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यौन शोषण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज को राज्यसभा के जांच पैनल ने क्लीन चिट दी

Sat, 16 Dec 2017 10:51 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sat, 16 Dec 2017 10:51 AM IST
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Rajya Sabha probe panel gave clean chit to Madhya Pradesh High Court judge in sexual abuse case
प्रतीकात्मक तस्वीर
राज्यसभा के एक पैनल ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस.के. गंगेले को यौन शोषण के मामले में क्लीन चिट दे दी है। उन पर एक पूर्व न्यायिक अधिकारी ने यह आरोप लगाया था। शुक्रवार को राज्यसभा में पेश की गई पैनल की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। अब जस्टिस गंगेले के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही नहीं होगी। 
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सुप्रीम कोर्ट की जज आर भानुमति, बांबे हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस मंजुला चेलुर और न्यायविद के.के. वेणुगोपाल की सदस्यता वाले इस पैनल का गठन राज्यसभा के तत्कालीन सभापति हामिद अंसारी ने अप्रैल 2015 में किया था। इससे पहले दिग्विजय सिंह एवं सीताराम येचुरी समेत 58 सांसदों ने जस्टिस गंगेले के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही के एक प्रस्ताव का समर्थन किया था। इस तरह के महाभियोग प्रस्ताव पर सदन में कार्यवाही के लिए लोकसभा के 100 और राज्यसभा के 50 सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। इस मामले में 58 सदस्यों ने सभापति को जस्टिस गंगेले पर ग्वालियर की महिला जज के यौन शोषण के मामले में महाभियोग की कार्यवाही चलाने का प्रस्ताव सौंपा था। 
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यह भी पढ़ें: जस्टिस गंगेले पर लगे आरोपों की जांच करेंगे गोगोई 
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इस प्रस्ताव में जज गंगेले पर यौन शोषण करने, महिला जज को ग्वालियर से सीधी स्थानांतरित कर प्रताड़ित करने और अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए थे। पैनल ने अपनी जांच में चार मौकों पर यौन शोषण किए जाने के आरोप को सही नहीं पाया। हालांकि पैनल ने महिला जज के स्थानांतरण को अनुचित करार देते हुए कहा है कि ट्रांसफर कमेटी ने जांच किए बगैर सिर्फ जिला जज कमल सिंह की अनुशंसा के आधार पर यह कार्रवाई कर अनियमितता बरती है। 


पैनल ने कहा कि जब उनका ट्रांसफर किया गया तो उनके बच्चे की 12वीं की बोर्ड परीक्षा होने वाली थी। ऐसे में महिला जज के सामने इस्तीफा देने के अलावा कोई और चारा नहीं था। इसके मद्देनजर अगर वह महिला जज फिर सेवा में आना चाहती हैं तो उनकी बहाली की जाए। हालांकि पैनल ने जस्टिस गंगेले के खिलाफ पद के दुरुपयोग के आरोप को सही नहीं पाया है। 

पहली बार सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ हुई थी महाभियोग की कार्यवाही 
पहली बार 1991 में सुप्रीम कोर्ट के जज वी. रामास्वामी के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही हुई थी। उनके ऊपर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश रहने के दौरान फर्नीचर खरीद में गड़बड़ी का आरोप लगा था। प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया था। इस पर मतदान कराया गया, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस के वोटिंग में हिस्सा नहीं लेने की वजह से प्रस्ताव गिर गया। 
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