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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Panari Chausath Yogini Dham: Goddess Resides Under a Banyan Tree, Devotees Tie Bells After Wishes Come True

पनारी चौसठ योगिनी धाम: बरगद के पेड़ की छांव में विराजती हैं माता, मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बांधते हैं घंटे

Sun, 11 Oct 2026 07:01 AM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Sun, 11 Oct 2026 07:01 AM IST
सार

पनारी गांव में मां चौसठ योगिनी का धाम अपनी अनूठी मान्यताओं और सदियों पुराने बरगद के पेड़ के लिए प्रसिद्ध है। यहां वटवृक्ष की जड़ों को माता का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। मान्यता है कि मन्नत पूरी होने पर भक्त पेड़ की शाखाओं पर घंटे बांधते हैं।

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Panari Chausath Yogini Dham: Goddess Resides Under a Banyan Tree, Devotees Tie Bells After Wishes Come True
बुंदेलखंड का अनोखा शक्तिधाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुन्देलखण्ड की माटी में सनातन संस्कृति और प्रकृति पूजन की परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत हैं जितनी सदियों पहले थीं। सागर जिले की देवरी तहसील के अंतर्गत आने वाले पनारी ग्राम में प्रकृति और पराशक्ति के मिलन का एक ऐसा ही अद्भुत और रहस्यमयी केंद्र स्थित है मां चौसठ योगिनी धाम। आम तौर पर देश भर में माता के मंदिर ऊंचे पहाड़ों या भव्य परिसरों में नजर आते हैं लेकिन पनारी का यह धाम किसी पहाड़ पर नहीं, बल्कि सैकड़ों साल पुराने एक विशालकाय बरगद के पेड़ की छांव में प्रकृति की गोद में बसा है।
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क्या है पनारी धाम का रहस्य?
स्थानीय मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार यह विशाल वटवृक्ष साधारण पेड़ नहीं है, बल्कि इसके भीतर मां चौसठ योगिनियों की शक्तियां समाहित हैं। कहा जाता है कि लगभग 2 से 3 एकड़ के दायरे में फैला यह सैकड़ों साल पुराना बरगद का पेड़ अपनी जड़ों और तनों को चीरकर माता के प्रकट होने का गवाह बना था। इस अनूठे स्थान पर माता की कोई कृत्रिम छत या भव्य गुंबद नहीं है, बल्कि वटवृक्ष की विशाल शाखाएं और जड़ें ही इस पावन दरबार की छत और दीवारें हैं। यहां बरगद की जड़ों को ही माता के स्वरूप में मानकर पूरी श्रद्धा के साथ पूजन-अर्चन किया जाता है।
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दाल-बाटी का लगता है विशेष भोग
इस धाम की एक और अनूठी परंपरा यहां का प्रसाद है। माता को प्रसन्न करने के लिए यहां पारंपरिक रूप से दाल-बाटी का भोग लगाया जाता है, जो बुन्देलखण्ड की ग्रामीण संस्कृति और लोक-परंपरा की गहरी छाप को दर्शाता है।

मन्नत पूरी होने पर बंधते हैं सैकड़ों घंटे
भक्तों की इस दरबार में अटूट आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु दूर-दूर से आकर मंदिर परिसर और वटवृक्ष की शाखाओं पर पीतल और लोहे के सैकड़ों घंटे बांधते हैं। ये अनगिनत घंटे इस बात की गवाही देते हैं कि यहां आने वाले भक्तों की आस्था कितनी प्रगाढ़ है।




नवरात्रि में उमड़ता है जनसैलाब
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के पावन अवसरों पर पनारी ग्राम का यह धाम एक महाकुंभ में बदल जाता है। नौ दिनों तक यहां भव्य मेलों का आयोजन होता है, जिसमें मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी हजारों श्रद्धालु और दार्शनिक माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।



कैसे पहुंचे पनारी धाम
धाम सागर जिला मुख्यालय से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देवरी विधानसभा क्षेत्र के महाराजपुर से करीब 2 किलोमीटर अंदर पनारी ग्राम पंचायत में यह पावन स्थल अवस्थित है। यहां सड़क मार्ग द्वारा आसानी से देवरी और महाराजपुर होते हुए पनारी गांव पहुंचा जा सकता है। नवरात्रि के दिनों में यहां पहुंचने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्थाएं भी मिल जाती हैं। प्रकृति के संरक्षण और आध्यात्मिकता का यह बेजोड़ संगम न केवल बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करता है, बल्कि हर आने वाले श्रद्धालु को एक अलौकिक शांति और ऊर्जा का अहसास कराता है।

 

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