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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP MISSION 2023: Jayas will challenge Congress-BJP, will hit more than 47 tribal seats in the assembly

MP MISSION 2023: कांग्रेस-बीजेपी को चुनौती देंगी जयस, विधानसभा की 47 से अधिक आदिवासी सीटों पर ठोकेगी ताल

Sun, 31 Jul 2022 07:44 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 31 Jul 2022 07:44 PM IST
सार

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 का मुकाबला बड़ा रोचक होने वाला है। जयस आगामी 2023 के विधानसभा चुनाव में 47 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों और समाज के प्रभाव वाली सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

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MP MISSION 2023: Jayas will challenge Congress-BJP, will hit more than 47 tribal seats in the assembly
जयस ने आगामी विधानसभा की तैयारी शुरू की - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एमपी में आदिवासी वोटरों को साधने में जुटी बीजेपी-कांग्रेस को चुनौती देने जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने भी तैयारी शुरू कर दी है। जयस आगामी 2023 के विधानसभा चुनाव में 47 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों और समाज के प्रभाव वाली सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
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मध्य प्रदेश में अभी जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन से एकमात्र विधायक डॉक्टर हीरालाल अलावा (मनावर) हैं। अलावा जयस संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक भी हैं। रविवार को भोपाल के मानस भवन में जयस संगठन का राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मध्य प्रदेश के सभी क्षेत्रों से जयस संगठन के निर्वाचित सरपंच, जिला जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य एवं अन्य जयस कार्यकर्ता शामिल हुए।
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डॉ. हीरालाल अलावा ने बताया कि गांव की सरकार से संसद तक राजनीति में आदिवासी युवाओं की हिस्सेदारी एवं जयस मिशन युवा नेतृत्व के लिए संगठन का कार्यक्रम रखा गया था। इसमें आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर रणनीति तैयार की गई। अलावा ने बताया कि संगठन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित और प्रभाव रखने वाली सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इसके लिए अभी से विधानसभा स्तर पर उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करना, चुनाव की रणनीति तैयार करना, बूथ स्तर की कमेटियां गठित करना, सभी पंचायतों में जयस युवाओं द्वारा सामाजिक, राजनीतिक एवं संवैधानिक जनजागरूकता फैलाना, पंचायत स्तर की चुनावी टीम गठित करना तय किया गया।
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इसलिए बड़ी कांग्रेस-बीजेपी की मुसीबत
प्रदेश में आदिवासियों की बड़ी आबादी होने से 230 विधानसभा में से 84 सीटों पर उनका सीधा प्रभाव है। 2013 में इनमें से बीजेपी को 59 सीटों पर जीत मिली थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 84 में से 34 सीट पर जीत मिली थी। उसकी 25 सीटें कम हो गईं। इस वजह से बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। प्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा ने 31 सीटें जीती थी। वहीं, कांग्रेस के खाते में 15 सीट आईं। 2018 के चुनाव में आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा सिर्फ 16 पर ही जीत दर्ज कर सकी। कांग्रेस ने 30 सीटें जीत ली थीं। एक पर निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में इन सीटों पर जयस की संख्या बढ़ती है तो बीजेपी और कांग्रेस के लिए सरकार बनाने की चुनौती होगी। बता दें बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दल आदिवासी वोटरों को साधने में जुटे हुए है। 

संगठन ने यह भी लिए निर्णय-
  • 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करवाने के लिए जल्द ही सभी जिलों में आदिवसी समाज राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश के नाम ज्ञापन देगा।
  • संविधान की पांचवीं अनुसूची की अधिसूचना जारी कर 89 ट्राइबल ब्लॉकों में पांचवीं अनुसूची का अनुपालन कराने के लिए राजनीतिक दबाव तैयार करना
  • वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत सभी आदिवासियों/वननिवासियों को वनाधिकार भूमि के पट्टे दिलाना
  • पेसा अधिनियम एवं संविधान में आदिवासी समुदाय के हित के लिए दिए गए अन्य प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू कराने के लिए प्रत्येक विकासखंड से राजधानी स्तर पैदल मार्च कर जनजागरूक अभियान चलाया जाएगा।
  • प्रदेश के सभी जिलों में संगठन 25 लाख नए सदस्य बनाने पर काम करेगा।
  • बेराजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और बैकलॉग पदों को शीर्घ भरने अभियान चलाया जाएगा।
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