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MP News: 17 सितंबर को नामीबिया से जयपुर पहुंचेंगे चीते, पीएम बाड़े में छोड़ेंगे दो नर और एक मादा चीता
Tue, 13 Sep 2022 09:34 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Tue, 13 Sep 2022 09:34 AM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर अपने जन्मदिवस पर मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। इस दिन पीएम कूनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में दो नर और एक माता चीते को छोड़ेंगे।
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मध्य प्रदेश चीता प्रोजेक्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में 17 सितंबर को इतिहास लिखा जाने वाला है। इसके लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं। सात दशक बाद भारत में चीते दहाड़ने वाले हैं। 17 सितंबर को ही जयपुर के रास्ते नामीबिया से आठ चीते भारत आएंगे। इनमें से तीन चीतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में छोड़ेंगे।
मध्यप्रदेश वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 17 सितंबर को ही नामीबिया से आठ चीते जयपुर आ रहे हैं। मालवाहक विमान से चीते नामीबिया से जयपुर पहुंचेंगे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान भेजा जाएगा। चीतों को कितने हेलीकॉप्टर से कूनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा, यह केंद्र सरकार तय करेगी।
छह बाड़े बनाए
चीतों को शुरुआत में अलग-अलग रखने के लिए छह छोटे बाड़े बनाए गए हैं। चीतों को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में जाने से पहले और बाद में एक महीने तक सबसे अलग रखने की जरूरत होती है। एक महीने के क्वारंटाइन के बाद चीतों को जंगल में छोड़ा जाएगा। 70 साल बाद चीते भारत के जंगलों में दौड़ने वाले हैं।
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पांच फीमेल और तीन मेल चीते
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के सेक्रेटरी एसपी यादव ने बताया कि नामीबिया से पांच फीमेल और तीन मेल चीते लाए जा रहे हैं। एक महीना क्वारंटाइन रखने के दौरान उनकी स्वास्थ्य को मॉनीटर किया जाएगा। उन्हें रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा। इससे 24 घंटे उनके मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी।
कोरिया जिले में मिला था आखिरी चीता
देश में अंतिम चीते की मृत्यु 1947 में कोरिया जिले में हुई थी, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ में है। यह पहले मध्य प्रदेश का हिस्सा था। इस प्रजाति को 1952 में भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि 2009 में अफ्रीकी चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया की कल्पना की गई थी।
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मध्यप्रदेश वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 17 सितंबर को ही नामीबिया से आठ चीते जयपुर आ रहे हैं। मालवाहक विमान से चीते नामीबिया से जयपुर पहुंचेंगे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान भेजा जाएगा। चीतों को कितने हेलीकॉप्टर से कूनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा, यह केंद्र सरकार तय करेगी।
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छह बाड़े बनाए
चीतों को शुरुआत में अलग-अलग रखने के लिए छह छोटे बाड़े बनाए गए हैं। चीतों को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में जाने से पहले और बाद में एक महीने तक सबसे अलग रखने की जरूरत होती है। एक महीने के क्वारंटाइन के बाद चीतों को जंगल में छोड़ा जाएगा। 70 साल बाद चीते भारत के जंगलों में दौड़ने वाले हैं।
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पांच फीमेल और तीन मेल चीते
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के सेक्रेटरी एसपी यादव ने बताया कि नामीबिया से पांच फीमेल और तीन मेल चीते लाए जा रहे हैं। एक महीना क्वारंटाइन रखने के दौरान उनकी स्वास्थ्य को मॉनीटर किया जाएगा। उन्हें रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा। इससे 24 घंटे उनके मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी।
कोरिया जिले में मिला था आखिरी चीता
देश में अंतिम चीते की मृत्यु 1947 में कोरिया जिले में हुई थी, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ में है। यह पहले मध्य प्रदेश का हिस्सा था। इस प्रजाति को 1952 में भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि 2009 में अफ्रीकी चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया की कल्पना की गई थी।
