MP: पंचायत सचिव की संपति देख उड़ जाएंगे होश
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मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के एक से बढ़कर एक किस्से सामने आ रहे हैं। लोकायुक्त पुलिस ने एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया है जहां अदनी सी तनख्वाह पाने वाला ग्राम पंचायत सचिव करोडों की संपति का मालिक निकला।
पुलिस ने उसके यहां छापा मारा तो उसकी संपति जानकर उनके भी होश उड़ गए। शाही ठाठ से रहने वाले पंचायत सचिव की बेईमानी से कमाई गई संपति को लोकायुक्त पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
अंग्रेजी अखबार टीओआई में छपी खबर के अनुसार मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के ग्राम पंचायत सचिव राजेन्द्र प्रसाद द्विवेदी ने नौकरी शुरू करने के मात्र 12 सालों के अंदर बेसुमार संपति अर्जित कर ली।
बेईमानी से इकट्ठी की करोडों की कमाई
साल 2003 में मात्र पांच हजार रुपये की तनख्वाह से नौकरी शुरू करने वाले राजेन्द्र प्रसाद के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा। जिसमें उसके यहां से उसके आय के स्रोतों से लगभग 1000 गुणा ज्यादा संपति का पता चला।
छापे में उसके नाम पर बंधवगढ़ टाइगर रिजर्व रेंज के निकट मानपुर में प्रताप नाम के लक्जरी होटल का पता चला है। इसके अलावा उसके नाम 20 से ज्यादा जगहों पर खेती योग्य जमीन का पता चला है जो उसने 2009 से 2015 के बीच में समरा, सेमरी और मानपुर गांव में खरीदी हैं।
इसके अलावा 15 दुकानें, तीन एसयूवी, एक जेसीबी मशीन, दो ट्रैक्टर और तीन मोटरसाइकिल की जानकारी भी मिली है। उसके घर से मिले वाहनों की कुल कीमत भी लगभग 1 करोड़ के करीब है।
लाखों की नकदी और बैंक खातों को किया गया सीज
उसके घर से छापे के दौरान 3.69 लाख की नकदी, बैंक खातों से 8 लाख और काफी संख्या में एलआईसी पॉलिसी और निवेश किए गए खातों को लोकायुक्त पुलिस ने सीज कर दिया है।
छापे में शामिल रहे एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि द्विवेदी ने भ्रष्टाचार से कुल कितनी संपति इकट्ठी की है। बता दें कि आरोपी द्विवेदी की मां मीरा देवी 2009 और 2015 में गांव की सरपंच भी चुनी गई हैं।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों द्वारा इस तरह करोडों की संपति अर्जित करने की बात सामने आई है। इससे पहले भी कई चपरासी तक करोडों की संपति के मालिक निकल चुके हैं।
