छात्रों की गूंज: इंदौर में राहुल गांधी ने उठाया सिस्टम का मुद्दा, बोले- देश में टॉप लेयर पर छह लोग बैठे हैं
इंदौर में राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने पेपर लीक, भर्ती, शिक्षा और पारदर्शिता के सवाल उठाए। छात्रों ने बेरोजगारी, 13% पद होल्ड और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं बताईं।
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राहुल गांधी ने इंदौर में अपने स्वागत के लिए पहुंचे लोगों का आभार जताते हुए कहा कि आपने मेरा जिस तरह स्वागत किया, उसके लिए धन्यवाद। मैं यहां आकर बहुत खुश हूं।” उन्होंने कहा कि कोटा, देहरादून और पुणे के बाद अब ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इंदौर में आयोजित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि हर शहर में कार्यक्रम के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और उनके भविष्य को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। इनमें पेपर लीक, संस्थागत विफलता, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, शिक्षा की बढ़ती लागत और निजीकरण जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर में हमने तय किया है कि आज का विषय ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ होगा। छात्र बताएंगे कि सिस्टम क्या है, वह छात्रों को किस तरह प्रभावित कर रहा है और उनके भविष्य के सामने किस तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।”
राहुल ने पूछा- क्या औसत स्टूडेंट को रोजगार मिल सकता है?
राहुल गांधी ने एक छात्र से पूछा कि आपको लगता है कि हिंदुस्तान के एवरेज स्टूडेंट को रोजगार मिल सकता है? इसपर छात्र ने जवाब दिया, “बिल्कुल सर, मिल सकता है। मिलना चाहिए। बहुत सारी भर्तियां खाली हैं, भर्तियां नहीं होती हैं।” राहुल ने पूछा, “तो फिर क्यों नहीं मिलता? इसपर छात्र ने कहा, “यहां पर सिस्टम ऐसा है। हम लोग आंदोलन करते हैं कि भर्तियां निकालिए, रिजल्ट रोक दिए जाते हैं। बहुत सारे पद निकलते ही नहीं हैं। संविदा से भर दिए जाते हैं। प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैं। जो मेन पद हैं, वो भरे नहीं जा रहे। आज भी डेटा बता रहा है कि आधे पद खाली हैं।”
राहुल बोले- सिस्टम की टॉप लेयर पर 6 लोग
राहुल गांधी ने स्क्रीन पर स्लाइड दिखाई और कहा, “तीन फ्रेंड ने सिस्टम की बात की। सिस्टम क्या है, ये सिस्टम है, देश पर सिस्टम का कब्जा। सिस्टम में कई लेयर हैं। टॉप लेवल पर 6 लोग बैठे हैं। इसे मोदी चलाते हैं, धमकाने का काम, उन्हें मारने का काम, पैलेट गन मारने का काम शाह चलाते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यक्रम में कई युवा मंच पर आकर खुलकर अपनी बात रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की शुरुआत की।
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राहुल बोले- स्टूडेंट्स खुश नहीं, उन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा
राहुल गांधी ने कहा, “अगर आज हम स्टूडेंट्स से बात करें तो वे खुश नहीं हैं। स्टूडेंट्स असहज हैं, उन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा और वे दबाव में हैं।” उन्होंने कहा, “आइए, स्टूडेंट्स की आवाज सुनते हैं। आप सिस्टम के बारे में क्या कह रहे हैं, उसे सुनते हैं। छात्रों के मन में यह सवाल है कि परीक्षा पर भरोसा कैसे किया जाए? कैसे भरोसा करें कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ हो रही है? कैसे पता चले कि किसी परीक्षा में सही तरीके से चयन हुआ है या नहीं?”
राहुल बोले- कैंडिडेट्स की भी गलती, युवा बोले- हम सिस्टम से हार गए
राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षाओं के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की भी गलती हुई है, लेकिन कहीं न कहीं उनका सिस्टम पर भरोसा खत्म हो गया है। इसके बाद छात्रों की ओर से आवाज आई, “सर, हम सिस्टम से हार गए।” राहुल ने कहा कि सिस्टम के अंदर बैठे कुछ लोग भ्रष्ट हो जाते हैं। पैसे के चक्कर में पेपर लीक कर देते हैं और लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्ट लोग परीक्षा व्यवस्था में रहेंगे और परीक्षा प्रणाली ही भ्रष्ट होगी, तो इसका नुकसान बच्चों को उठाना पड़ेगा।
राहुल से छात्रा बोली- हर तरफ फर्जीवाड़ा
राहुल गांधी ने एक छात्रा से पूछा कि जो सिस्टम यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों को प्रोटेक्ट करने के लिए बना है, वही सिस्टम स्टूडेंट्स पर आक्रमण कर रहा है। इसके बारे में वह क्या सोचती हैं? इस पर छात्रा ने कहा कि यूनिवर्सिटीज बिल्कुल कोऑपरेट नहीं कर पा रही हैं। हर तरफ फर्जीवाड़ा चल रहा है। कहीं भी ट्रांसपेरेंसी नहीं है। हम चाहते हैं कि जो समस्याएं आपके सामने लेकर आए हैं, उनका अच्छा समाधान मिले और हमारी सारी समस्याएं दूर हों।
छात्र बोला- एमपी में 8 साल से 13% पद होल्ड
राहुल गांधी के कार्यक्रम में एक एमबीबीएस छात्र ने मध्य प्रदेश में भर्तियों से जुड़ी समस्या बताते हुए कहा, “पिछले 8 वर्षों से जितनी भी भर्तियां होती हैं, सब पर 13% होल्ड कर दिया जाता है। प्रीलिम्स हो जाती है, मेंस परीक्षा हो जाती है, इंटरव्यू भी हो जाता है, लेकिन सिलेक्शन के लिए 13% रोक देते हैं।” छात्र ने कहा, “मेरे जैसे युवा कम से कम 4 लाख हैं और डायरेक्ट 87 हजार बच्चे होल्ड हैं। एमबीबीएस, व्यापम और जितनी भी परीक्षाएं होती हैं, सब पर 13% रोक लग जाती है। कोर्ट का बहाना देकर सरकार हर बार रोकती है। कोर्ट ने कई बार कमेंट किया कि आप अपना रिजल्ट क्यों नहीं देते? अपना ही कानून क्यों लागू नहीं करते?” छात्र ने कहा, “हम लोग 8 साल से ओवरएज हो गए हैं। पूरे प्रदेश में इतने सारे स्टूडेंट हैं कि सबकी स्थिति खराब है। मानसिक स्थिति खराब हो गई है। हम इंतजार कर रहे हैं कि हमारा रिजल्ट कब आएगा, नियुक्ति कब होगी। युवा एसडीएम और डीएम बन सकते हैं, लेकिन आज बेरोजगार बैठे हैं। मैं खुद यहां इंदौर में पार्ट-टाइम जॉब करता हूं।”
राहुल ने कहा- सिस्टम चलाने वालों के बच्चे विदेश में पढ़ रहे
राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम को चलाने वालों के बच्चों को देखिए, वे इंदौर में पढ़ रहे हैं या विदेश में। ये देश के युवाओं को अंधभक्त बनाना चाहते हैं। अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर भेजेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि हमने शुरुआत में ही कहा था कि स्टूडेंट देश को बनाता है और शिक्षा देश की नींव है। शिक्षा हर स्टूडेंट का हक है। स्कूल में मिड-डे मील से लेकर कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है।
एमपी के युवा क्या बोले?
धार जिले के एक युवक ने कहा कि प्रदेश में 25 साल से भाजपा की सरकार है। वर्ष 2003 से करीब डेढ़ लाख पद खाली पड़े हैं। देवास के रणजीत किसान वंशी ने कहा कि लोक सेवा आयोग हमारा ज्ञापन नहीं लेता। हम तीन-तीन बार धरने पर बैठे। मुख्यमंत्री ने हमें चर्चा के लिए बुलाया, लेकिन इसके बाद हमारे खिलाफ केस दर्ज हो गया।
रणजीत ने कहा कि व्यापमं तो पेपर लीक और भर्ती घोटालों के लिए ही बना था। पटवारी परीक्षा में एक ही कॉलेज के 10 टॉपर सामने आए। यह कैसे संभव है? मध्यप्रदेश में एक के बाद एक पेपर लीक हो रहे हैं। इंदौर की अर्थव्यवस्था हमारे पैसों से चलती है। हमारी वजह से सभी को रोजगार मिल रहा है, लेकिन हमें रोजगार नहीं मिलता।
भोपाल के प्रणय ने कहा कि अंधभक्तों को कॉलेजों में एडमिशन मिलता है, लेकिन युवाओं को नहीं। उज्जैन जिले की राधा मालवीय ने कहा कि वह पीएचडी कर रही हैं। इंदौर में रहने के लिए लाखों रुपए खर्च होते हैं। हमें पर्याप्त आवास भत्ता नहीं मिलता, जबकि मकानों का किराया बढ़ गया है। हमें ब्याज पर पैसा लेना पड़ता है। हॉस्टल में सीटें नहीं मिलती हैं।
दीप्ति ठाकुर ने कहा कि उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की, लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। शिक्षा का सिस्टम अपनी जिम्मेदारियां नहीं लेता, बल्कि घोटाला करता है। 21 अगस्त से आंदोलन चल रहा है। जयश्री सेंगर ने कहा कि सरकारी हॉस्टल में खाना अच्छा नहीं मिलता है। कई छात्राओं को सरकारी हॉस्टल नहीं मिलने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
