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MP Panchayat Chunav: जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर आरक्षण, OBC को सिर्फ 4 सीटें, जानें किस वर्ग को कितना रिजर्वेशन
Tue, 31 May 2022 02:04 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 31 May 2022 02:04 PM IST
सार
सोमवार को भोपाल में प्रदेश के 52 जिला पंचायत अध्यक्षों के लिए आरक्षण प्रक्रिया की गई। भोपाल के जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान वाल्मी के ऑडिटोरियम में ये आरक्षण पर मोहर लगी। इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए 14, अनुसूचित जाति के लिए 8 तो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए चार सीटें आरक्षित रखी गई हैं।
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भोपाल में 52 जिला पंचायत अध्यक्षों के लिए आरक्षण प्रक्रिया की गई।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों को लेकर गतिविधियां बढ़ गई हैं। सोमवार को भोपाल में 52 जिला पंचायत अध्यक्षों के लिए आरक्षण प्रक्रिया की गई। भोपाल के जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान वाल्मी के ऑडिटोरियम में ये आरक्षण पर मोहर लगी। इसमें अनुसूचित जनजाति के लिए 14, अनुसूचित जाति के लिए 8 तो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए चार सीटें आरक्षित रखी गई हैं। आधी यानी 26 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं, इसमें महिला-पुरुष का बंटवारा होगा।
बता दें कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग के लिए जिस तरह राजनीति चल रही थी, कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार उन्हें ठीकठाक सीटों पर आरक्षण दिया जा सकता है। पर इस बार सिर्फ चार सीटों पर ही उनका प्रतिनिधित्व रहेगा। पिछले बार ओबीसी की 13 सीटे थीं।
अनुसूचित जाति- आठ सीटें
आठ जिला पंचायतें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई हैं। इनमें इंदौर, ग्वालियर, खंडवा, छिंदवाड़ा, सिवनी, कटनी, रतलाम और देवास शामिल हैं। इंदौर, ग्वालियर, रतलाम और देवास SC महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
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अनुसूचित जनजाति- 14 सीटें
14 जिला पंचायतें अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व रखी गई हैं। इसमें मंडला, डिंडौरी, झाबुआ (महिला), अलीराजपुर (महिला), बड़वानी, श्योपुर (महिला), नर्मदापुरम (होशंगाबाद) (महिला), सतना, सिंगरौली (महिला), हरदा, जबलपुर, बुरहानपुर, रीवा (महिला), नरसिंहपुर (महिला) आरक्षित हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग- चार सीटें
ओबीसी के लिए चार सीटें रखी गई हैं। इसमें गुना, शाजापुर, दमोह, मंदसौर हैं। इसमें भी दो जिले मंदसौर, दमोह महिलाओं के लिए रखे गए हैं।
सामान्य- 26 सीटें
26 सीटें सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगी। इनमें अनूपपुर, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, राजगढ़, मुरैना, खरगोन, पन्ना, उमरिया, धार, बैतूल, भोपाल, भिंड, शहडोल, सीधी, सीहोर, बालाघाट, निवाड़ी, रायसेन, नीमच, सागर, आगर-मालवा, उज्जैन, टीकमगढ़, छतरपुर, दतिया शामिल हैं। इसमें विदिशा, उमरिया,भिंड, शहडोल, निवाड़ी, पन्ना, टीकमगढ़, मुरैना, अनूपपुर, उज्जैन, छतरपुर, सीधी, भोपाल को महिलाओं के लिए रिजर्व रखा गया है।
ओबीसी को चार सीटें क्यों
इस बार के आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग को कम सीटें मिल सकी हैं। पिछली बार 13 सीटें आरक्षित थीं, वहीं इस बार ये सिर्फ चार रह गई हैं। इसके पीछे की वजह बताते हुए पंचायत डायरेक्टर आलोक कुमार का कहना है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ठ निर्देश हैं कि किसी भी हाल में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसलिए ऐसा हुआ हैं।
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बता दें कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग के लिए जिस तरह राजनीति चल रही थी, कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार उन्हें ठीकठाक सीटों पर आरक्षण दिया जा सकता है। पर इस बार सिर्फ चार सीटों पर ही उनका प्रतिनिधित्व रहेगा। पिछले बार ओबीसी की 13 सीटे थीं।
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अनुसूचित जाति- आठ सीटें
आठ जिला पंचायतें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई हैं। इनमें इंदौर, ग्वालियर, खंडवा, छिंदवाड़ा, सिवनी, कटनी, रतलाम और देवास शामिल हैं। इंदौर, ग्वालियर, रतलाम और देवास SC महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
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अनुसूचित जनजाति- 14 सीटें
14 जिला पंचायतें अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व रखी गई हैं। इसमें मंडला, डिंडौरी, झाबुआ (महिला), अलीराजपुर (महिला), बड़वानी, श्योपुर (महिला), नर्मदापुरम (होशंगाबाद) (महिला), सतना, सिंगरौली (महिला), हरदा, जबलपुर, बुरहानपुर, रीवा (महिला), नरसिंहपुर (महिला) आरक्षित हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग- चार सीटें
ओबीसी के लिए चार सीटें रखी गई हैं। इसमें गुना, शाजापुर, दमोह, मंदसौर हैं। इसमें भी दो जिले मंदसौर, दमोह महिलाओं के लिए रखे गए हैं।
सामान्य- 26 सीटें
26 सीटें सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगी। इनमें अनूपपुर, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, राजगढ़, मुरैना, खरगोन, पन्ना, उमरिया, धार, बैतूल, भोपाल, भिंड, शहडोल, सीधी, सीहोर, बालाघाट, निवाड़ी, रायसेन, नीमच, सागर, आगर-मालवा, उज्जैन, टीकमगढ़, छतरपुर, दतिया शामिल हैं। इसमें विदिशा, उमरिया,भिंड, शहडोल, निवाड़ी, पन्ना, टीकमगढ़, मुरैना, अनूपपुर, उज्जैन, छतरपुर, सीधी, भोपाल को महिलाओं के लिए रिजर्व रखा गया है।
ओबीसी को चार सीटें क्यों
इस बार के आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग को कम सीटें मिल सकी हैं। पिछली बार 13 सीटें आरक्षित थीं, वहीं इस बार ये सिर्फ चार रह गई हैं। इसके पीछे की वजह बताते हुए पंचायत डायरेक्टर आलोक कुमार का कहना है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ठ निर्देश हैं कि किसी भी हाल में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसलिए ऐसा हुआ हैं।
