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मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल 1 मई से 12 मई तक लाड़ली लक्ष्मी उत्सव मनाया जाएगा।
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने पर 8 से 7 लाख रुपएये फीस देनी पड़ती है। यह फीस सरकार भरेगी। उन्होंने बेटियों को कहा कि अब तुम फीस की चिंता मत करना। तुम्हारा मामा फीस भरेगा। तुम इंजीनियर, डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील, अच्छा खिलाड़ी, अच्छा कलाकार, आईएएस और आईपीएस जिस क्षेत्र में जाना चाहती हो जाओ। तुम्हारा मामा तुम्हारे साथ है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी ग्राम पंचायतों काे सम्मानित किया जाएगा, जहां एक भी बाल विवाह नहीं होगा, बच्चियां कुपोषित नहीं रहेंगी, बालिका अपराध घटित नहीं होगा, शाला में 100 प्रतिशत प्रवेश और टीकाकरण होगा उन्हें लाडली पंचायत घोषित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल 2 मई से 12 मई तक लाडली लक्ष्मी उत्सव मनाया जाएगा।
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कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने लाड़लियों का फूलों से स्वागत किया।
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अब तक 42.14 लाख लाडली लक्ष्मी रजिस्टर
प्रदेश में 2007 से अब तक 42.08 लाख से अधिक बालिकाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है। योजना के तहत अब तक कक्षा 6, कक्षा 9, कक्षा 11 और कक्षा 12 में प्रवेशित कुल 9.05 लाख बालिकाओं को 231.07 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति बांटी की गई। इसका उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सोच में परिवर्तन लाना और उनकी शिक्षा की निरंतरता को सुनिश्चित करना है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश में 42 लाख 14 हजार लाडली लक्ष्मी बेटियां हो गई है।
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प्रदेश में बाल विवाह में 93% की कमी आई
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की पांचवीं रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में बाल विवाह में 93 प्रतिशत की कमी आई है। 2011 की जनगणना के समय प्रदेश का शिशु लिंगानुपात (जन्म के समय) 919 था, जो अब बढ़कर 956 हो चुका है। ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड जैसे कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में लिंगानुपात में सकारात्मक परिवर्तन आया है। 2 बच्चों के बाद और अधिक बच्चों की चाह न रखने वाले परिवारों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। यह प्रतिशत 78 से अधिक हो गया है। बेटियों से ज्यादा बेटे चाहने वाले महिलाओं और पुरुषों का प्रतिशत 18 से घटकर 13 हो गया है। घरेलू हिंसा के मामले में 33 प्रतिशत से घटकर 28 प्रतिशत हो गए हैं।
93% लोग बेटी को 12वीं के बाद पढ़ाना चाहते हैं
अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन और नीति विश्लेषण संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार बेटी की चाह को लेकर नवविवाहितों एवं किशोर की सोच बेहतर हुई है। हर वर्ग के 99 प्रतिशत लोग बेटी का विवाह 18 वर्ष के बाद कराना चाहते हैं। लगभग 93 प्रतिशत लोग बेटी को 12वीं कक्षा से अधिक पढ़ाना चाहते हैं। ज्यादातर पालक लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए बेटी की शिक्षा जारी रखना चाहते हैं। 90% से अधिक की सोच में बालिकाओं के जन्म, स्वास्थ्य, खान-पान संबंधी व्यवहारों, शिक्षा, घर में होने वाले व्यवहार एवं विवाह के संबंध में सकारात्मक परिवर्तन आए हैं।