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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Panna: Former deputy tehsildar and watchman sentenced to five years in jail for demanding bribe from a farmer

Panna News: किसान से रिश्वत मांगना पड़ा भारी, पूर्व नायब तहसीलदार और चौकीदार को 5-5 साल की जेल

Fri, 19 Jun 2026 08:59 PM IST
पन्ना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना Published by: पन्ना ब्यूरो Updated Fri, 19 Jun 2026 08:59 PM IST
सार

ट्रैक्टर छोड़ने के बदले किसान से 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगना एक अधिकारी को भारी पड़ गया। पन्ना की विशेष अदालत ने तत्कालीन नायब तहसीलदार और उनके सहयोगी को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी मानते हुए जेल भेजने का आदेश दिया है।

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Panna: Former deputy tehsildar and watchman sentenced to five years in jail for demanding bribe from a farmer
तत्कालीन नायब तहसीलदार और सहयोगी हिरासत में - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले के गुनौर में पदस्थ रहे तत्कालीन प्रभारी नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय ने रविशंकर शुक्ला और उनके सहयोगी चौकीदार देवीदयाल दहायत को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
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किसान से मांगी थी 35 हजार रुपये की रिश्वत
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि मामला वर्ष 2020 का है। सिली गांव निवासी ब्रजबिहारी प्रजापति अपने खेत से ईंट निर्माण के लिए मिट्टी ट्रैक्टर में भरकर ले जा रहे थे। इसी दौरान तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने उनका ट्रैक्टर जब्त कर थाने में खड़ा करवा दिया। आरोप है कि ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में रविशंकर शुक्ला ने किसान से 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
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लोकायुक्त ने बिछाया जाल, रंगे हाथों पकड़े गए
ब्रजबिहारी प्रजापति रिश्वत नहीं देना चाहते थे। उन्होंने इसकी शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस से की। शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की। बातचीत के दौरान 35 हजार रुपये देने पर सहमति बनी, जिसमें से 10 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे। शेष 25 हजार रुपये देने के लिए जब शिकायतकर्ता सरकारी आवास पहुंचा तो रविशंकर शुक्ला ने रकम अपने पास खड़े चौकीदार देवीदयाल दहायत को देने के लिए कहा। जैसे ही रिश्वत की राशि सौंपी गई, लोकायुक्त टीम ने मौके पर छापा मारकर दोनों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और रिश्वत की रकम बरामद कर ली।

मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) सुरेंद्र मेश्राम की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी माना। सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि भ्रष्टाचार जैसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सके। अदालत ने पूर्व नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 3 वर्ष और 5 वर्ष के कठोर कारावास के साथ क्रमशः 10 हजार और 15 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। वहीं चौकीदार देवीदयाल दहायत को रिश्वतखोरी में सहयोग करने का दोषी मानते हुए 5 वर्ष और 3 वर्ष के कठोर कारावास तथा 15 हजार और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत के आदेशानुसार दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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