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Rajgarh: कथावाचक देवकीनंदन ने हिंदुओं को दरगाह परिसर में लगने वाले उर्स में न जाने को कहा;विवादित वीडियो वायरल
Fri, 22 Dec 2023 05:54 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Fri, 22 Dec 2023 05:54 PM IST
सार
Urs Fair Rajgarh: दरगाह हजरत बाबा बदख्शानी की दरगाह परिसर में हर साल लगने वाले उर्स मेले को लेकर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का विवादित वीडियो वायरल हो रहा है। उसमें वह हिंदुओं से उर्स में न जाने की चेतावनी विवादित तरीके से देते नजर आ रहे हैं, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। पढ़ें पूरी खबर...।
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कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के राजगढ़ में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की कथा के दौरान का एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वे उसमें सनातनियों (हिंदू लोगों) को राजगढ़ की दरगाह परिसर में होने वाले उर्स के आयोजन में न जाने को लेकर विवादित शब्द कहते हुए चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। दरअसल, देवकीनंदन जिले के खिलचीपुर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले छापीहेड़ा में 17 दिसंबर से श्रीमद भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं। वायरल वीडियो इसी कार्यक्रम का बताया जा रहा है।
‘उर्स विधर्मियों का त्योहार, सनातनियों का नहीं’
जानकारी के मुताबिक, कथा के वायरल वीडियो में देवकीनंदन ठाकुर कार्यक्रम में मौजूद जनसमूह से यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि एक कोई त्योहार है जो विधर्मियों का है, सनातनियों का नहीं है। ध्यान से सुन लो हमारा मैसेज, अगर तुम सच्चे सनातनी हो तो अपने धर्माचार्यों के वचनों का पालन करो। नहीं तो माना जाएगा तुम असली नहीं, नकली हो। आप ही के राजगढ़ में कोई उर्स उत्सव मनाया जाता है। मैंने ये सुना है कि उन लोगों से ज्यादा हमारे धर्म के लोग मेले में जाते हैं। अगर तुम्हें कृष्ण से और राम से प्रेम है तो ऐसी किसी भी जगह पर जाना बंद कर दो, जहां हमारे देवी-देवताओं की पूजा न होती हो।
क्या है राजगढ़ में लगने वाला सालाना उर्स मेला
दरअसल, राजगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल दरगाह हजरत बाबा बदख्शानी की दरगाह परिसर में प्रतिवर्ष 10 मार्च से 15 मार्च तक उर्स और 25 मार्च तक मेले का आयोजन किया जाता है, जो कि देश में लगने वाले सबसे बड़े मेले में राजस्थान के अजमेर के बाद दूसरे नंबर पर है। इसमें सभी धर्मों के लोग लाखों की तादाद में तशरीफ लाते हैं और मेले का लुत्फ उठाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि वह राजगढ़ जिले सहित आसपास के तमाम व्यापारियों के लिए आय का एक स्त्रोत भी है, जिसमें दुकानदार अपने प्रतिष्ठान लगाकर आय अर्जित करते हैं। लेकिन वहीं ऐसे में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उत्पन्न हो रहे हैं।
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गंगा-जमुनी तहजीब का रहा अनूठी मिसाल यह उर्स
गौरतलब है कि राजगढ़ में होने वाले उर्स का आयोजन गंगा जमुनी तहजीब की एक अनूठी मिसाल भी रहा है। लगभग 30 साल से अधिक और पांच साल पूर्व तक जिसकी शुरुआत राजगढ़ शहर के पारायण चौक में स्थित मंदिर से दरगाह परिसर तक लाई गई चादर पेश करने के बाद हुआ करती थी। उसी प्रकार गुड़ी पड़वा के एक दिन पूर्व मजार से मंदिर तक हनुमान जी का झंडा ले जाया जाता था, जिसमें सभी धर्मों के लोग बड़ी संख्या में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया करते थे। लेकिन कुछ वर्षों से उक्त दोनों ही परंपराएं बंद हैं।
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‘उर्स विधर्मियों का त्योहार, सनातनियों का नहीं’
जानकारी के मुताबिक, कथा के वायरल वीडियो में देवकीनंदन ठाकुर कार्यक्रम में मौजूद जनसमूह से यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि एक कोई त्योहार है जो विधर्मियों का है, सनातनियों का नहीं है। ध्यान से सुन लो हमारा मैसेज, अगर तुम सच्चे सनातनी हो तो अपने धर्माचार्यों के वचनों का पालन करो। नहीं तो माना जाएगा तुम असली नहीं, नकली हो। आप ही के राजगढ़ में कोई उर्स उत्सव मनाया जाता है। मैंने ये सुना है कि उन लोगों से ज्यादा हमारे धर्म के लोग मेले में जाते हैं। अगर तुम्हें कृष्ण से और राम से प्रेम है तो ऐसी किसी भी जगह पर जाना बंद कर दो, जहां हमारे देवी-देवताओं की पूजा न होती हो।
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क्या है राजगढ़ में लगने वाला सालाना उर्स मेला
दरअसल, राजगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल दरगाह हजरत बाबा बदख्शानी की दरगाह परिसर में प्रतिवर्ष 10 मार्च से 15 मार्च तक उर्स और 25 मार्च तक मेले का आयोजन किया जाता है, जो कि देश में लगने वाले सबसे बड़े मेले में राजस्थान के अजमेर के बाद दूसरे नंबर पर है। इसमें सभी धर्मों के लोग लाखों की तादाद में तशरीफ लाते हैं और मेले का लुत्फ उठाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि वह राजगढ़ जिले सहित आसपास के तमाम व्यापारियों के लिए आय का एक स्त्रोत भी है, जिसमें दुकानदार अपने प्रतिष्ठान लगाकर आय अर्जित करते हैं। लेकिन वहीं ऐसे में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उत्पन्न हो रहे हैं।
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गंगा-जमुनी तहजीब का रहा अनूठी मिसाल यह उर्स
गौरतलब है कि राजगढ़ में होने वाले उर्स का आयोजन गंगा जमुनी तहजीब की एक अनूठी मिसाल भी रहा है। लगभग 30 साल से अधिक और पांच साल पूर्व तक जिसकी शुरुआत राजगढ़ शहर के पारायण चौक में स्थित मंदिर से दरगाह परिसर तक लाई गई चादर पेश करने के बाद हुआ करती थी। उसी प्रकार गुड़ी पड़वा के एक दिन पूर्व मजार से मंदिर तक हनुमान जी का झंडा ले जाया जाता था, जिसमें सभी धर्मों के लोग बड़ी संख्या में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया करते थे। लेकिन कुछ वर्षों से उक्त दोनों ही परंपराएं बंद हैं।
