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भक्ति की कोई भाषा नहीं: इंदौर में पाकिस्तान से आए सिंधी और सिखों की वजह से बढ़ी उर्दू हनुमान चालीसा की मांग
Fri, 06 May 2022 04:50 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 06 May 2022 04:50 PM IST
सार
लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा पढ़ने के मसले के बाद हनुमान चालीसा की ब्रिकी में तेजी आई है। पहले एक दिन में 200 से 250 हनुमान चालीसा बिकती थीं, लेकिन अब इनकी बिक्री 350 से 400 तक हो रही है। इंदौर में उर्दू की हनुमान चालीसा भी खासी डिमांड में है।
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बाजारों में उर्दू हनुमान चालीसा की मांग भी बढ़ी है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
देश के कई हिस्सों से अशांति की खबरें आ रही हैं। इन दिनों धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का विवाद गहराया हुआ है। इस पर राजनीति भी जमकर हो रही है। इस सबके बीच इंदौर से एक अच्छी खबर आ रही है। यहां पुस्तकों की बिक्री बढ़ी है, उसमें भी धार्मिक किताबों की पूछपरख बढ़ी है। बाजारों में उर्दू हनुमान चालीसा की मांग भी बढ़ी है।
धार्मिक पुस्तक विक्रेता की मानें तो हाल ही में धार्मिक किताबों की मांग में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। पहले शहर में प्रति दुकान 5 हजार धार्मिक पुस्तकें आती थीं, लेकिन अब शहर में 7 हजार 5 सौ धार्मिक पुस्तकें आ रही हैं। लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा पढ़ने के मसले के बाद हनुमान चालीसा की ब्रिकी में तेजी आई है। पहले एक दिन में 200 से 250 हनुमान चालीसा बिकती थीं, लेकिन अब इनकी बिक्री 350 से 400 तक हो रही है। हिंदी और मराठी की हनुमान चालीसा सबसे ज्यादा बिकती है। इंदौर में उर्दू की हनुमान चालीसा भी खासी डिमांड में है। धार्मिक पुस्तकों के विक्रेता त्रिलोचन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान से सिंधी और सिख जो भारत आए हैं वे हिंदी से बेहतर उर्दू पढ़ पाते हैं।
पाकिस्तान से आए एक युवक बताते हैं कि वे 2008 में पूरे परिवार के साथ भारत आकर बसे हैं। भारत में शांति और अपनापन लगता है। मुझे हिंदी नहीं आती, इसलिए उर्दू में हनुमान चालीसा का पाठ करता हूं। धीरे-धीरे सीख रहा हूं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से शरीर में एक नई ऊर्जा मिलती है। शहर की दुकानों में इन दिनों हिंदी के साथ ही मराठी, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगू, इंग्लिश और उर्दू भाषा में भी हनुमान चालीसा मिल रही है।
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धार्मिक पुस्तक विक्रेता की मानें तो हाल ही में धार्मिक किताबों की मांग में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। पहले शहर में प्रति दुकान 5 हजार धार्मिक पुस्तकें आती थीं, लेकिन अब शहर में 7 हजार 5 सौ धार्मिक पुस्तकें आ रही हैं। लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा पढ़ने के मसले के बाद हनुमान चालीसा की ब्रिकी में तेजी आई है। पहले एक दिन में 200 से 250 हनुमान चालीसा बिकती थीं, लेकिन अब इनकी बिक्री 350 से 400 तक हो रही है। हिंदी और मराठी की हनुमान चालीसा सबसे ज्यादा बिकती है। इंदौर में उर्दू की हनुमान चालीसा भी खासी डिमांड में है। धार्मिक पुस्तकों के विक्रेता त्रिलोचन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान से सिंधी और सिख जो भारत आए हैं वे हिंदी से बेहतर उर्दू पढ़ पाते हैं।
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पाकिस्तान से आए एक युवक बताते हैं कि वे 2008 में पूरे परिवार के साथ भारत आकर बसे हैं। भारत में शांति और अपनापन लगता है। मुझे हिंदी नहीं आती, इसलिए उर्दू में हनुमान चालीसा का पाठ करता हूं। धीरे-धीरे सीख रहा हूं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से शरीर में एक नई ऊर्जा मिलती है। शहर की दुकानों में इन दिनों हिंदी के साथ ही मराठी, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगू, इंग्लिश और उर्दू भाषा में भी हनुमान चालीसा मिल रही है।
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