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रीवा: सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर, झाड़ू लगाने को मजबूर छात्र और शिक्षक, पेयजल की भी व्यवस्था नहीं
Sun, 13 Mar 2022 10:08 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 13 Mar 2022 10:08 AM IST
सार
रीवा जिले के सरकारी स्कूल में छात्र और शिक्षक हर दिन साफ सफाई करने के लिए मजबूर हैं। स्कूल में सफाई कर्मी न होने के चलते बच्चों को हर दिन खुद झाड़ू लगाना पड़ती है।
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कक्षा में झाड़ू लगाती छात्रा।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत बदतर है। हाल ही में इसका एक नजारा रीवा जिले के सरकारी स्कूल में देखने को मिला। यहां हर दिन स्कूल शुरू होने से पहले छात्र और शिक्षक को खुद सफाई करनी होती है। हाथ में झाड़ू लेकर शिक्षक और छात्रों का सफाई करते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
दरअसल रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के कुशवार पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सफाई कर्मचारी का इंतजाम नहीं है, लिहाजा यहां छात्र और शिक्षक खुद रोज सफाई करने के लिए मजबूर हैं। बच्चे हर दिन स्कूल आने के बाद अपनी कक्षाओं में झाड़ू लगाते है, दरी बिछाते हैं और फिर पढ़ाई शुरू करते हैं।
विद्यालय के शिक्षक के अनुसार स्कूल में पानी की भी व्यवस्था नहीं है, जिसके चलते बच्चों को रोज अपने घर से पानी भी लेकर आना पड़ता है। स्कूल में भृत्य भी नहीं है।
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हर साल प्रदेश सरकार लाखों का बजट स्कूली शिक्षा पर खर्च करती है। किताबें, स्कूल यूनिफॉर्म से लेकर मध्यांह भोजन और साइकिल तक बच्चों को प्रदान करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन अब भी प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों की हालत दयनीय है। ना तो छात्रों को बैठने के लिए साफ कक्षाएं मिल रही हैं, न ही स्वच्छ पानी। प्रदेश के सैकड़ों स्कूल महज एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
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दरअसल रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के कुशवार पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सफाई कर्मचारी का इंतजाम नहीं है, लिहाजा यहां छात्र और शिक्षक खुद रोज सफाई करने के लिए मजबूर हैं। बच्चे हर दिन स्कूल आने के बाद अपनी कक्षाओं में झाड़ू लगाते है, दरी बिछाते हैं और फिर पढ़ाई शुरू करते हैं।
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विद्यालय के शिक्षक के अनुसार स्कूल में पानी की भी व्यवस्था नहीं है, जिसके चलते बच्चों को रोज अपने घर से पानी भी लेकर आना पड़ता है। स्कूल में भृत्य भी नहीं है।
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हर साल प्रदेश सरकार लाखों का बजट स्कूली शिक्षा पर खर्च करती है। किताबें, स्कूल यूनिफॉर्म से लेकर मध्यांह भोजन और साइकिल तक बच्चों को प्रदान करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन अब भी प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों की हालत दयनीय है। ना तो छात्रों को बैठने के लिए साफ कक्षाएं मिल रही हैं, न ही स्वच्छ पानी। प्रदेश के सैकड़ों स्कूल महज एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
