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MP Nagar Nigam Election: पांच पर BJP, तीन पर कांग्रेस मजबूत, छह सीटों पर मुकाबले की स्थिति, दो पर त्रिकोणीय टक्कर

Wed, 13 Jul 2022 11:12 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 13 Jul 2022 11:12 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के दो चरणों का मतदान बुधवार को समाप्त हो गया। 16 महापौर और 6507 पार्षद के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया। अब सभी की नजरें 17 जुलाई और 20 जुलाई को आने वाले परिणामों पर रहेंगी।

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MP Local Body Election: BJP on five in 16, Congress's strong claim on three, tough fight between both on 6, triangular contest on two
आप कांग्रेस बीजेपी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के दो चरणों का मतदान बुधवार को समाप्त हो गया। 16 महापौर और 6507 पार्षद के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया। अब सभी की नजरें 17 जुलाई और 20 जुलाई को आने वाले परिणामों पर रहेंगी।
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प्रदेश में पिछली बार सभी 16 महापौर सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। इस बार सीटों को बचाने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सत्ता पाने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ दोनों ने ही प्रचार में पूरा जोर लगाया। प्रदेश में पहले चरण में 6 जुलाई को 11 नगर निगम और 13 जुलाई को पांच नगर निगम सीटों पर मतदान हुआ। इन 16 सीटों पर पांच पर बीजेपी और तीन पर कांग्रेस का दावा है। जबकि 6 सीटों पर सीधी टक्कर है। वहीं, दो सीट कटनी और सिंगरौली में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति है।
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इस बार कांग्रेस कुछ सीटें जीतने की स्थिति में दिख रही है। वहीं, बीजेपी की जीत रही सीटों पर हार जीत का अंतर बहुत कम रहने का अनुमान है। इसका कारण बीजेपी में टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ता में नाराजगी, वरिष्ठों की अनदेखी और मतदान प्रतिशत कम होना बताया जा रहा है। साथ ही कांग्रेस का एकजुट होकर चुनाव लड़ना और कुछ जगह पहले से ही प्रत्याशी का चयन करना है। यदि अनुमान के अनुसार परिणाम आते है तो यह बीजेपी के लिए चिंता की बात है। क्योंकि नगर निगम को चुनाव को 2023 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। बता दें प्रदेश में प्रथम चरण में 6 जुलाई को 61% और दूसरे चरण में 13 जुलाई को अनुमान के अनुसार 72% मतदान हुआ है। 
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यहां भाजपा का दावा मजबूत
  1. इंदौरः इंदौर में बीजेपी के प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव और कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला के बीच मुकाबला है। यहां पर 22 साल से बीजेपी महापौर की कुर्सी पर काबिज है। यहां कांग्रेस के संजय शुक्ला ने अकेले जबरदस्त चुनाव लड़ा है, लेकिन बीजेपी के संगठन और संघ ने अंतिम समय में जोर लगा दिया। जिससे बीजेपी जीत बरकरार रखती दिख रही है। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के चुनावी मैनेजमेंट के कारण जीत-हार का अंतर बहुत कम रहने का अनुमान है।  
  2. खंडवाः खंडवा में बीजेपी की अमृता यादव और कांग्रेस की आशा मिश्रा के बीच मुकाबला है। यह बीजेपी की सुरक्षित सीट मानी जाती है। यहां पर बीजेपी का संगठन एकजुट होकर चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे हावी रहे। उदयपुर की घटना का प्रभाव पड़ा। इससे यह सीट पर बीजेपी की स्थिति और बेहतर हुई। हालांकि कांग्रेस ने भी एकजुट होकर अच्छा चुनाव लड़ा।
  3. देवास: देवास से भाजपा की गीता अग्रवाल और कांग्रेस की विनोदिनी व्यास से मुकाबला है। यहां पर कांग्रेस को देरी से प्रत्याशी चयन करने का नुकसान हो रहा है। वहीं, कांग्रेस के बागी कार्यकर्ताओं के कारण भी नुकसान हो रहा है। बीजेपी को एकजुटता से चुनाव लड़ने का फायदा होता दिख रहा है। यहां गीता अग्रवाल बीजेपी की सत्ता बरकरार रखती दिख रही है।
  4. सतना- सतना में बीजेपी के योगेश ताम्रकार और कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाह के बीच लड़ाई है। बीजेपी और कांग्रेस ने यहां पर जोर लगा दिया है। यहां पर बसपा प्रत्याशी की वजह से कांग्रेस का गणित बिगड़ रहा है। इसके अलावा यहां कांग्रेस को एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ने का भी नुकसान हो रहा है। ऐसे में बीजेपी यहां पर दोबारा सत्ता में पा सकती है।
  5. मुरैना: मुरैना में भाजपा की मीना जाटव और कांग्रेस की शारदा सोलंकी के बीच मुकाबला है। यहां पर मतदान का बढ़ा प्रतिशत बीजेपी के पक्ष में जाता दिख रहा है। हालांकि बीएसपी प्रत्याशी के ज्यादा वोट लेने पर कांग्रेस को फायदा हो सकता है। हालांकि यहां पर भाजपा आगे दिख रही है।

इन सीटों पर कांग्रेस का दावा मजबूत
  1. छिंदवाड़ा- छिंदवाड़ा में बीजेपी के अनंत धुर्वे और कांग्रेस के विक्रम अहाके में मुकाबला है। छिंदवाड़ा कांग्रेस का गढ़ है। हालांकि पिछली बार बीजेपी महापौर पद पर काबिज हुई। इस बार बीजेपी में गुटबाजी हावी रही। सरकारी कर्मचारी को टिकट देने से जनता की नाराजगी का बीजेपी को नुकसान हो सकता है। इस सीट पर कांग्रेस के पक्ष में परिणाम आते दिख रहे है।
  2. जबलपुरः जबलपुर में बीजेपी प्रत्याशी जितेंद्र जामदार और कांग्रेस के जगत बहादुर सिंह अन्नू में मुकाबला हुआ। यहां पर 22 साल से बीजेपी का महापौर पद पर कब्जा है। बीजेपी प्रत्याशी जामदार संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन उनका कोई जनाधार नहीं है। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी अन्नू को उनके व्यवहारिक और अच्छी छवि का फायदा मिलता दिख रहा है। कांग्रेस के एकजुट होकर चुनाव लड़ने का भी फायदा मिल रहा है। ऐसे में यह सीट बीजेपी से कांग्रेस लेती दिख रही है।
  3. उज्जैनः उज्जैन में बीजेपी के मुकेश टटवाल और कांग्रेस के महेश परमार चुनाव मैदान में है। यहां पर महेश परमार की स्थिति अच्छी है। कोरोना काल में अच्छा काम किया। जनाधार वाले नेता हैं। हालांकि, बीजेपी ने भी परमार को टक्कर देने के लिए पूरा जोर लगा दिया है। इस सीट को निकालने के लिए बीजेपी और संघ ने पूरी ताकत लगा दी है। फिर भी कांग्रेस को बढ़त है।  

यहां तीसरा भी बाजी मार सकता है
  1. कटनीकटनी में भाजपा की ज्योति दीक्षित और कांग्रेस की श्रेया खंडेलवाल के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति सूरी के बीच मुकाबला हैं। भाजपा की बागी उम्मीदवार सूरी ने पूरा गणित बिगाड़ दिया है। दरअसल सूरी के बागी होने के साथ ही बीजेपी के नाराज कार्यकर्ता भी दो गुट में बंट गए। यही कारण है कि वरिष्ठ नेताओं को काटनी में प्रचार में जोर लगाना पड़ा। यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है।
  2. सिंगरौली: सिंगरौली में भाजपा के चंद्रप्रताप विश्वकर्मा और कांग्रेस के अरविन्द चंदेल के साथ ही आम आदमी पार्टी की रानी अग्रवाल ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टी में प्रत्याशी के चयन को लेकर विरोध है। इसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिलता दिख रहा है। वहीं, रानी अग्रवाल पिछला विधानसभा चुनाव बहुत कम वोट से हारी थी। यहां पर आम आदमी पार्टी को बेहतर स्थिति में बताया जा रहा है।  

यहां आ सकते हैं चौंकाने वाले परिणाम, आखिरी समय तक पलट सकता है रिजल्ट
  1. सागरः सागर में बीजेपी प्रत्याशी संगीता तिवारी और कांग्रेस की निधि जैन के बीच मुकाबला हुआ। यहां पर बड़ी संख्या में जैन मतदाता हैं। बीजेपी के जैन प्रत्याशी नहीं बनाने से सामाज में नाराजगी रही है। जिसका फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है। वहीं, दूसरी तरफ, बीजेपी को गुटबाजी का भी नुकसान हो रहा है। यहां निधि जैन बीजेपी प्रत्याशी पर भारी दिखीं।
  2. रतलाम: यहां भाजपा के प्रहलाद पटेल और कांग्रेस के मयंक जाट के बीच टक्कर है। यहां बीजेपी प्रत्याशी के टिकट को लेकर विरोध रहा। अंतिम समय में वरिष्ठ नेताओं को नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने जाना पड़ा। वहीं, कांग्रेस ने युवा नेता मयंक जाट को मैदान में उतरा। जिसके समर्थन में युवाओं ने एकजुट होकर काम किया। जिससे मयंक जाट की जीत पक्की लग रही थी। हालांकि अंतिम समय में मुकाबला टक्कर का हो गया।
  3. भोपाल: भोपाल में भाजपा से मालती राय और कांग्रेस से विभा पटेल में मुकाबला है। यहां पर कांग्रेस और बीजेपी में टक्कर है। यहां पर पिछले दो बार से बीजेपी का महापौर सीट पर कब्जा है। शहर में मुस्लिम इलाकों में ज्यादा वोटिंग हुई। जिसे कांग्रेस का वोटर माना जाता है। वहीं, विभा पटेल पूर्व महापौर रह चुकी हैं। जो जाना पहचाना चेहरा और नाम हैं। राय के लिए संगठन और बीजेपी ने मेहनत की। लेकिन कम वोटिंग से मामला टक्कर का हो गया है।  
  4. रीवा- रीवा में भाजपा के प्रबोध व्यास और कांग्रेस के अजय मिश्रा के बीच मुकाबला है। यहां पर कांग्रेस उम्मीदवार अजय मिश्रा की जनता के बीच छवि अच्छी है। साथ ही कांग्रेस ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा। जबकि बीजेपी प्रत्याशी के लिए स्थानीय नेताओं ने पूरा जोर लगा दिया। यहां पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है।
  5. बुरहानपुरः बुरहानपुर में बीजेपी की माधुरी पटेल और कांग्रेस की शहनाज अंसारी चुनाव मैदान में है। यहां बीजेपी में गुटबाजी का नुकसान हो रहा है। यहां अल्पसंख्यक वोटरों की बड़ी संख्या है। यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से कांग्रेस को नुकसान होने की बात कही जा रही है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला टक्कर का होने की बात कही जा रही है।
  6. ग्वालियर: ग्वालियर में कांग्रेस प्रत्याशी शोभा सिकरवार और बीजेपी प्रत्याशी सुमन शर्मा के बीच मुकाबला है। बीजेपी के स्थानीय नेताओं की गुटबाजी से बीजेपी को नुकसान होता दिख रहा है। कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ी। वहीं, शहर में कम मतदान और अल्पसंख्य इलाकों में ज्यादा मतदान से कांग्रेस मजबूत स्थिति में दिख रही है। हालांकि यहां 55 साल से कांग्रेस महापौर का चुनाव नहीं जीत पाई है। यदि इस बार कांग्रेस चुनाव जीतती है तो बड़ा उलटफेर होगा। 
 

 

 
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