जिला अस्पताल तक कौन लेकर आया और सूचना के आदान-प्रदान में कहां चूक हुई।

 

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