संघ का नाम लेने से STF को परहेज क्यों?
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मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) भर्ती घोटाले में अब आरएसएस के पूर्व सरसंघ चालक के. सुदर्शन और प्रमुख संघ नेता सुरेश सोनी का नाम उछल रहा है। वहीं जांच कर रहे विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने शुक्रवार को इन खबरों का खंडन कर दिया है।
एसटीएफ ने बयान में कहा है कि व्यापम घोटाले में संघ नेताओं का कोई जिक्र नहीं आया है। एसटीएफ ने अखबारों में छप रही इन खबरों को भी गलत बताया कि आरोपी पूर्व परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी और कंप्यूटर प्रोग्रामर नितिन महिंद्रा ने ऐसा कोई बयान दिया है कि मुख्यमंत्री निवास से प्राइवेट नंबर से फोन आते थे।
मिहिर ने लिए संघ नेताओं के नाम!
एसटीएफ के कुछ दस्तावेजों के हवाले से खबरें आई हैं कि सुदर्शन के सेवादार मिहिर ने पूछताछ और अपने बयान में संघ नेताओं के नाम लिए हैं।
पटना के मूल निवासी मिहिर और पंकज त्रिवेदी द्वारा एसटीएफ को बयान दिए गए हैं और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क आदि से उनके खिलाफ सबूत जुटाए जाने का जिक्र किया जा रहा है।
इन बयानों के हवाले से खबरें छप रही हैं कि कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी व नापतौल अधिकारी पद पर नियुक्ति के लिए सुदर्शन ने उसके नाम की सिफारिश तत्कालीन उच्च शिक्षामंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से की थी।
'आरएसएस के लोग अनुचित काम नहीं करते'
संघ नेताओं के नाम अखबारों में छपने के बाद प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने शुक्रवार को एसटीएफ के एडीजी सुधीर साही के साथ ही अन्य अधिकारियों की बैठक बुलाई थी।
बैठक के बाद एसटीएफ ने एक बयान जारी कर कहा कि इन खबरों में सत्यता नहीं है। आरएसएस नेताओं का कोई नाम पंकज त्रिवेदी ने नहीं लिया है।
भाजपा नेता प्रभात झा ने कहा है कि यह संभव ही नहीं है कि आरएसएस के लोग कोई अनुचित काम करें। वे किसी की मदद करने के लिए फोन भले ही कर दें लेकिन गलत काम नहीं कर सकते।
