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इंदौर में गड्ढों ने ली बेटे की जान: तड़प उठा पिता, बोला- अच्छी सड़क होती तो बच जाता मेरा बच्चा

Fri, 01 Oct 2021 02:24 PM IST
सुभाष कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: सुभाष कुमार Updated Fri, 01 Oct 2021 02:24 PM IST
सार

अपने दोस्त के साथ पिता का पेट्रोल पंप देखकर वापस जाने के क्रम में इंदौर -बैतूल नेशनल हाईवे पर कालाफाटा के समीप एक बस ने तनिष्क की बाईक को टक्कर मार दी।

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noida student aspiring to take admission in law college died due to bad roads on indore-betul national highway
मध्य प्रदेश के इंदौर में 18 साल के छात्र की सड़क के गड्ढों ने ली जान। - फोटो : social media

विस्तार

हमारे देश में जितनी जानें सड़क हादसों में जाती है उतनी शायद कोई आम महामारी भी नहीं लेती। नोएडा से वकालत का सपना लिए इंदौर के एक निजी लॉ कॉलेज में एडमिशन लेने आए 18 साल के तनिष्क राज की सड़कों के गड्ढों ने जान ले ली। तनिष्क के पिता का कन्नौद (देवास) के सामने एक पेट्रोल पंप है। अपने दोस्त के साथ उसे ही देखकर वापस जाने के क्रम में इंदौर -बैतूल नेशनल हाईवे पर कालाफाटा के समीप एक बस ने उनकी बाईक को टक्कर मार दी। बता दें कि इसी जगह पर कुछ दिनों पहले एक छात्रा की भी मौत हो गई थी।  

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तनिष्क और उसके साथी अजय को घायल अवस्था में जल्दी से कन्नौद अस्पताल ले जाया गया। सीने और सिर में जख्म के कारण तनिष्क का खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था। डॉक्टरों ने उसे जल्द से जल्द इंदौर ले जाने की सलाह दी। लेकिन खराब सड़कों ने उनका रास्ता रोक लिया और तनिष्क की जान चली गई।  
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बुआ की तरह जज बनने का था सपना
तनिष्क के पिता ने रोती हुई आवाज में बताया कि डॉक्टरों का कहना था कि अगर तनिष्क को थोड़ी देर पहले लाया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। तनिष्क का परिवार नोएडा के इंदू विहार का रहने वाला था। उसके पिता ने कुछ साल पहले ही कन्नौद के पास एक पेट्रोल पंप डाला था। तनिष्क की बुआ गुजरात में जज थीं और वह उन्हीं की तरह बनना चाहता था।  
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पिता ने बताया जर्जर सड़कों के कारण गई जान
तनिष्क के पिता विनोद कुमार ने बताया कि जब मुझे हादसे का पता चला तो तुरंत कन्नौद अस्पताल पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने बेटे को इंदौर के किसी बड़े अस्पताल में ले जाने के लिए कहा, क्योंकि उसके सिर से खून बहना नहीं रूक रहा था। पहले मैने एंबुलेंस बुक किया, इसमें भी मुझे इंतजार करना पड़ा। फिर एंबुलेंस आते ही तनिष्क को लेकर इंदौर के लिए निकल पड़ा, लेकिन रास्ता इतना घटिया था कि एंबुलेंस बैलगाड़ी से भी धीरे चल रही थी। कई जगह पर इसे रुकना भी पड़ा, तनिष्क के सिर से खून लगातार बहता जा रहा था। जब तक हम बॉंम्बे अस्पताल पहुंचे तनिष्क की हालत बहुत बिगड़ गई थी। डॉक्टरों ने कहा कि काफी देर कर दी नहीं तो तनिष्क की जान बच जाती।

 
20 सालों से चल रहा है हाईवे का काम
बीस हजार करोड़ के पैकेज से बन रहे इंदौर-नेमावर नेशनल हाईवे का काम पिछले 20 सालों से चल रहा है। इसमें इंदौर से कन्नौद तक के हाईवे का हिस्सा 91 किमी का है। आश्चर्य की बात है कि अब तक इस कार्य का 40 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है। 

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