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MP Panchyat Chunav: SC के फैसले पर श्रेय की होड़, शिवराज बोले- सत्यमेव जयते, कमलनाथ बोले- हमारे संघर्ष की जीत
Wed, 18 May 2022 01:22 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 18 May 2022 01:22 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण की इजाजत दे दी है। इस फैसले को लेकर भाजपा और कांग्रेस में श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है।
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शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ (फाइल फोटो)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने पाप किया था, पर सच की जीत हुई। सत्यमेव जयते। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि यह निर्णय कांग्रेस के संघर्ष की व ओबीसी वर्ग की जीत है, जिसने ओबीसी विरोधी शिवराज सरकार को झुकने पर मजबूर किया।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सत्य की जीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट को प्रणाम करता हूं। हमने कहा था कि हम चुनाव चाहते हैं। कांग्रेस ने पाप किया था, पर हमने हरसंभव प्रयास किया। हमने ओबीसी आयोग का गठन किया। सर्वे के आधार पर हमने रिपोर्ट बनाई। निकायवार रिपोर्ट भी सौंपी। वहीं, कांग्रेस और कमलनाथ हमेशा षडयंत्र ही करते रहे। कभी उनकी नीयत ओबीसी को न्याय देने की थी ही नहीं। मैं आज पूछता हूं कि कमलनाथ जी, जब 27% आरक्षण की बात थी तो कोर्ट में आपके एडवोकेट जनरल ओबीसी के लिए खड़े क्यों नहीं हुए? कमलनाथ जी, अब ओबीसी बहुत समझदार है। आपने पाप किया है, वह जान गया है?
वहीं, सोशल मीडिया पर कमलनाथ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हम पहले दिन से ही कह रहे थे कि मध्यप्रदेश में बगैर ओबीसी आरक्षण के पंचायत व नगरीय निकाय के चुनाव नहीं होना चाहिए। सरकार इसे लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए। हमने ओबीसी आरक्षण को लेकर सदन में भी लड़ाई लड़ी थी और उसके बाद सदन में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव भी पारित हुआ था कि मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण के बगैर पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव नहीं होना चाहिए। ओबीसी वर्ग से उनका जो हक छिना गया था, उसकी दोषी शिवराज
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सरकार थी। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार समय पर ट्रिपल टेस्ट की सम्पूर्ण प्रक्रियाओं का पालन कर देती, आधी-अधूरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं करती तो यह अप्रिय स्थिति कभी भी नहीं बनती लेकिन शिवराज सरकार ओबीसी वर्ग का हक छीन जाने के बाद नींद से जागी।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मामले में राहत प्रदान करने का निर्णय दिया है, उसका हम स्वागत करते हैं। हमारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया था, जिसका पूरा लाभ ओबीसी वर्ग को अभी भी नहीं मिलेगा क्योंकि निर्णय में यह उल्लेखित है कि आरक्षण 50% से अधिक नहीं होना चाहिए। हमें ओबीसी वर्ग का भला करने की कोई उम्मीद शिवराज सरकार से नहीं थी। इस वजह से हमने तो पहले से ही यह निर्णय ले लिया है कि हम निकाय चुनाव में 27% टिकट ओबीसी वर्ग को देंगे और इस वर्ग को उनका पूरा अधिकार देंगे। हम अपना वादा हर हाल में निभाएंगे। हमारा तो दृढ़ संकल्प है कि ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण का हक व अधिकार मिले। उसे हम हर हाल में पूरा करेंगे।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सत्य की जीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट को प्रणाम करता हूं। हमने कहा था कि हम चुनाव चाहते हैं। कांग्रेस ने पाप किया था, पर हमने हरसंभव प्रयास किया। हमने ओबीसी आयोग का गठन किया। सर्वे के आधार पर हमने रिपोर्ट बनाई। निकायवार रिपोर्ट भी सौंपी। वहीं, कांग्रेस और कमलनाथ हमेशा षडयंत्र ही करते रहे। कभी उनकी नीयत ओबीसी को न्याय देने की थी ही नहीं। मैं आज पूछता हूं कि कमलनाथ जी, जब 27% आरक्षण की बात थी तो कोर्ट में आपके एडवोकेट जनरल ओबीसी के लिए खड़े क्यों नहीं हुए? कमलनाथ जी, अब ओबीसी बहुत समझदार है। आपने पाप किया है, वह जान गया है?
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वहीं, सोशल मीडिया पर कमलनाथ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हम पहले दिन से ही कह रहे थे कि मध्यप्रदेश में बगैर ओबीसी आरक्षण के पंचायत व नगरीय निकाय के चुनाव नहीं होना चाहिए। सरकार इसे लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए। हमने ओबीसी आरक्षण को लेकर सदन में भी लड़ाई लड़ी थी और उसके बाद सदन में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव भी पारित हुआ था कि मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण के बगैर पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव नहीं होना चाहिए। ओबीसी वर्ग से उनका जो हक छिना गया था, उसकी दोषी शिवराज
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सरकार थी। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार समय पर ट्रिपल टेस्ट की सम्पूर्ण प्रक्रियाओं का पालन कर देती, आधी-अधूरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं करती तो यह अप्रिय स्थिति कभी भी नहीं बनती लेकिन शिवराज सरकार ओबीसी वर्ग का हक छीन जाने के बाद नींद से जागी।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मामले में राहत प्रदान करने का निर्णय दिया है, उसका हम स्वागत करते हैं। हमारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया था, जिसका पूरा लाभ ओबीसी वर्ग को अभी भी नहीं मिलेगा क्योंकि निर्णय में यह उल्लेखित है कि आरक्षण 50% से अधिक नहीं होना चाहिए। हमें ओबीसी वर्ग का भला करने की कोई उम्मीद शिवराज सरकार से नहीं थी। इस वजह से हमने तो पहले से ही यह निर्णय ले लिया है कि हम निकाय चुनाव में 27% टिकट ओबीसी वर्ग को देंगे और इस वर्ग को उनका पूरा अधिकार देंगे। हम अपना वादा हर हाल में निभाएंगे। हमारा तो दृढ़ संकल्प है कि ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण का हक व अधिकार मिले। उसे हम हर हाल में पूरा करेंगे।
