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बांधवगढ़: 80 से अधिक अधिकारी-कर्मियों ने संभाला मोर्चा, हाथी के गले पर कॉलर आईडी से बने घाव की ड्रेसिंग

Sun, 11 Oct 2026 09:23 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया Published by: उमरिया ब्यूरो Updated Sun, 11 Oct 2026 09:23 PM IST
सार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रेडियो कॉलर नंबर-3 पहने नर जंगली हाथी का 11 अक्टूबर को रेस्क्यू किया गया। शारीरिक वृद्धि के कारण कॉलर गर्दन पर कस गया था, जिससे घाव बन गया। वन विभाग की टीम ने कॉलर हटाकर ड्रेसिंग की। अब हाथी को कल्लवाह रेंज में निगरानी में रखा जाएगा।

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Radio-Collared Wild Elephant Rescued in Bandhavgarh After Neck Wound
हाथी का उपचार

विस्तार

जंगल में विचरण करने वाले वन्यजीवों की निगरानी के लिए लगाया गया रेडियो कॉलर कभी-कभी उनके लिए परेशानी का कारण भी बन सकता है। ऐसा ही मामला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सामने आया, जहां रेडियो कॉलर नंबर-3 पहने एक नर जंगली हाथी का रविवार को रेस्क्यू किया गया। करीब एक साल से कॉलर पहने इस हाथी की शारीरिक अवस्था में वृद्धि होने के कारण कॉलर गर्दन पर कस गया था। इससे घाव बन गया था। वन विभाग की टीम ने हाथी को सुरक्षित रेस्क्यू कर कॉलर हटाया और घाव की ड्रेसिंग कराई।

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कान्हा से बांधवगढ़ तक का सफर
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नर जंगली हाथी को कान्हा टाइगर रिजर्व में रेडियो कॉलर पहनाने के बाद पिछले वर्ष 9 सितंबर को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। इसके बाद से हाथी विभिन्न परिक्षेत्रों में विचरण कर रहा था। करीब एक साल तक जंगलों में घूमने के बाद 2 अक्टूबर 2026 को वह चंदिया परिक्षेत्र की मझगवां बीट में पहुंचा। इस क्षेत्र से ग्रामीण आबादी लगी हुई है। हाथी के बार-बार ग्रामीण क्षेत्र की ओर जाने की आशंका के चलते ग्रामीणों और वन्यजीव, दोनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
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80 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी अभियान में शामिल
स्थिति को देखते हुए निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद 11 अक्टूबर को रेस्क्यू अभियान चलाया गया। चंदिया परिक्षेत्र के आरएफ-11 कंपार्टमेंट की मझगवां बीट में हुई इस कार्रवाई में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय, वन संरक्षक शहडोल, वन मंडलाधिकारी उमरिया और उपसंचालक सहित 80 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। तीन वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारियों और रेस्क्यू टीम ने भी अभियान में भाग लिया।


कॉलर हटाकर किया गया घाव का उपचार
रेस्क्यू के दौरान हाथी के गले में लगा रेडियो कॉलर हटाया गया। वन विभाग के मुताबिक, लंबे समय तक कॉलर लगे रहने और हाथी की शारीरिक अवस्था में वृद्धि होने से उसमें कसाव आ गया था। इसके कारण गर्दन पर घाव बन गया था। वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारियों ने कॉलर हटाने के बाद घाव की ड्रेसिंग की। पूरी कार्रवाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।

अब कल्लवाह रेंज में होगी निगरानी
रेस्क्यू के बाद हाथी के परिवहन की प्रक्रिया शुरू की गई। परिवहन पूरा होने पर उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की कल्लवाह रेंज में बनाए गए अस्थायी निगरानी क्षेत्र में रखा जाएगा। वहां उसकी शारीरिक स्थिति पर नजर रखी जाएगी। इसके बाद वरिष्ठ कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के अनुसार, नर जंगली हाथी कॉलर नंबर-3 का निर्धारित प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है। कॉलर में कसाव आने से गर्दन पर बने घाव की ड्रेसिंग कराई गई है। परिवहन के बाद हाथी को अस्थायी निगरानी क्षेत्र में रखा जाएगा और निगरानी के उपरांत वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशानुसार अगला निर्णय लिया जाएगा।

 

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