{"_id":"6394685a71c2e20459038155","slug":"mp-news-action-will-be-taken-against-the-farmers-who-burn-narwai-in-the-fields-in-satna","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: यहां 'नरवाई' जलाने वाले किसानों पर होगी कार्रवाई, जुर्माना भी लगेगा, 156 किसान चिन्हित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: यहां 'नरवाई' जलाने वाले किसानों पर होगी कार्रवाई, जुर्माना भी लगेगा, 156 किसान चिन्हित
Sat, 10 Dec 2022 04:37 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 10 Dec 2022 04:37 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के सतना जिले में अब नरवाई जलाना भारी पड़ सकता है। दरअसल, सतना कलेक्टर अनुराग वर्मा ने जिले के किसानों से अपील की है कि धान और अन्य फसलों को काटने के बाद बचे हुए फसल अवशेष यानी नरवाई जलाना खेती के लिए आत्मघाती कदम है।
विज्ञापन
सतना में नरवाई जलाने पर मनाही
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सतना जिले में धान फसल की कटाई लगभग शुरू हो गई है। धान फसल की कटाई के बाद सामान्य तौर पर किसान नरवाई को जला देते हैं, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होती है।
विज्ञापन
इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन के नोटिफिकेशन में निषेधात्मक निर्देश और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के मामले तथा प्रमुख सचिव किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के निर्देश व उनके पालन की प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी है। निर्देशों के उल्लंघन किए जाने पर व्यक्ति को नोटिफिकेशन प्रावधान और निर्देशानुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति की राशि देनी होगी। कृषि अधिकारी केसी अहिरवार ने बताया, जिले में अभी तक 156 किसान नरवाई जलाने की घटनाएं चिन्हित की गई हैं, जिन किसानों ने नरवाई जलाई है उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।
विज्ञापन
वसूली की राशि इस प्रकार होगी...
दो एकड़ से कम भूमि रखने वाले किसान को 2500 रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देनी होगी। दो एकड़ से अधिक, लेकिन पांच एकड़ से कम भूमि रखने वाले किसान को 5000 रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देनी होगी। पांच एकड से अधिक भूमि रखने वाले किसान को 15000 रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देनी होगी। कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं को देखते हुए रबी की कटाई में कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रॉरीपर का उपयोग करके किसान अपनी फसल के अवशेषों से भूसा प्राप्त कर सकते हैं।
विज्ञापन
खेतों को ये होती है हानि...
खेत में गेहूं और अन्य फसलों के कृषि अपशिष्टों को जलाने से किसानों के खेतों में निम्न हानियां हो सकती हैं। जैसे कि भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त हो जाती है। भूमि में उपस्थित सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने के फलस्वरूप जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता है। भूमि की ऊपरी पर्त में ही पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं। आग लगाने के कारण पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं।
नरवाई का उपयोग निम्न तरीकों से किया जा सकता है...
नरवाई जलाने की अपेक्षा अवशेषों और डंठलों को एकत्र कर जैविक खाद जैसे कि भू-नाडेप और वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने में उपयोग किया जाए तो वे बहुत जल्दी सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। किसान स्वयं का जैविक खाद बना सकते हैं, खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर या डिस्क हेरो आदि कि सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश खाद की बचत की जा सकती है।
पशुओं के लिए भूसा और खेत के लिए बहुमूल्य पोषक तत्वों कि उपलब्धता बढ़ने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम को सामान्य हार्वेस्टर से गेहूं कटवाने के स्थान पर स्ट्रारीपर और हार्वेस्टर का प्रयोग करें। खेतों में नरवाई जलाने का कृत्य जिला कलेक्टर की ओर से प्रतिबंधित किया गया है। नरवाई में आग लगाने पर पुलिस की ओर से मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं।
