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ऑपरेशन मनी ट्रैप: दो करोड़ रुपये की ठगी का पर्दाफाश, तीन हजार से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालकर 14 गिरफ्तार

Thu, 27 Aug 2026 09:22 PM IST
राजगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़ Published by: राजगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 27 Aug 2026 09:22 PM IST
सार

‘ऑपरेशन मनी ट्रैप’ के तहत पुलिस ने 10 राज्यों में करीब 30 हजार किलोमीटर पीछा कर दो करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर 1.73 करोड़ रुपये नकद, चार लग्जरी वाहन और 19 मोबाइल बरामद किए। गिरोह फर्जी दस्तावेजों से निवेशकों को झांसा देता था। 

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Rajgarh police busted a fraud of Rs 2 crore, 14 fraudsters arrested
दो करोड़ की ठगी करने वाले 14 आरोपी गिरफ्तार

विस्तार

पुलिस ने 'ऑपरेशन मनी ट्रैप' के तहत 10 राज्यों में करीब 30 हजार किलोमीटर तक पीछा कर दो करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 1.73 करोड़ रुपये नकद, चार लग्जरी वाहन और 19 एंड्रॉयड मोबाइल बरामद किए हैं।

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पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने बताया कि गिरोह ने ब्यावरा निवासी एक व्यक्ति से रकम दोगुनी करने का लालच देकर भोपाल में 2 करोड़ रुपये नकद ठग लिए थे। पुलिस टीमों ने लगभग 35 दिनों तक चले अभियान में 3,000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपितों को पकड़ा।
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फर्जी दस्तावेज से दिया झांसा
जांच के मुताबिक गिरोह के बदमाशों ने खुद को बड़ी कंपनियों से जुड़ा बताकर फरियादी का भरोसा जीता। आरोपियों ने फर्जी ई-मेल, स्वीकृति-पत्र और 4 करोड़ रुपये के आरटीजीएस का जाली स्क्रीनशॉट दिखाकर बड़ी रकम हड़प ली। भोपाल के जहांगीराबाद स्थित एक कूरियर दफ्तर में 22 जुलाई को 2 करोड़ रुपये नकद लेने के बाद आरोपी फरार हो गए। ठगी की शिकायत मिलने पर गठित 10 विशेष टीमों के 50 पुलिसकर्मियों ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा सहित 10 राज्यों में लगातार छापे मारे।
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छह स्तरों में संगठित ढांचा
पुलिस की पड़ताल से स्पष्ट हुआ कि यह अंतरराज्यीय गिरोह छह अलग-अलग स्तरों पर योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। पहला स्तर धनी निवेशकों की पहचान करता था, जबकि दूसरा और तीसरा स्तर महंगी गाड़ियों, बड़े होटलों में बैठकों और फर्जी कागजातों से उनका विश्वास हासिल करता था। चौथा तथा पांचवां स्तर प्रत्यक्ष बैंकिंग रिकॉर्ड से बचने के लिए केवल नकद राशि लेता था और उसे हवाला व आंगड़िया नेटवर्क के जरिये विभिन्न शहरों में स्थानांतरित करता था। इसके बाद छठा स्तर रकम का बंटवारा करके अपने ठिकाने तथा मोबाइल नंबर बदल देता था। पहचान छिपाने के लिए गिरोह के सभी सदस्य फर्जी व्यावसायिक नामों का इस्तेमाल करते थे।

अन्य राज्यों तक फैला नेटवर्क
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 2,92,91,000 रुपये की कुल संपत्ति जब्त की है। इसमें मुख्य आरोपित आरिफ हुसैन से 46 लाख रुपये नकद, अशोक चौधरी से 42 लाख रुपये, नवीन जैन से 30 लाख रुपये और सन्नी उर्फ शमीम मंडल से 25 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह इंदौर में भी ठगी की नई वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। इससे पूर्व यह गिरोह पश्चिम बंगाल में 50 लाख रुपये और दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी से 50 लाख रुपये ठग चुका है। गिरोह ने उदयपुर, इंदौर, भोपाल, दिल्ली, मुंबई और पश्चिम बंगाल में अपने कार्यालय बना रखे थे।

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